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2600 करोड़ कर्जमाफी की Second लिस्ट में नाम आया या नहीं, 2 जनवरी 2024 ब्रेकिंग न्यूज़

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले किसानों को लेकर सभी पार्टियों ने बयान जारी किया था और साथ में शिवराज सरकार के द्वारा भी यह बयान दिया गया था कि सरकार बनते ही किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा जिसमें संभवत साढे तीन लाख तक और 4 लाख के पहले तक का कर्ज माफ किया जाना सुनिश्चित हुआ था। अब किसानों के लिए वह घड़ी आ गई है जब किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा और 2024 में मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के द्वारा किसान कर्ज माफी के लिए योजना को फिर से लागू किया जाएगा। आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि कैसे किसान कर्ज माफी के लिए किसान आवेदन कर सकते हैं और जनवरी में इसकी सेकंड लिस्ट के अंतर्गत किस-किस का नाम आया है।

किसान कर्ज माफी second लिस्ट 2024–

किसान कर्ज माफी के लिए अभी सरकार की तरफ से कोई भी लिस्ट जारी नहीं की गई है लेकिन इससे संबंधित जल्द ही सरकार लिस्ट जारी कर सकती है और यह भी पता चल जाएगा कि किसानों को कर्ज माफी के लिए क्या करना होगा। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि शिवराज सरकार के द्वारा जिन भी योजनाओं का क्रियान्वयन तैयार किया गया था और जो भी योजनाएं चलाई गई थी उनको बंद नहीं किया जाएगा आगे चलकर सभी योजनाओं को पूरा किया जाएगा और किसानों के लिए भी कर्ज माफी का किया हुआ वादा पूरा किया जाएगा।

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कब तक होगा किसान कर्ज माफ?

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में 17 नवंबर को कंप्लीट किए गए थे और उसके बाद से नए मुख्यमंत्री के तौर पर डॉ मोहन यादव जी को चुना गया । लेकिन अब समय आ गया है कि लोकसभा चुनाव से पहले किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा या नहीं तो अभी किसानों की कर्ज माफी योजना से संबंधित सरकार का कोई भी बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन ऐसी संभावना है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

प्राकृतिक आपदा से हुए किसान बर्बाद–

प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में किसानों के लिए केवल एक ही समस्या होती है कि उनका सारा धन खेती की शुरुआत करने में खर्च हो जाता है और जब खेती की पैदावार प्राप्त करने का समय आता है तो किसी न किसी कारण से प्राकृतिक आपदा से पैदावार खत्म हो जाती है अर्थात खेती नष्ट हो जाती है जिस वजह से किसान कर्ज में डूब जाते हैं।

खेती की शुरुआत करने से पहले किसानों के द्वारा बैंकों के माध्यम से कर्ज लिया जाता है और सरकार से उधारी के तौर पर खाद बीज मुहैया करते हैं लेकिन बाद में जब पैदावार नहीं होती तो इस सरकार के अथवा बैंकों के कर्जदार हो जाते हैं। पैदावार ना होने के कारण किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ होते हैं जिसके लिए सरकार के कई प्रयास होते हैं और अगर सरकार के द्वारा किसानों का कर्ज माफ नहीं किया गया तो किसानों के लिए एक बहुत ही बड़ी समस्या पैदा हो जाती है ।

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