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छतरपुर जिला | Chhatarpur District Wise GK History Tourism

छतरपुर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल-

हेलो !दोस्तों आज हम बात करने वाले छतरपुर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल के बारे में जिसमें मुख्य रुप से आज हम आपको बताएंगे छतरपुर जिले में कुल कितने पर्यटक स्थल हैं? छतरपुर जिले की सबसे सुंदर जगह कौन सी है? ऐसा कौन सा पर्यटक स्थल है जहां पर सबसे ज्यादा लोग आकर्षक होते हैं? छतरपुर जिले का सबसे पुराना पर्यटक स्थल कौन सा है? दोस्तों इस तरीके से आज हम छतरपुर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं|

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छतरपुर पर्यटक स्थलस्थिति
कंदरिया महादेव मंदिरमध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो में 
कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण1030ई. चंदेल शासक विद्याधर के द्वारा
खजुराहो के मंदिरों का निर्माणपाश्चात्य शैली
खजुराहो में वर्तमान में कुल मंदिरों की संख्या25
खजुराहो में मूल मंदिरों की संख्या85
खजुराहो का नया मंदिरखुदाई के दौरान खजुराहो दे 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जटकरा गांव में
ध्रुपद गायक असगरी बाईछतरपुर जिले के बिजावर से
रनेह फॉल जलप्रपातकेन नदी की सहायक नदी पर
लक्ष्मण मंदिरखजुराहो

पर्यटक स्थल किसे कहते हैं?

दोस्तो लोगों के मन में अक्सर यह सवाल पैदा होता है कि आखिर पर्यटक स्थल होता क्या है?

दोस्तों पर्यटक स्थल एक ऐसा स्थान होता है जहां पर लोग उस स्थल की कुछ विशेषताओं के कारण आकर्षित होते हैं | जैसे किसी मंदिर की बनावट के कारण और उसने स्थापित प्रतिमा के कारण लोग आकर्षित होते हैं | कोई ऐसी इमारत जो ऐतिहासिक हो हजारों वर्ष पुरानी हो और जिस का महत्व विशेष हो | पर्यटक स्थल ऐसे स्थान को कह सकते हैं जो इस स्थान भौगोलिक रूप से बहुत ही सुंदर हो जहां पर लोगों का आना जाना लगा रहता हूं लोग एंजॉय करते हो और लोगों के मनोरंजन का विशेष स्थान हो | पर्यटक स्थल ऐसे स्थान होते हैं जहां पर आसपास के लोग ही नहीं बल्कि पूरे देश के अलावा विदेशों से भी लोग ऐसे स्थानों पर घूमने के लिए आते हैं |

छतरपुर जिले के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थल –

हेलो दोस्तो हम बात करते हैं छतरपुर जिले की जहां पर महाराजा छत्रसाल का राज रहा हुआ है | छतरपुर जिले के इतिहास के अनुसार छतरपुर पर महाराजा छत्रसाल जी का जीवन गुजरा हुआ है | दोस्तों हम बात करते हैं छतरपुर जिले की जोकि पूर्व में पन्ना जिला से सीमा बनाता है जिसकी सीमा छतरपुर और पन्ना जिले के मध्य में बहती केन नदी छतरपुर और पन्ना जिले को अलग करती है | दोस्तों छतरपुर जिले के पूर्व में पन्ना जिला सीमा बनाता है इसके दक्षिण में दमोह और दक्षिण पूर्व में सागर तथा उत्तर में उत्तर प्रदेश इसके बाद पश्चिम में टीकमगढ़ से सीमा साझा करता है | दोस्तों अब बात करते हैं छतरपुर जिले के कुछ पर्यटक स्थलों के बारे में जहां पर लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है—-

जटाशंकर धाम –

दोस्तों जटाशंकर धाम छतरपुर जिले का एक प्रमुख तीर्थ स्थल का केंद्र है जहां पर देवा दि देव महादेव का निवास स्थान है | दोस्तों के स्थान पर ज्यादातर लोग महीने में 2 दिन इकट्ठे होते हैं दिन में अमावस्या के दिन अधिक भीड़ होती है और पूर्णिमा के दिन बहुत कम भीड़ होती है |

जटाशंकर धाम कहां है?

