छतरपुर जिला Chhatarpur tourist places in hindi

छतरपुर जिला

दोस्तों आज हम बात करने वाले है, छतरपुर जिले के बारे में।छतरपुर जिले में कौन कौन से पर्यटन स्थल घूमने योग्य है। तो छतरपुर जिले से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें। दोस्तों छतरपुर जिला मध्य प्रदेश के 52 जिलो में से एक है। छतरपुर जिले की स्थापना 1785 में हुई थी इसका नाम बुंदेल राजपूत नेता छत्रसाल के नाम पर रखा गया था। छतरपुर जिले में 11 तहसील और 8 जनपद पंचायत है। छतरपुर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल छतरपुर जिला मध्य प्रदेश का एक प्रमुख आकर्षित पर्यटन स्थल है। जो कि अपने धार्मिक आकर्षण सुंदर इमारतें वन्य जीव अभ्यारण आदि के लिए जाना जाता है।

प्रमुख पर्यटन स्थल

  • 1.खजुराहो
  • 2. भीमकुंड
  • 3. जटाशंकर धाम
  • 4. महाराजा छत्रसाल संग्रहालय
  • 5. बागेश्वर धाम
  • 6. चरण पादुका नरसहर
  • 7. धुवेला संग्रहालय
  • 8. मऊ सानिया मंदिर शनिदेव मन्दिर
  • 9. पीतांबरा मंदिर
  • 10. हनुमान टोरिया
  • 11. कुटनी डेम
  • 12. आला ऊदल महल
  • 13. केन बेतवा
  • 14. चित्रगुप्त मंदिर
  • 15. उर्मिल परियोजना
  • 16. गंगऊ डेम
  • 17. रनगवा बाध
  • 18. अंगौरा हीरा खदान
  • 19. प्रतापसिंह की छतरी
  • 20. मोनासैया
  • 21. सुर्गेश्वर धाम
  • 22. जलविहारी का मेला
  • 23. खजुराहों का मेला
  • 24. चरण पादुका नरसंहार

खजुराहो पर्यटन स्थल

यह प्रदेश के जिले में है। खजुराहो पहुंचने के लिए सड़क मार्ग रेल मार्ग और वायु मार्ग तीनों मार्गों की सुविधा है। खजुराहो अपने मंदिरों के लिए विश्व विख्यात हैं। खजुराहो के मंदिर को 1986 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। खजुराहो का पुराना नाम खजूर वाहक है।खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 एडी से 1050 एडी के मध्य चंदेल राजा ने करवाया था। इन्होंने 85 मंदिर का निर्माण करवाया था। लेकिन लगातार आक्रमणों के कारण अब वर्तमान में 22 या 25 मंदिर ही बचे हैं। खजुराहो के मंदिर नागर शैली में निर्मित है। जिन्हें बनाने में लाल बलुआ पत्थर प्रयोग किया गया है।खजुराहो को पत्थर पर तरासी गई नगरी कहा जाता है। खजुराहो के मंदिरों को 3 समूह में बांटा गया है।

  1. पश्चिमी समूह के मंदिर
  2. पूर्वी समूह के मंदिर
  3. दक्षिणी समूह के मंदिर

पश्चिमी समूह के मंदिर
इस समूह में मंदिरों की संख्या सर्वाधिक है। इस समूह का सबसे बड़ा मंदिर कंदरिया महादेव का मंदिर है। इसके अलावा यहां पर चौसठ योगिनी का मंदिर, विष्णु के वराह अवतार का मंदिर ,मतंगेश्वर का मंदिर, विश्वनाथ का मंदिर, जगदंबा मंदिर, चतुर्भुज मंदिर ,लक्ष्मण मंदिर , व चित्रगुप्त मंदिर आदि है।

कंदरिया महादेव का मंदिर

यह खजुराहो का सबसे विशाल मंदिर है। जो भगवान शिव को समर्पित है। यहां पर प्रदेश का दूसरा सबसे ऊंचा शिवलिंग है। इस मंदिर का निर्माण चंदेल राजा विद्याधर ने करवाया था। यहां पर नंदी की सबसे ऊंची मूर्ति है। इस मंदिर की तुलना उड़ीसा के लिंगराज मंदिर से की जाती है।

