ऐसी माटी न भारत के खंड खंड में लिरिक्स : Lyrics गीत की सम्पूर्ण लाइनें

बुंदेलखंड के सर्वाधिक लोकप्रिय लोकगीत की सम्पूर्ण लिरिक्स ( लाइनें) आज के इस आर्टिकल में आपको मिलने वाली हैं |

ऐसी माटी ना भारत के खंड खंड में जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में ।

ऐसी माटी ना भारत के खंड खंड में।
जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में ।। 2
दिवस धाम ओरछा में वास करे रघुवर,
और हरदोल मैहर की माई जटाशंकर।
छीर सागर की गहराई भीमकुंड में,
सो जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।2
चित्रकूट तपोभूमि पावन पुनीता,
वर्षों तक रमे रहे लखन राम सीता।
देव ललचत रय आवे बुंदेलखंड में,
जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।
प्यारी नर्मदा गंगा माई को किनारा,
और मंदाकिनी यमुना बेतवा की धारा।

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ऋषि मुनियन की करम भूमि है ई खंड में,
सो जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।
अरे छत्रसाल वीर लक्ष्मीबाई सी नारी,
महाराजा मर्दन सिंह आल्हा कथा न्यारी।
सो न्यारी शक्ति है कुंडेश्वर के ई कुंड में,
सो जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।
अरे सोनागिरी कुंडलपुर जैन तीर्थ न्यारे,
सदन शाह तुलसी एई भूमि पे पधारे।
व्यास ईश्वर के सौन कविता कड़ी छंद में,
सो जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।
अरे चंदेरी चीरन की करें जग बढ़ाई,
इते बैजू बावरा ने समाधि लगाई।
हीरा पन्ना के सोहे राधा कृष्ण कंठ में,
सो जनम दईओ विधाता बुंदेलखंड में।
ऐसी माटी ना भारत के खंड खंड में,
जनम दईंओ विधाता बुंदेलखंड में।।2

बागेश्वर धाम महाराज जी ने भी गाया ( ऐसी माटी न भारत के खंड खंड में ) लोकगीत

बागेश्वर धाम महाराज के मुख से इस लोकगीत को सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है |

ऐसी माटी न भारत के खंड खंड में लोकगीत के गीतकार – रामकिशोर मुखिया जी

यह गीत रामकिशोर मुखिया जी ने लिखा है |
यह गीत मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का है जो बहुत ही प्रसिद्ध है। इस गीत में बुंदेलखंड में पुनः जनम देने के बारे में बताया गया है, और पूरे बुंदेलखंड की विशेषताओ का वर्णन किया गया है इसमें मप्र में जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति आदि का वर्णन है।

बुंदेलखंड की धरती वीरो से सुसज्जित धरती है, बुंदेलखंड में एक से एक सूरवीर, इतिहासकार, गीतकार, धार्मिक स्थल स्थित है | बुंदेलखंड में वीरो के रूप में छत्रसाल, महारानी लक्ष्मीबाई, तथा धार्मिक स्थलों के रूप में खजुराहो, भीमकुंड, ओरछा, मैहर की शारदा माँ आदि हैं |

रामकिशोर मुखिया जी ने गाया इस लोकगीत ( ऐसी माटी न भारत के खंड खंड में) को

बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगीत गायक श्री रामकिशोर मुखिया जी ने इस लोकगीत को गाया है, उनके द्वारा गाए गए इस लोकगीत को सुनकर आपका मन बुंदेलखंड की विशेषताओं को सुनकर प्रफुल्लित हो जाएगा | मुखिया जी प्रख्याति का प्रमुख कारण यही बुंदेलखंड का लोकगीत है |

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