दोस्तों जटाशंकर धाम मध्य प्रदेश राज्य की छतरपुर जिले में स्थित है जटाशंकर धाम एक पहाड़ी इलाका है इस धाम पर आने वाले श्रद्धालु की हर मनोकामना पूरी होती है |

जटाशंकर धाम जाने का रास्ता—–

दोस्तों जटाशंकर धाम जाने के लिए आप छतरपुर जिले से करीब 60 किलोमीटर की दूरी की यात्रा करेंगे|

जटाशंकर धाम जाने के लिए आपको छतरपुर जिले के बिजावर के समीप जाना होगा जिसके लिए एक से अधिक रास्ते मौजूद हैं |

जटाशंकर जाने के लिए आप सागर रोड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और पन्ना रोड जाकर आप देवगांव के समीप से जा सकते हैं |

जटाशंकर धाम की विशेषताएं——

✔️दोस्तों जटाशंकर धाम महादेव के लिए प्रसिद्ध है| जिनको लोग भोलेनाथ, महादेव, शंकर जी, शिव शंभू, शिव शंकर, डमरू वाले ,महेश आदि कई नामों से जाना जाता है |

✔️जटाशंकर धाम पर लगातार 12 अमावस्या जाने दे व्यक्ति की मनचाही मनोकामना पूरी होती है |

✔️जटाशंकर धाम में प्रत्येक समाज के लिए धर्मशाला की व्यवस्था जैसे जटाशंकर धाम पर किसी भी वर्ग के लोग दर्शन के लिए के लिए जाएं उस वर्ग के लिए धर्मशाला की व्यवस्था है |

✔️जटाशंकर धाम पर तीन का प्राकृतिक के जलकुंड है जो अपने अलग-अलग पानी के स्वाद के लिए जाने जाते हैं |

✔️जटाशंकर धाम पर तीन प्राकृतिक जलकुंड जिनका पानी कभी खत्म नहीं होता है चाहे कितनी भी गर्मी पड़ जाए |

✔️जटाशंकर धाम में गोमुख से निकलती हुई जलधारा जटाशंकर धाम की शोभा बढ़ाती है |

✔️गोमुख से निकलने वाली जलधारा से जटाशंकर धाम की एक अलग ही पहचान दुनिया के सामने आती है क्योंकि इस गोमुख जलधारा से शुद्ध जल और ठंडा जल हमेशा प्रवाहित होता रहता है |

✔️जटाशंकर धाम का शुद्ध वातावरण लोगों को बहुत ही कहा जाता है जिस कारण से लोग धाम पर बार-बार आते हैं क्योंकि जटाशंकर धाम एक पहाड़ी इलाका है और ऊंचाई पर होने के साथ-साथ पर्वत पर होने से यह बहुत ही आकर्षक लगता है |

✔️जटाशंकर धाम पर उपस्थित महादेव का प्रिय भक्त नंदी वहां पर हमेशा उपस्थित रहता है जिसे देखकर लोग अचंभित रह जाते हैं|

✔️जटाशंकर धाम पर कार्यरत रहने वाला आकर्षक बाजार लोगों को बहुत ही आकर्षक लगता है क्योंकि इस बाजार में लोगों को मनचाही वस्तुएं प्राप्त हो जाती हैं |

✔️जटाशंकर धाम का मोना सैया धाम जो कि जटाशंकर धाम से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | मोना सैया धाम अपने वाटरफॉल के लिए जाना जाता है |

✔️दोस्तों जटाशंकर आने वाला हर एक श्रद्धालु मोना सैया पर अपना समय व्यतीत जरूर करता है |

✔️दोस्तों मोना सैया धाम पर मोना सैया वाटरफॉल की ऊंचाई लगभग 30 फीट के आसपास है यह वाटरफॉल लोगों को बहुत ही आकर्षित करता है |

✔️जटाशंकर धाम पर प्रतिवर्ष कई लोग भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर इस धाम पर शादी के बंधन में बंध जाते हैं |

✔️दोस्तों प्रतिवर्ष दीपावली को जटाशंकर धाम पर श्रद्धालुओं की लाखों की संख्या में भीड़ इकट्ठी होती है जिसमें मुख्य रुप से गोवर्धन पूजा से लेकर मोनिया नृत्य संपन्न किया जाता है |

