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बैतूल जिला के पर्यटन स्थल Betul Tourist Places GK History

हेलो दोस्तों !आज हम बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के बारे में जिसमें आज हम आपको बताएंगे बैतूल जिले की स्थापना कब हुई और बैतूल जिले के अंतर्गत कौन-कौन से पर्यटक स्थल आते हैं? जो राष्ट्रीय महत्व के हैं और जहां पर लोगों की भीड़ जमा रहती है |

दोस्तों बैतूल जिला का इतिहास बहुत ही पुराना है यहां पर ब्रिटिश सरकार भी बैतूल जिले के कई हिस्सों में अपनी छावनी को ठहरा चुकी है | बैतूल जिला में मध्यप्रदेश की ताप्ती नदी का उद्गम होता है यहां पर बहुत सुंदर लगता है इसी नदी के माध्यम से यहां की जलापूर्ति की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है | दोस्तों आज हम प्रमुख रूप से चर्चा करने वाले हैं कि बैतूल जिले के अंतर्गत कौन-कौन से पर्यटक स्थल आते हैं और इन पर्यटक स्थलों को कब और किसने बनवाया | यहां पर इतिहास काल के दौरान कौन-कौन सी घटनाएं घटित हुई सभी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे |

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बैतूल जिला
तापी नदी अथवा ताप्ती नदीबैतूल जिले के मुलताई नामक स्थान से उद्गम
शेरगढ़ का किलाशेरगढ़ के आदिवासी राजा द्वारा निर्मित
संभागनर्मदा पुरम
कुकुरू चोटीबैतूल जिले की सबसे ऊंची चोटी
कुकुर चोटी की ऊंचाई1137 meter
मुक्तागिरी में जैन मंदिरों की संख्या52
सालबर्डी महादेव के लिए प्रसिद्ध
ताप्ती नदी की लंबाई724 किलोमीटर
भैंसा देहिबैतूल जिले का पर्यटक स्थल
अभ्यारणकालीभीत अभ्यारण
मेलाभोपाल मेला
खनिजग्रेफाइट
महाविद्यालयवन संरक्षण महाविद्यालय
सर्वाधिक खेतीकॉफी उत्पादन
बालाजी मंदिरसैम वर्मा शासक
अभिलेखबरसालो अभिलेख

बैतूल जिला के अंतर्गत आने वाले कुछ प्रमुख पर्यटक स्थल-

  • ✔️ कुकरू चोटी
  • ✔️ मुक्तागिरी जैन तीर्थ
  • ✔️ मुक्तागिरी का सिद्ध क्षेत्र
  • ✔️ सालबर्डी के महादेव
  • ✔️ बालाजीपुरम
  • ✔️ ताप्ती उद्गम
  • ✔️ शेरगढ़ का किला

▶️ कुकरू चोटी बैतूल

बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाली कुकरू चोटी यहां का प्रमुख पर्यटक स्थल है यहां की सुंदरता बड़ी अनोखी है | बैतूल जिले की यह सबसे ऊंची चोटी है और यह जोड़ी सतपुड़ा पर्वत की सुंदर वादियों में से एक है | दोस्तों यहां पर फ्री टाइम बिताने के लिए लोग अक्सर इस चोटी पर आते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं |

कुकरू चोटी बैतूल

कुकरू चोटी की कुछ खास बातें-

⚫️ दोस्तों बैतूल जिले की यह कुकुरू चोटी लगभग बैतूल जिले के मुख्यालय से 92 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यहां पर जाने आने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती |

⚫️ कुकुरू चोटी के आसपास मध्य प्रदेश की जानी मानी और प्रसिद्ध है कोरकू जनजाति निवास करती है इस चोटी के पास में कोरकू जनजाति के निवास के कारण इस चोटी का नाम कुकरू चोटी रख दिया गया है |

⚫️ दोस्तों मध्यप्रदेश में जिस तरीके से पचमढ़ी जाना जाता है अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ठीक उसी प्रकार बैतूल जिले में कुकरू चोटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए फेमस है |

⚫️ दोस्तों प्रकृति का जितना अनुभव आप धूपगढ़ चोटी पर करते हैं ठीक उसी प्रकार आप कुकुरू चोटी पर भी प्रकृति का आनंद ले सकते हैं |

