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ई खसरा परियोजना के अंतर्गत घर बैठे देख सकते हैं खसरा खतौनी एवं नक्शा, मोहन यादव ने की योजना प्रारंभ

खसरा खतौनी को लेकर के ग्रामीण क्षेत्र के किसान बहुत अधिक परेशान होते रहते थे और तहसील ब्लाक के चक्कर लगाते रहते थे तथा पटवारी से लेकर के ऑनलाइन दुकानों पर हजारों रुपए खर्च करते थे तब उनको जाकर अपनी जमीन से संबंधित खसरा खतौनी मिलती थी।

खसरा परियोजना 2024 के अंतर्गतघर बैठे देख सकते हैं
खसरा खतौनी एवं नक्शाहाँ
योजना प्रारंभकर्तामोहन यादव

कुछ समय पहले खसरा खतौनी को ऑनलाइन घर बैठे कंप्यूटर या मोबाइल पर देख सकते थे लेकिन इसमें कुछ ठगी होने लगी थी। किसानों को ठगा जाने लगा था गलत जानकारी दे करके। किसानों की जमीन से संबंधित प्राइवेसी भी लीक होती थी ।प्राइवेसी को देखते हुए सरकार ने खसरा खतौनी को केवल ब्लॉक स्तर पर तहसील के कर्मचारियों जैसे पटवारी आदि अधिकारियों को ही इसकी नकल देखने की अनुमति दी थी। योजना को बंद करने के सरकार के कुछ निजी कारण भी हो सकते हैं कि प्रारंभ में जो खसरा खतौनी को ऑनलाइन देखा जा सकता था उसको शिवराज सरकार ने बंद क्यों किया था।

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किसानों का होता था बहुत अधिक समय बर्बाद

ब्लॉक किस तरह तहसील स्तर पर खसरा खतौनी की नकल के लिए किसानों को बहुत अधिक दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे और अधिकारियों से विनती करनी पड़ती थी तब जाकर के उनको खसरा और खतौनी की नकल मिलती थी इस संपूर्ण प्रक्रिया में किसानों को बहुत अधिक समय बर्बाद करना पड़ता था।

आगरा खतौनी एवं नक्शा घर बैठे करें डाउनलोड

खसरा परियोजनाकार्यक्रम शुरू करने वालाउद्देश्य
ई खसरा परियोजनामोहन यादवखसरा खतौनी एवं नक्शा को घर बैठे देख सकने का योजना, किसानों को नकल के लिए सुविधा प्रदान करना ताकि उन्हें गिड़गिड़ाना और अधिक समय बर्बाद नहीं करना पड़े।
ऑफिसियल वेबसाइट —–https://mpbhulekh.govhttps://mpbhulekh.gov.in/mpbhulekh.do.in

सीएम मोहन यादव ने पारदर्शिता को बनाते हुए अधिकारियों के सामने किसानों को नकल के लिए गिड़गिड़ाना ना पड़े और अधिक समय बर्बाद ना करना पड़े इसीलिए मोहन यादव ने ई खसरा परियोजना प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत किसान घर बैठे मोबाइल फोन से या फिर कंप्यूटर लैपटॉप से खसरा खतौनी की नकल एवं नक्शा घर बैठे देख सकते हैं डाउनलोड कर सकते हैं और प्रिंट भी कर सकते हैं।

कुछ समय पहले जमीन से संबंधित एक और कानून में हुआ महत्वपूर्ण बदलाव

कुछ समय पहले मोहन यादव ने जगह जमीन से संबंधित एक और कानून में बहुत बड़ा बदलाव किया था। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा, नामांतरण की प्रक्रिया 15 दिन के अंतर्गत अपने आप अधिकारी करके देंगे।

रजिस्ट्री होने के बाद किसानों को नामांतरण के लिए दफ्तर के बहुत अधिक चक्कर लगाने पड़ते थे और अफसर को घूस देनी पड़ती थी। इसी पुरानी प्रथा को बंद करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नामांत्रण की प्रक्रिया को 15 दिन के अंतर्गत अधिकारियों को पूर्ण करना ही होगा ऐसी योजना प्रारंभ कर दी।

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