✔️प्रतिवर्ष जटाशंकर धाम पर भक्तों के द्वारा भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में भीड़ होती है|

✔️रनेहफोल ,भीमकुंड ,खजुराहो ,पन्ना टाइगर रिजर्व मडला, धुबेला म्यूजियम, हनुमान टोरिया ,पीतांबरा मंदिर, सनी मंदिर आदि सभी घूमने योग्य दर्शनीय स्थल हैं जिनकी अपने आप में ही एक अलग ही छवि देखने को मिलती है |

✔️छतरपुर जिले में जितने भी पर्यटक स्थल स्थित हैं उनकी अपनी अपनी अलग-अलग विशेषता है |

जटाशंकर धाम जाने का रास्ता Chhatarpur

रनेह जलप्रपात——-

दोतो रनेह फॉल जलप्रपात मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर तहसील के अंतर्गत आता है | रनेह फॉल जलप्रपात लोगों के आकर्षण का एक अद्भुत दर्शनीय स्थल है यहां पर लोग जन्मदिन पार्टी और नए साल पर पिकनिक मनाने के लिए अधिकतर लोग आते | रनेह फॉल जलप्रपात वर्तमान में लोगों के पर्यटक स्थल का केंद्र बन चुका है | रनेह फॉल जलप्रपात प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर होने के कारण यहां पर विदेशों के लोग भी घूमने के लिए आते हैं |

रनेह फॉल जलप्रपात जाने का रास्ता –

⬤रनेह फॉल जलप्रपात जाने के लिए मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो के समीप छतरपुर से कुल 60 किलोमीटर की दूरी
पर स्थित है|

⬤रनेह फॉल जलप्रपात जाने के लिए आपको सबसे पहले छतरपुर जिले से पन्ना नेशनल हाईवे जाना होगा |

⬤Panna National हाईवे पर स्थित बमीठा से आपको राजनगर जाना होगा ,राजनगर जाते समय आपको राजनगर तहसील से राइट की तरफ जाना होगा जोकि ग्राम पारा पुरवा और करिया बीजा रोड
पर जाते-जाते आपको रनेह फॉल जलप्रपात मिल जाएगा |

रनेह फॉल जलप्रपात किस नदी पर है?

दोस्तों रनेह फॉल जलप्रपात मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो के समीप स्थित है जिसकी कुल ऊंचाई 30 मीटर तक है| इस वाटरफॉल पर हजारों लोग प्रति वर्ष घूमने के लिए आते हैं | रनेह वॉटरफॉल केन नदी पर जो कि एक प्राकृतिक सुंदर झरना है जिसकी ऊंचाई 98 फीट तक है |

दोस्तों रनेह फॉल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है इतने ग्रैंड कैन्यन भी कहा जाता है लेकिन दुर्भाग्य की बात तो यह है की बहुत कम लोग ऐसे हैं जिनको इस सुंदर जगह के बारे में पता होता है |

खुदार नदी और केन नदी दोनों ही रनेह फॉल जलप्रपात पर आकर मिलती हैं और एक गहरी खाई बनाते हैं | 98 फीट की ऊंचाई से मैंने नदियों का पानी गिरने से एक सुंदर झरना बन जाता है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है |

केन नदी पर स्थित है यह झरना लिग्नाइट और डोलोमाइट की चट्टानों के बीच स्थित है और साथ ही इस झरने की दोनों तरफ से एक सुंदर जंगल है जिस कारण इसकी सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है |

रनेह जलप्रपात Raneh Fall Khajuraho Chhatarpur

भीमकुंड- –

भीमकुंड कहां पर स्थित है?