Kukru Peak Betul

⚫️ कुकरू चोटी की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 1137 मीटर है

⚫️ कुकरू चोटी के सुबह के समय उगते हुए सूर्य को और शाम के समय डूबते हुए सूर्य को यदि देखा जाए तो यह दृश्य बहुत ही खूबसूरत और मनोरम लगता है | आप यहां पर खुशी का ठीक उसी प्रकार अनुभव कर सकते हैं जिस तरीके से आप धूपगढ़ में करते हैं |

⚫️ दोस्तों पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां पर काफी के बागवान लगाए जाते हैं जो पूरे मध्यप्रदेश में फेमस है |

⚫️ दोस्तों यह पर्यटक स्थल पहाड़ी एरिया होने के कारण बहुत ही सुंदर लगता है क्योंकि यहां पर हरे भरे पेड़ पौधे और सुंदर पर्वत और पहाड़ हैं |

▶️ मुक्तागिरी जैन तीर्थ बैतूल

दोस्तों बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाला मुक्तागिरी जैन तीर्थ यहां का सबसे विशाल और लंबा मंदिर वाला जैन तीर्थ स्थल है | मुक्तागिरी जैन तीर्थ स्थल पर मंदिरों की संख्या टोटल 56 है और यह सभी मंदिर अपने-अपने महत्व के लिए जाने जाते हैं | मुक्तागिरी जैन तीर्थ स्थल पर आप भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को देख सकते हैं जो कि बहुत पुरानी और बहुत सुंदर प्रतिमा है |

यहां पर आपको एक मान स्तंभ देखने को मिलता है जिसके बारे में कहा जाता है कि आपको यहां पर मन की शांति और सुकून मिलता है | यहां पर आपको जितने भी मंदिर देखने को मिलते हैं सभी मंदिर जैन संप्रदाय के हैं और जैन संप्रदाय में भी दिगंबर जैन संप्रदाय के है|

 मुक्तागिरी जैन तीर्थ बैतूल

दोस्तों ऐसे बहुत से क्षेत्र मिल जाएंगे आपको जहां पर जैन संप्रदाय के तीर्थ स्थलों पर अन्य धर्म को मानने वाले लोग भी जैन तीर्थ स्थल पर एकत्रित होते हैं और दर्शन करते हैं | उन्हीं जैन तीर्थ स्थलों में से ही यह भी एक तीर्थ स्थल है जहां पर हिंदू धर्म से लेकर अन्य धर्म को मानने वाले लोगों की भीड़ हमेशा यहां पर बनी रहती है | यह एक ऐसा तीर्थ स्थल है जहां पर प्रत्येक व्यक्ति को मन की शांति मिलती है| दोस्तों इस क्षेत्र पर है हिसंग पशु भी पाए जाते हैं परंतु आज तक पशुओं के द्वारा किसी को कोई भी क्षति नहीं पहुंची है |

▶️ मुक्तागिरी का सिद्ध क्षेत्र-

दोस्तों मुक्तागिरी की सभी क्षेत्र के बारे में कहा जाता है कि यहां 3.50 करोड़ मुनियों को मोक्ष प्राप्त हुआ था | दोस्तों बैतूल जिले के मुक्तागिरी के सिद्ध क्षेत्र का वर्णन जैन धर्म के ग्रंथों में मिलता है| दोस्तों यह धार्मिक स्थल बहुत ही प्राचीन और ऐतिहासिक है यहां पर कई सालों से अथवा प्राचीन काल से ही लोग यहां पर आते रहे हैं |

▶️ सालबर्डी के महादेव बैतूल

बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाला सालबर्डी क्षेत्र जिसके अंतर्गत यहां की प्रसिद्ध महादेव गुफाएं मिलती हैं जिनमें भगवान शिव की शिवलिंग को देखा जा सकता है | यहां का यह धार्मिक स्थल हिंदू धर्म के लिए आस्था का प्रतीक है जहां पर प्रति महीने अमावस से अथवा पूर्णिमा को सैकड़ों लोग भगवान शिव की आराधना करने के लिए जाते हैं | दोस्तो बैतूल जिले के सालबर्डी क्षेत्र के अंतर्गत सात दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है और इस मेले में यहां के क्षेत्रीय निवासी के अलावा दूर-दूर से हजारों लोग इस मेले में हिस्सा लेते हैं | दोस्तों भगवान शिव का यह तीर्थ स्थल बैतूल जिले की विकासखंड प्रभात पट्टन के सालबर्डी गांव के अंतर्गत आता है