चौसठ योगिनी का मंदिर

यह खजुराहो का सबसे प्राचीन मंदिर है। यहां पर मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर का आकार आयताकार है।

लक्ष्मण मंदिर

इस मंदिर का निर्माण चंदेल राजा यशोवर्मन ने करवाया था।

पूर्वी समूह के मंदिर

  1. आदिनाथ का मंदिर _ यहां पर जैनों के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ या ऋषभदेव का मंदिर है जो जैन धर्म को समर्पित है।
  2. पार्श्वनाथ का मंदिर_ यहां जैनों की 23वें तीर्थंकर आदि पार्श्वनाथ का मंदिर है, जो जैन धर्म को समर्पित है।

3.घटाई मंदिर

दक्षिणी समूह के मंदिर
दूल्हा देव मंदिर_ यह भगवान शिव को समर्पित है यहां पर भगवान शिव की शिवलिंग स्थापित है।

चतुर्भुज मंदिर

महाराजा छत्रसाल हवाई अड्डा_ यह छतरपुर जिले के खजुराहो मैं है जो प्रदेश के 5 हवाई अड्डा मैं से एक है ।

भीमकुंड

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बजना गांव में स्थित है। भीमकुंड यह कठोर चट्टानों के बीच बना है ।प्राचीन काल से ही यह साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पर बड़े से बड़े ज्ञानी ऋषि मुनि व तपस्वीओ ने साधना की है। वर्तमान में यह सबसे बड़ा पर्यटक स्थल बन गया है। इसके बारे में यहां के लोगों का कहना है कि भीमकुंड एक शांत ज्वालामुखी है। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि महाभारत में कौरवों से हारने के बाद पांडव अज्ञातवास के लिए निकल चुके थे। रास्ते में जाते समय द्रोपदी को बहुत तेज प्यास लगी और काफी समय तक आसपास पानी खोजने के बाद पानी नहीं मिला जब भीम ने गुस्से में आकर अपनी गधा जमीन पर जोर से मारी और जमीन से पानी निकलने लगा तभी से इसका नाम भीमकुंड पड़ गया।

भीमकुंड

जटाशंकर धाम

जटाशंकर धाम छतरपुर जिले की बिजावर तहसील के अंतर्गत आता है। यहां पर भगवान भोलेनाथ विराजमान है। जटाशंकर धाम एक अद्भुत पर्यटक स्थल बना हुआ है। जो घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है। यहां के लोगों का मानना है कि अमावस्या और पूर्णिमा के दिन यहां हजारों संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। जटाशंकर में 3 कुंड बने है लोगों का मानना है कि कुंड में स्नान करने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है, साथ ही साथ किसी भी प्रकार का चर्म रोग ठीक हो जाता है।

कुटनी डैम

कुटनी डैम छतरपुर जिले के राजनगर तहसील के 12 किलोमीटर दूरी पर है। अपनी सुंदरता एवं अति सुंदर होने के कारण बुंदेलखंड का आइसलैंड कहा जाता है कुटनी डैम बहुत ही शानदार पर्यटक स्थल है। यहां पर लोगों की हर समय भीड़ लगी रहती है। कुटनी डैम में जाकर लोग बहुत इंजॉय करते हैं यहां से पानी को देखने पर बहुत ही आकर्षक एवं लुभावना लगता है।

हनुमान टोरिया मंदिर

हनुमान टोरिया मंदिर छतरपुर में एक पहाड़ी पर बना हुआ है। यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है । यह मंदिर 350 साल पुराना है। इसका निर्माण महाराज वीर छत्रसाल ने करवाया था। इस मंदिर में श्रद्धालु अपनी अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण भी होती हैं। यहां पर साल में रामनवमी जन्माष्टमी और हनुमान जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा यहां पर राम सीता मंदिर कृष्ण मंदिर मां दुर्गा का मंदिर बना हुआ है।

पीतांबरा मंदिर

पीतांबरा मंदिर छतरपुर का एक बहुत ही विशाल मंदिर है। इस मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान हैं। जो शाक्य धर्म को समर्पित है।इस मंदिर को नवदुर्गा के अवसर पर बहुत ही सजाया जाता है। इसका नजारा देखने पर बहुत ही भव्य लगता है।भक्तों की भीड़ भी हजारों की संख्या में देखने को मिलती है यह मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है।