दोस्तों भीमकुंड मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की 77 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम बाजना के समीप स्थित है | यह एक प्राकृतिक कुन्ड है जो हजारों वर्ष पुराना है |

भीमकुंड की विशेषताएं —

⬤दोस्तों भीमकुंड एक छोटा सा कुंड है जिसका पानी गहरा नीला होने के कारण इसे नीलकुंड भी कहा जाता है |

⬤भीम कुंड की गहराई का अभी तक कोई भी अनुमान नहीं है वैज्ञानिक भी इसकी गहराई नापने में नाकाम रहे |

⬤इस कुंड का पानी इतना साफ है कि मछलियों को आप सीधा करते हुए देख सकते हैं |

⬤पानी पूरी तरह साफ होने के कारण इसमें छोटी से छोटी वस्तु आसानी से दिखाई दे जाती है |

⬤इस पानी में नहाने के बाद कितना भी साबुन अथवा शैंपू और किसी भी वस्तु से पानी को गंदा करने की कोशिश की जाए तब भी पानी गंदा नहीं होता है |

⬤इस कुंड का पानी कभी भी खत्म नहीं होता है अर्थात पूरे वर्ष भर और प्रतिदिन पानी भरा ही रहता है और ना ही कभी कम या ज्यादा होता है |

⬤इस कुंड का जल मां गंगा की तरह एकदम स्वच्छ और निर्मल है जो कभी भी खराब नहीं होता है |

भीमकुंड की उत्पत्ति–

दोस्तों भीमकुंड की उत्पत्ति पौराणिक कथाओं के अनुसार हजारों वर्ष पुरानी बताई जाती है जोकि कहा जाता है कि भीमकुंड का इतिहास महाभारत के समय का है |

पौराणिक कथाओं में बताया जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान चलते चलते पांचाली को बेहद प्यास लगी थी |पानी की खोज में पांडवों ने बहुत ही सारा समय बर्बाद कर दिया और पानी कहीं पर भी ना मिला |

पानी ना मिलने के कारण भीम के मन में एक सुझाव आया कि क्यों ना मैं अपनी गदा से जमीन में ही पानी निकाल दूं|

भीम ने इसके बाद पांचों भाइयों की आज्ञा पाकर अपनी गदा से भूमि पर कठोर प्रहार कर दिया |भूमि पर गदा का कठोर प्रहार करने से भूमि की कई परतें टूट गई और भूमि पर पानी भी निकल आया |

गदा के प्रहार से भूमि के आकार में एक अलग ही छवि बन गई जहां पर जाना आसान नहीं था | पांचों भाइयों की आज्ञा पाकर अर्जुन ने अपनी धनुर्विद्या से पानी के अंदर सीढ़ियों का निर्माण कर दिया |

सीड़ियों के निर्माण से पानी के अंदर द्रोपदी समेत पांचों भाइयों ने अपनी प्यास बुझाई |

भीमकुंड बना पर्यटक स्थल –

दोस्तों मध्यप्रदेश में भीमकुंड एक बहुत ही रहस्यमय पर्यटक स्थल है जिसके बारे में लोग बहुत ही कम जानते हैं | भीमकुंड अपनी गहराई और पानी की स्वच्छता को लेकर हमेशा चर्चा में बना रहता है |

भीमकुंड के समीप भगवान शिव जी विराजमान है जिनके दर्शन के लिए लोग त्योहारों पर जाते रहते हैं | लोगों के द्वारा प्लान की गई ट्रिप जब होती है तब उसमें एक बार भीमकुंड घूमने का जरूर सोचा जाता है |

भीमकुंड का आकार भीम की गदा के आकार का ही है इस कुंड का पानी नीला होने के कारण और गहराई अनंत होने के कारण लोग विदेशों से भी घूमने के लिए आते हैं |

भारत में मनाई जाने वाली दीपावली के अवसर पर भीम कुंड पर हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं | इसके अलावा लोग हमेशा यहां पर आते जाते रहते हैं |

भीम कुंड की गहराई कितनी है –

दोस्तों कई बार गोताखोरों के द्वारा भीम कुंड की गहराई नापने का प्रयत्न किया गया लेकिन कई बार गोताखोर 22 फीट से लेकर 50 फीट तक अंदर जाने के बाद वापस लौट आए | दोस्तों गोताखोरों का कहना है कि इसकी गहराई नापना आसान नहीं है क्योंकि गोताखोर कहते हैं इस कुंड के अंदर जितना जाते हैं वह उतना ही विशाल होता जाता है |

वैज्ञानिकों का कहना है इस कुंड का संपर्क समुद्र से जुड़ा हुआ है जिस कारण से इसकी गहराई नापना असंभव है | इस कुंड का सबसे रहस्यमई पल वह होता है जब पृथ्वी के किसी भूभाग पर भूकंप जैसी घटनाओं का पता चलता है | इस कुंड से भूकंप जैसी घटनाओं का अंदाजा लगाया जाता है क्योंकि इस कुंड का पानी कभी-कभी थोड़ा ऊपर आ जाता है |