सालबर्डी के महादेव बैतूल

दोस्तों भगवान शिव का यह तीर्थ स्थल बहुत ही लोकप्रिय और खूबसूरत तीर्थ स्थल है इस तीर्थ स्थल के नीचे कहा जाता है कि सतपुड़ा पर्वत स्थित है | यहां पर प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव के विवाह का आयोजन किया जाता है और इस विवाह में हिंदू धर्म से जुड़े हुए हजारों लोग यहां पर भगवान शिव के विवाह में हिस्सा लेते हैं |

Mahadev of Salbardi Betul

यहां पर प्रतिवर्ष श्रावण मास के महीने में लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है क्योंकि कहा जाता है कि श्रावण मास के महीने में भगवान शिव के लिए हर पल हर दिन उनकी भक्ति के लिए उपयुक्त रहता है | लोग ऐसा मंदिर में आकर भगवान शिव के लिए बेलपत्र और उनकी पूजा करते हैं और उन को भोग लगाते हैं |

दोस्तों भगवान शंकर जी से जुड़े अनोखी तीर्थ स्थल के बारे में कई कहानियां सुनने को मिलती हैं जिनमें कहा जाता है कि भगवान शिव के भक्तों की यहां पर भीड़ तो हमेशा लगी रहती है और इस भीड़ का कारण यह होता है कि भगवान शिव किसी को भी निराश नहीं करते हर भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करते हैं |

▶️ बालाजीपुरम बैतूल

बैतूल जिले का यह प्रमुख पर्यटक स्थल है जहां पर धार्मिक लोग अधिक मात्रा में जाते हैं बैतूल जिले से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर यह तीर्थ स्थल मौजूद है | राष्ट्रीय राजमार्ग 69 के अंतर्गत यह पर्यटक स्थल आता है | दोस्त हो यहां पर भगवान श्रीराम से जुड़े हुए बहुत से तथ्य आपको देखने को मिल जाते हैं वर्तमान समय में यहां पर सिर्फ कारों के द्वारा और मूर्ति कारों के द्वारा सुंदर-सुंदर प्रतिमाओं को स्थापित किया जा रहा है | हालांकि प्राचीन काल में यह मंदिर ज्यादा विकसित और चर्चित नहीं था परंतु आज के समय में इस मंदिर की ख्याति पूरे प्रदेश के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में इस मंदिर के चर्चे लगे रहते हैं |

दोस्तों इस मंदिर के दर्शन करना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग की ठीक बाजू में यह मंदिर स्थित है जिस कारण से यहां पर जाने में और दर्शन करने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी महसूस नहीं होती | भगवान श्री राम और माता जानकी से संबंधित प्रतिमाओं को आप यहां पर देख सकते हैं और इन प्रतिमाओं की खास विशेषता यह है कि इनको कुछ इस तरीके से बनाया गया है कि आप जब भी इनके दर्शन करेंगे अथवा इनको निहारेंगे तो आपको ऐसा प्रतीत होगा जैसे कि आपसे बात कर सकते हैं बिल्कुल सजीव की तरह लगते हैं |

बालाजीपुरम बैतूल

भगवान श्री राम और माता जानकी के अलावा यहां पर आपको माता वैष्णवी की प्रतिमा भी देखने को मिलती है और यह प्रतिमा बहुत ही खूबसूरत है |

Balajipuram Betul

दोस्तों माता वैष्णवी की प्रतिमा अलग से ही माता वैष्णवी के लिए मंदिर निर्मित किया गया है जिसमें उनको स्थापित किया गया है| इस मंदिर को देखने के लिए आप किसी भी मौसम में अथवा किसी भी समय जा सकते हैं परंतु यहां पर सर्दियों के मौसम में सबसे अच्छा लगता है क्योंकि पास ही मैं आपको बहुत सुंदर -सुंदर पहाड़ी इलाका देखने को मिलता है जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते |

इस मंदिर के पास में ही कृतिम झरना और कृतिम मंदाकिनी नदी को निर्मित किया गया है जो कि यहां की सुंदरता बढ़ाने में सहायक है| दोस्तों यह धाम पूरे भारत में 5 वे धाम के रूप में अपनी ख्याति फैला रहा है | यहां पर प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर एक बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में लोग इस मेले में एकत्रित होते हैं और मेले का आनंद लेते हैं |

▶️ ताप्ती उद्गम बैतूल

दोस्तों मध्यप्रदेश में बहने वाली ताप्ती नदी का उद्गम बैतूल जिले के मुलताई नामक स्थान से होता है इस नदी के माध्यम से यहां पर होने वाली खेती में इसी जल का प्रयोग किया जाता है | खेती के अलावा बैतूल जिले के अंतर्गत महत्वपूर्ण जल आवश्यकता को ताप्ती नदी के माध्यम से ही किया जाता है | इस नदी की कुल लंबाई 724 किलोमीटर है पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली है नदी बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगती है इस नदी के किनारे हरे भरे पेड़ इस नदी की सुंदरता को बढ़ा देते हैं | कंकड़ पत्थरों के साथ इस नदी का बहता हुआ पानी और कल -कल की आवाज करता हुआ पानी बहुत सुंदर और आकर्षक लगता है लोगों के मन को एकदम मोह लेता है|

बैतूल जिले के मुलताई नगर को “मूल तापी ” के रूप में भी जाना जाता था | यहां पर लोग प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी यहां पर घूमने के लिए यहां पर एक सुंदर मंदिर भी स्थित है जिसके लोग दर्शन करते हैं |

दोस्तों ताप्ती नदी बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध नदी है इस नदी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी को वेद पुराणों के अलावा स्कंद पुराण में भी देखने को मिलती है | दोस्तों पुराणों के माध्यम से पता चलता है कि यह नदी प्राचीन काल में भी बहुत बड़ा योगदान करती रही होगी| इस नदी के कई तक ऐसे हैं जहां पर साधु महात्माओं ने अपनी तपस्या को पूरा किया और मोक्ष को प्राप्त किया है | दोस्तों मध्य प्रदेश की दूसरी प्रमुख नदी के रूप में इस नदी को जाना जाता है|
दोस्तों ताप्ती नदी बहते हुए और अरब सागर में खंभात की खाड़ी में गिरती है |

ताप्ती उद्गम बैतूल

Tapti River Origin Betul

ताप्ती नदी लोगों के कष्टों को हर कर लोगों को नया जीवन देने के लिए भी जानी जाती है इसे “ताप्ती गंगा “के रूप में भी जाना जाता है | कई धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आप इस नदी के अन्य नामों को भी सुनेंगे जिनमें सूर्य पुत्री और शनि की बहन के रूप में भी इस नदी को जाना जाता है |

दोस्तों इस नदी का महत्व प्राचीन काल के साथ-साथ पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है | जिस तरीके से नर्मदा नदी मध्य प्रदेश में जलापूर्ति को पूरा करती है ठीक उसी प्रकार से ताप्ती नदी की मध्य प्रदेश की जलापूर्ति को पूरा करके ही और ताप्ती नदी के किनारे बसे हुए जितने भी गांव हैं उन सब की जलापूर्ति तापी नदी के द्वारा ही होती है|

छोड़ दो पहाड़ों के बीच बहती हुई यह नदी बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगती है क्योंकि पहाड़ों में कहीं-कहीं पर यह नदी की ऊंचाई से गिरती है और उनसे से गिरता हुआ पानी झरने के रूप में दिखाई देता है | दोस्तों यदि प्रकृति की सुंदरता देखना है तो आपको इन पहाड़ों की वादियों में जरूर जाना होगा यहां पर जाने के बाद आपको एक अलग ही मन की शांति मिलेगी |