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय छतरपुर झांसी राजमार्ग पर धुबेला के महल में स्थित है । इसकी स्थापना सितंबर 1955 में को गई थी खजुराहो से इसकी दूरी 65 किलोमीटर है ।यहां पर महाराजा छत्रसाल की बहुत ऊंची प्रतिमा बनाई गई है।यहां पर सड़क परिवहन द्वारा पहुंच सकते हैं। इस संग्रहालय में जैन तीर्थंकरों का चित्रण करने वाली कई छवियां है। इस संग्रहालय में तांबे की प्लेट ,सती स्तंभ ,लिंग, गुप्त और कलचुरी काल के चित्र प्रदर्शित हैं। इसके अलावा इस संग्रहालय में प्राचीन कालीन वस्तुओं का संग्रह है।जिसे देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं। इस म्यूजियम का नजारा बहुत ही अद्भुत है।

आल्हा ऊदल महल

आल्हा उदल महल छतरपुर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर राजगढ़ गांव में मनिया गढ़ पहाड़ी पर बना है। लोग कहते हैं यह महल आल्हा उदल के समय का महल है। इस महल को देखने पर अद्भुत नजारा नजर आता है। वर्तमान में इस महल के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। इस महल में आल्हा उदल के समय का एक तालाब भी बना हुआ है।
यह महल बहुत ही घने जंगलों के बीच बना हुआ है, जिससे इसकी सुंदरता दौगुनी बढ़ जाती है। अभी इस महल में दर्शकों को जाने की अनुमति नहीं है। क्योंकि इसका जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।

बागेश्वर धाम

बागेश्वर धाम एक बहुत ही लोकप्रिय स्थल है ।बागेश्वर धाम छतरपुर जिले से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है ।यहां पर पहुंचने के लिए रेल मार्ग की भी सुविधा है। जिससे भक्त गणों को बागेश्वर धाम पहुंचने में परेशानी नहीं होती है।यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है इस मंदिर में बालाजी सरकार की प्रतिमा विराजमान है।वर्तमान में यह मंदिर बहुत ही प्रचलित हो गया है। यहां पर लाखों की संख्या में भक्त गण आते है।
इस मंदिर की पुजारी पंडित धीरेंद्र महाराज जी है। यहां पर हर शनिवार और मंगलवार के दिन लाखों की संख्या में देश और विदेश से बालाजी सरकार के दर्शन और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए भक्त आते है। मनोकामना पूरी करने के लिए नारियल को लाल कपड़े में बांधा जाता है। जिससे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लोगों का मानना यह भी है कि 21 पेशी अवश्य करनी चाहिए। जिससे मनोकामना जल्द ही पूरी होती है। यहां पर लोगों की मन की बात को बता दिया जाता है। यहां पर भक्त गणों के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। इससे लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

केन बेतवा लिंक परियोजना

केन बेतवा लिंक परियोजना मध्य प्रदेश की दोधन गांव में बनाई जा रही है ।इस परियोजना के द्वारा केन नदी के पानी को नहर से बेतवा तक पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना का लाभ 9 जिलों को मिलेगा जिसमें छतरपुर पन्ना टीकमगढ़ सागर दमोह दतिया विदिशा शिवपुरी तथा कुछ रायसेन तथा उत्तर प्रदेश के बांदा महोबा झांसी ललितपुर शामिल है। इस परियोजना से बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को लाभ मिल पाएगा साथ ही बुंदेलखंड की धरती हरी-भरी नजर आएगी इस परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व के कुछ क्षेत्र डूब में आ रहे हैं ।

चित्रगुप्त मंदिर

यह मंदिर छतरपुर के मध्य में स्थित है। यह एक जैन मंदिर है। यह मंदिर बहुत ही विशाल है।

उर्मिल परियोजना

यह परियोजना छतरपुर जिले में उर्मिल नदी पर स्थित है।जो मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। यह बुंदेलखंड की सबसे बड़ी परियोजना है।जो बुंदेलखंड के लोगों के लिए पीने के पानी के साथ साथ सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराती है।

रंनगवा बांध

यह बांध छतरपुर जिले में बमीठा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ है। जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इसका लाभ मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के किसानों को प्राप्त होता है।