KHAJURAHO/खजुराहो-

खजुराहो में स्थित प्राचीन काल के 10 वीं सदी के मंदिरों में कामों का कला की नक्काशी के मंदिरों के साथ-साथ जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है | खजुराहो के प्रमुख मंदिरों में हिंदू और जैन मंदिरों के प्रमुख मंदिर हैं जोकि अपनी अद्भुत कला के लिए जाने जाते हैं |

खजुराहो में कुल कितने मंदिर है?

खजुराहो में मूल रूप से 85 मंदिर थे लेकिन वर्तमान में केवल 25 मंदिर ही अस्तित्व में रह गए हैं | खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 ईसवी से 1050 ईसवी के मध्य हुआ था | खजुराहो चंदेल शासकों की राजधानी रहा है और इन्हीं शासकों के शासन काल में यहां पर मंदिरों का निर्माण किया गया |

खजुराहो में सबसे महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर भगवान शिव का मंदिर जिसे कंदरिया महादेव के नाम से भी जाना जाता है | कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल शासक विद्याधर के द्वारा करवाया गया है |

खजुराहो का नया मंदिर –

खजुराहो में अभी हाल ही में एक नया मंदिर अस्तित्व में आया जो कि खजुराहो के बिल्कुल समीप ग्राम जटपुरा में खुदाई के दौरान निकला हुआ है | इस मंदिर का इतिहास भी चंदेल वंश के शासन काल के समय का है |

खजुराहो का लक्ष्मी मंदिर-

खजुराहो का लक्ष्मी मंदिर अपने आप में बहुत ही शानदार कला के लिए जाना जाता है जिसको देखते ही लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं| यह मंदिर लक्ष्मण मंदिर के ठीक सामने का मंदिर है |

मध्य प्रदेश का सर्वाधिक औसतन तापमान खजुराहो में ही रिकॉर्ड किया जाता है |

खजुराहो जुड़ा यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में –

दोस्तों सन 1986 में खजुराहो प्रसिद्ध मंदिरों की अलग ही नक्काशी के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है| यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल होने के कारण उसका प्राकृतिक महत्व बढ़ जाता है |

खजुराहो के प्रसिद्ध जैन मंदिरों में 500 साल से भी अधिक पुराने आयुर्वेद एक और ज्योतिष विज्ञान की पांडुलिपि या देखने को मिली हैं ,जिनकी संख्या 470 है और यह सोने की स्याही से लिखी गई है |

खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य-

दोस्तों प्रति वर्ष खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य का आयोजन किया जाता है जिसकी शुरुआत सन 1976 से हुई थी | शास्त्रीय नृत्य के आयोजन में देश के कोने-कोने से बहुत ही बड़े बड़े कलाकार आते हैं और यहां पर अपनी प्रतिभा को जनता के सामने उजागर करते हैं | शास्त्रीय नृत्य के आयोजन में बॉलीवुड इंडस्ट्री से कई बड़े-बड़े एक महान कलाकार प्रतिवर्ष खजुराहो में उपस्थित होते हैं | खजुराहो में प्रसिद्ध आदिवासी कथा संग्रहालय भी है |

खजुराहो पर्यटक स्थल –

दोस्तों खजुराहो में पाश्चात्य शैली में बने मंदिरों की अद्भुत कला के कारण यहां पर देश-विदेश से लोग रोजाना घूमने के लिए आते हैं |

खजुराहो में स्थित जैन मंदिर खजुराहो के पूर्व में स्थित हैं जिनकी कला और नक्काशी बहुत ही अद्भुत है जिनके कारण लोगों का आकर्षण बहुत ही ज्यादा होता है |

खजुराहो के मंदिरों को देखने के लिए विदेशों से लगभग प्रतिदिन 100 से 200 लोगों का आना जाना लगा ही रहता है | खजुराहो में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस आदि जगहों से लोग देखने के लिए आते हैं |

