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चुलकाना धाम कहां है क्यों प्रसिद्ध है? कॉन्टेक्ट नंबर, बर्बरीक का धड़ यही गिरा था

महाभारत काल के कई ऐसे किस और कहानी प्रसिद्ध हैं जो आज वर्तमान में हम किसी धार्मिक तीर्थ स्थल पर जाने के बाद महसूस करते हैं और यह विश्वास पाते हैं कि आखिर में यह बिल्कुल निश्चित रूप से हुआ है । ऐसा ही एक धार्मिक तीर्थ स्थल है जो चुलकाना धाम के नाम से प्रसिद्ध है इसकी सबसे बड़ी प्रसिद्ध का कारण यह है कि यह महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और इसकी कहानी यह है कि बर्बरीक के द्वारा जो एक ही बाण के द्वारा एक पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को जला दिया था इस पेड़ की कहानी इस धाम से जुड़ी हुई है जिसके बारे में हम आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे।

तीर्थ स्थलचुलकाना धाम
प्रसिद्धतामहाभारत काल से जुड़ा हुआ
कहानीबर्बरीक ने एक ही बाण से पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को जला दिया
इस पेड़ की कहानी इस धाम से जुड़ी हुई है

चुलकाना धाम का इतिहास –

महाभारत काल में पांडवों में एक सबसे प्रसिद्ध और बलशाली योद्धा भी हुआ करते थे जिनके पुत्र घटोत्कच हुए और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हुए जिनकी कई ऐसी कहानी हमें इतिहास में मिलती हैं जो अचंभित करने वाली होती हैं । ऐसा माना जाता है कि बर्बरीक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निपुण योद्धा था जिसका वर कभी खाली नहीं गया।

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चुलकाना धाम में ऐसा माना जाता है कि यहां पर एक पीपल का पेड़ है यह वही पेड़ है जिस पेड़ पर बर्बरीक ने अपना बाण चलाया था और भगवान श्री कृष्ण ने उसे पीपल के पेड़ के एक पत्ते को अपने पैर के नीचे दबा दिया था। इस पीपल के पेड़ की सबसे बड़ी खास बात यह है कि आपको इसके पत्तों में छेद दिखाई देंगे लेकिन अन्य पीपल के पेड़ों में किसी पत्तों में आपको कोई छेड़ दिखाई नहीं देगा।

चुलकाना धाम कहां है?

महाभारत काल का सबसे बड़ा युद्ध हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुआ और हरियाणा के ही पानीपत जिले में कलयुग का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल चुलकाना धाम मौजूद है जहां पर लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल को देखने के लिए जाते हैं। चुलकाना धाम के बारे में कहा जाता है कि यह वही धाम है जहां पर भगवान श्री कृष्ण को बर्बरीक ने अपना सिर दान में दे दिया था और भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक को अपने विशाल दर्शन दिखलाए थे। चुलकना धाम पानीपत जिले से लगभग 5किलोमीटर समालखा में स्थित है।

स्थानक्षेत्रधाम की स्थिति
चुलकाना धामपानीपत जिलासमालखा, पानीपत से लगभग 5 किलोमीटर दूर
घटनाभगवान श्री कृष्ण के साथ बर्बरीक द्वारा सिर दान
संबंधभगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक को अपने दर्शन दिखाए

बर्बरीक के शीश दान की कहानी –

महाभारत काल में भीम के पुत्र घटोत्कच और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक के सिरदान की कहानी सबसे प्रसिद्ध है क्योंकि इस कहानी में भगवान श्री कृष्ण ने बराबरी को अपने विशाल दर्शन दिए थे और ब्राह्मण का भेष रखें बर्बरीक सिर मांग लिया था । महाभारत काल में जब बर्बरीक ने पूजा करना स्टार्ट किया युद्ध से पहले तो बर्बरीक के सामने भगवान श्री कृष्णा ब्राह्मण का भेष रख के बर्बरीक के सामने पहुंचे और उन्होंने बर्बरीक से मांग लिया। बर्बरीक ने कहा कि ब्राह्मण कभी सिर नहीं मांगते इसके अलावा कुछ और मांग लीजिए। बर्बरीक ने कहा कि आप सच बताइए कि आप कौन हैं इसके बाद श्री कृष्ण ने अपने विशाल दर्शन दिए तो बर्बरीक ने कहा कि मैं आपको अपना सर भी दान में दे दूंगा।

भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि इस दुनिया में केवल तीन ही महाबली है एक में दूसरा अर्जुन और तीसरे तुम इसके अलावा कोई और महाबली नहीं है। श्री कृष्ण ने कहा कि इस युद्ध की सफलता के लिए तुम्हारे जैसे वीर योद्धा की बलि देना उचित नहीं है इसीलिए मैं तुम्हारी बलिदानी मांगता हूं जिसे युगों युगों तक याद रखा जाएगा।

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