▶️ शेरगढ़ का किला-

बैतूल जिले छोटे से गांव शेरगढ़ में बना हुआ प्राचीन किला जिसे शेरगढ़ किले के रूप में जाना जाता है | दोस्तों वर्तमान में यह किला केवल खंडहर हो चुका है क्योंकि इसकी देखरेख बिल्कुल भी नहीं की जा रही हालांकि यहां की निवासियों ने इसकी सुरक्षा को लेकर कई बार प्रशासन से चर्चा भी की है परंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही |

दोस्तों इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह हमारे इतिहास से जुड़े हुए कई साक्ष्यों को हमारे सामने उजागर करता है |

Shergarh Fort Betul MP

दोस्तो लगभग 150 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ यह किला यहां का बहुत सुंदर और ऐतिहासिक किला है देखने में बड़ा ही सुंदर लगता है हालांकि इसकी सुंदरता में थोड़ी कमी आई है क्योंकि यह थोड़ी टूटा हुआ है | किले के ऊपर से नीचे की तरफ देखने में नीचे का नजारा बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगता है | यह किला पहाड़ी पर है और यहां पर जाने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती हालांकि आज से कई साल पहले यहां पर आने जाने की सही सुविधा नहीं थी परंतु अब बहुत अच्छी सुविधा हो जाने के कारण यहां पर कई पर्यटक आते रहते हैं |

दोस्तों इस के पास ही मैं वर्धा नदी जल संसाधन की व्यवस्था हो रही है इसका काम बहुत तेजी से चल रहा है इस नदी जल संसाधन के माध्यम से यहां के आसपास के निवासियों को जल आपूर्ति से संबंधित सभी प्रकार की आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा |

बैतूल जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल संबंधित FAQ’S

↪️ मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सर्वाधिक कौन- सी जनजाति निवास करती है?

मध्य प्रदेश कि बैतूल जिले में सबसे ज्यादा कुरकु जनजाति निवास करती है |

↪️ बैतूल जिले में कुल जैन मंदिरों की संख्या कितनी है?

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में कुल 56 जैन मंदिर पाए जाते हैं और यह मंदिर मुक्तागिरी पर्वत के अंतर्गत आते हैं |

↪️ मध्य प्रदेश के सारणी ताप विद्युत गृह का मुख्यालय किस जिले में है?

मध्य प्रदेश के सारणी ताप विद्युत गृह का मुख्यालय बैतूल जिले में है|

↪️ बैतूल जिले में कहां पर भारतीय वायु सेना की छावनी बनाई गई है?

बेतूल जिले के आमला नामक स्थल पर भारतीय वायुसेना ने अपनी छावनी स्थापित की है |

➤ बैतूल जिला मध्य प्रदेश के किस पर्वत पर स्थित है?

बैतूल जिला मध्य प्रदेश की दक्षिण दिशा में सतपुड़ा पर्वत के पठार पर स्थित है |

➤ मध्यप्रदेश में संतरा का उत्पादन कहां पर किया जाता है?

मध्यप्रदेश में संतरा उत्पादन के लिए बैतूल जिला बहुत प्रसिद्ध है यहां पर संतरे का उत्पादन बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है | यहां पर उत्पादित किए गए संतरा का एक्सपोर्ट प्रदेश के अलावा सभी जगह इसका एक्सपोर्ट किया जाता है |

➤ मध्यप्रदेश में गोंडीय समुदाय केंद्र कहां पर स्थित है?

मध्यप्रदेश में गोंडीय समुदायिक केंद्र बैतूल जिले में स्थापित है और इसकी स्थापना सन् 2012 में हुई थी |

➤ बैतूल जिले में कितनी तहसीलें हैं?

बैतूल जिले के अंतर्गत टोटल 8 तहसीलें हैं और इसके अलावा 5 विधानसभा क्षेत्र भी आते हैं |

➤ मध्य प्रदेश का ऐसा कौन सा जिला है जहां से प्रत्येक परिवार के एक सदस्य भारतीय सेना में शामिल होता है?

मध्य प्रदेश का बैतूल जिला एकमात्र ऐसा जिला है जहां से आमला तहसील के अंतर्गत आने वाले अंधेरिया गांव के प्रत्येक परिवार से कोई एक सदस्य भारतीय सेना में शामिल होता है |

प्रत्येक परिवार से 1 सदस्य भारतीय सेना में शामिल होने वाला आमला गांव भारत का एकमात्र गांव है |

➤ बैतूल जिले का प्रमुख उद्योग कौन सा है?