खजुराहो पर्यटक स्थल होने के कारण लोगों को मिला रोजगार-

दोस्तों खजुराहो में प्रतिदिन देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण खजुराहो की लोकल के लोगों को रोजगार मिला है | खजुराहो में लगातार भीड़ बने रहने के कारण आसपास के लोगों को सर्वप्रथम दुकानों के द्वारा रोजगार मिला है | आसपास के लोगों को विदेशों से आने वाले लोगों के लिए सवारी सुविधा उपलब्ध कराना, मंदिरों के बारे में जानकारी बताना ,मंदिरों के इतिहास के बारे में जानकारी बताना ,कौन सा मंदिर कहां है ?आदि सभी प्रकार की जानकारी बताने से और कई तरीके से लोगों को रोजगार मिला है |

खजुराहो पर्यटक स्थल -

धुबेला संग्रहालय —

दोस्तों छतरपुर जिले की नौगांव रोड पर स्थित छतरपुर से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर धुबेला संग्रहालय स्थित है |

धुबेला संग्रहालय महाराजा छत्रसाल की विशाल प्रतिमा देखने को मिलती है जिस में वे राजा की तरह घोड़े पर सवारी करते हुए नजर आते हैं जो कि अपने आप में बहुत ही आकर्षक लगते हैं |

महाराजा छत्रसाल पुरातत्व संग्रहालय धुबेला में महाराजा छत्रसाल से जुड़े बहुत से कैसे देखने को मिलती हैं | महाराजा छत्रसाल पुरातत्व संग्रहालय धुबेला में महाराजा छत्रसाल के महल देखने को मिलते हैं उनके द्वारा बनवाया गया तालाब देखने को मिलता है | धुबेला संग्रहालय छतरपुर में स्थित है पहाड़ी इलाका पर बना हुआ है यहां पर ऐतिहासिक मंदिर होने के कारण और अपनी अद्भुत कला के लिए जाना जाने के कारण पर्यटक महत्व का बन चुका है |

शनि मंदिर छतरपुर ——-

छतरपुर जिले में नौगांव रोड पर स्थित है मऊ सानिया में शनि मंदिर स्थित है यह मंदिर तालाब के बीचो बीच बना होने के कारण इसकी सुंदरता अनोखी लगती है | भगवान शनि को समर्पित यह मंदिर इसको देखने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग देखने के लिए आते हैं | इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार को ज्यादातर भीड़ लगी रहती है लेकिन बाकी के सब पता है कि अन्य दिनों में भी लोगों का आना जाना लगा रहता है |

हनुमान टोरिया –

दोस्तों महाबली हनुमान को समर्पित यह मंदिर छतरपुर जिले की बस स्टैंड के समीप एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर है | यह मंदिर पहाड़ी पर ऊंचाई पर होने के कारण बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगता है| हनुमान टोरिया पर छतरपुर जिले के आसपास के लोग अक्सर दर्शन करने के लिए जाते रहते हैं |

छतरपुर जिला | Chhatarpur District Wise GK History Tourism

प्रश्न- 1. खजुराहो में कुल कितने मंदिर है?

खजुराहो में खोलें मूल रूप से 85 मंदिर थे परंतु वर्तमान में केवल 25 मंदिर ही अपने अस्तित्व में हैं |

प्रश्न -2 . कंदरिया महादेव का मंदिर कब बनवाया गया ?

कंदरिया महादेव का मंदिर 1050 ईसवी में चंदेल वंश के शासक विद्याधर के द्वारा बनवाया गया है |

प्रश्न- 3 . कंदरिया महादेव के मंदिर की ऊंचाई कितनी है?

कंदरिया महादेव मंदिर की ऊंचाई लगभग 107 फीट है |

इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है | प्रति वर्ष महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह का आयोजन किया जाता है |

प्रश्न -4. भीम कुंड की गहराई कितनी है?

भीम कुंड की गहराई को पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई बार कोशिश की परंतु 22 फीट से अधिक की गहराई का पता लगाने में वैज्ञानिक नाकाम रहे | भीम कुंड की गहराई का अभी तक कुछ भी पता नहीं चला है|

प्रश्न -5. खजुराहो के मंदिर किस शैली में बने हैं?

खजुराहो के मंदिर पाश्चात्य शैली में निर्मित हैं |

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