गंगाऊ बांध

यह बांध छतरपुर जिले के पन्ना नेशनल पार्क के अंदर जंगलों पहाड़ियों के बीच बना हुआ है। जिससे इसकी सुंदरता बेहद अच्छी दिखाई देती है। यहां पर पर्यटक बड़ी संख्या में घूमने के लिए आते हैं।यह पर्यटक छतरपुर जिले का एक आनंदनीय एवं रमणीय पर्यटक स्थल है।

मौनासैया

यह धाम छतरपुर जिले के बिजावर तहसील के अंतर्गत जटाशंकर गांव में है। यह धाम एक बहुत बड़ी गुफा के अंदर है। इसके दर्शन करने के लिए आपको घनी अंधेरी गुफा के अंदर जाना होता है। इसका दृश्य बहुत ही सौंदर्य दिखता है।

स्वर्गेश्वर धाम

यह धाम छतरपुर जिले के पन्ना नेशनल पार्क के अंदर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है । यहां पर भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग स्थापित है। इसके दर्शन करने के लिए लगभग 500 सीढ़िया चढ़नी पढ़ती हैं ।नेशनल पार्क के अंदर स्थित होने के कारण इसकी सुंदरता दोगुनी बढ़ जाती है। यहां पर श्रद्धालु बहुत बड़ी संख्या में दर्शन करने के लिए आते हैं।

अंगौरा हीरा खदान

एक खदान छतरपुर जिले के अंगौर में स्थित है।यह एक हीरा खदान है। जो छतरपुर जिले की हीरे की सबसे बड़ी खदान है। यहां पर श्रमिकों द्वारा हीरे को खोदकर निकाला जाता है।

जल बिहारी का मेला

यह मेला छतरपुर जिले मैं डाकखाने के पास मेला ग्राउंड में हर साल अक्टूबर-नवंबर माह में दीपावली के अवसर पर
लगभग 20 दिनों के लिए लगाया जाता है। यहां पर लोग बड़ी संख्या में आनंद लेने के लिए आते हैं।

खजुराहों का मेला

यह मेला छतरपुर जिले के खजुराहो में हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर लगभग 15 दिनों के लिए लगाया जाता है।

खजुराहों का मेला

चरण पादुका नरसंहार

14 जनवरी 1931 ईस्वी को मकर संक्रांति पर मध्य प्रदेश के छतरपुर रियासत में चरण पादुका ग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों की सभा में बिना चेतावनी के गोलियां चला दी गई। जिसमें कई स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए यह आदेश नौगांव स्थित अंग्रेज पोलिटिकल एजेंट फिशर ने दिया था। यह कांड मध्य प्रदेश का जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से भी जाना जाता है।

•खजुराहो नृत्य समारोह छतरपुर जिले के खजुराहो में 1976 से मनाया जाता है। यह हर साल फरवरी माह में आयोजित होता है।
•बुंदेली उत्सव छतरपुर की बसारी में 1955 से आयोजित हो रहा है।
•जनहित दर्शन छतरपुर से प्रकाशित होने वाली समाचार पत्रिका है।
•महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय 2015 में छतरपुर में स्थापित किया गया था।
•छतरपुर जिले में प्रति वर्ष जल बिहारी का मेला लगता है।
•नक्सलाइट के क्षेत्र में छतरपुर आ गया बहुत ऊपर हो रहे बहुत अधिक मात्रा में अपराध।
•छतरपुर आकाशवाणी केंद्र की स्थापना 7 अगस्त 1976 को की गई थी।
•छतरपुर जिले में मध्य प्रदेश का पहला शिल्पग्राम स्थापित किया गया है।
•छतरपुर जिले के खजुराहो में द ललित होटल सबसे प्रसिद्ध है।

छतरपुर जिला Chhatarpur tourist places in hindi FAQ’s

  • छतरपुर जिले का प्रमुख विश्वविद्यालय कौन सा है।
    महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
  • छतरपुर जिले में सबसे अधिक मात्रा में कौन सा खनिज पाया जाता है।
    ग्रेनाइट
  • चंदेल शासकों ने अपनी राजधानी को कहां बनाया था। खजुराहो
  • खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है।
    कंदरिया महादेव मंदिर
  • खजुराहो का सबसे प्रसिद्ध होटल कोन से है?
    दा ललित, चंदेला होटल इत्यादि।
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