बैतूल जिले का प्रमुख उद्योग निर्माण उद्योग है यह उद्योग बैतूल जिले से बिल्कुल नजदीक ही स्थित है |

➤ मध्यप्रदेश का महिला एवं बाल विकास प्रशिक्षण संस्थान कहां पर स्थित किया गया है?

मध्य प्रदेश का महिला एवं बाल विकास प्रशिक्षण संस्थान मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित है |

➤ चंदौरा बांध कहां पर स्थित है?

मध्य प्रदेश का चांदोरा बांध बैतूल जिले में स्थित है|

➤ भैंसा देही पर्यटक स्थल कहां पर है?

भैंसा देही पर्यटक स्थल मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित है जहां पर प्रति वर्ष सैकड़ों लोग इसे देखने के लिए आते हैं |

☑️ कालीभीत अभ्यारण मध्य प्रदेश में कहां पर स्थित है?

कालीभीत अभ्यारण मध्य प्रदेश में बैतूल जिले में स्थित है और यह अभ्यारण भालू के संरक्षण के लिए जाना जाता है यहां पर भारी मात्रा में भालू प्रजाति का संरक्षण किया जा रहा है |

☑️ मध्यप्रदेश में भोपाल मेले का आयोजन कहां पर किया जाता है?

मध्यप्रदेश में भोपाल मेले का आयोजन बैतूल जिले में किया जाता है और इस मेले में आयोजन के अवसर पर यहां पर हजारों की संख्या में लोग पार्टिसिपेट करते हैं |

☑️ मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा ग्रेफाइट किस जिले में पाया जाता है?

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा ग्रेफाइट बैतूल जिले में पाया जाता है |

☑️ वन संरक्षण महाविद्यालय किस जिले में है?

मध्यप्रदेश का वन संरक्षण महाविद्यालय बैतूल जिले में स्थापित किया गया है |

☑️ मध्य प्रदेश की पहली टिशू कल्चर लैब किस जिले में स्थापित की गई है ?

मध्य प्रदेश की पहली टिशु कल्चर लैब बैतूल जिले में स्थापित की गई है|

☑️ मध्यप्रदेश में किस जिले में कॉफी का उत्पादन किया जाता है?

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में कुकरू नामक स्थान पर कॉफी का उत्पादन किया जा रहा है |

☑️ बैतूल जिले में बालाजी मंदिर का निर्माण किस शासक ने करवाया था?

बैतूल जिले में बालाजी मंदिर का निर्माण यहां के सैम वर्मा शासक ने करवाया था वर्तमान में यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध और यहां का प्रमुख पर्यटक स्थल है |

☑️ ताप्ती नदी का उद्गम कहां से होता है?

मध्यप्रदेश में बहने वाली ताप्ती नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई नामक स्थान से होता है |

☑️ बैतूल जिले की सबसे प्रसिद्ध चोटी का नाम क्या है?

बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाला सतपुड़ा पर्वत यहां का प्रमुख पर्वत है और इसी पर्वत की प्रसिद्ध चोटी खामला चोटी बैतूल जिले की प्रसिद्ध चोटी है |

☑️ बरसालो शब्द का अर्थ क्या है?

बरसालो शब्द एक प्रकार से बैतूल जिले में पाए जाने वाले प्राचीन समय के अभिलेखों को कहा जाता है |

☑️ मध्यप्रदेश में जंगल सत्याग्रह की शुरुआत कहां से हुई थी?

मध्य प्रदेश में जंगल सत्याग्रह की शुरुआत तक बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी नामक स्थान से शुरू हुई थी |

☑️ मध्य प्रदेश में जंगल सत्याग्रह की शुरुआत किसने की थी?

मध्य प्रदेश में जंगल सत्याग्रह की शुरुआत 1930 में हुई थी इसकी शुरुआत करने का तरी है गुंजन सिंह पूर्व को नामक व्यक्ति के द्वारा हुई थी |

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