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जौ जवा मंडी भाव 2024 एमपी Jo Jawa Mandi Bhav 2024 MP Chhattisgarh

जौ  मंडी भाव मध्यप्रदेश 2024

दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं जौ का मंडी भाव क्या है? जौ का   मध्य प्रदेश की प्रत्येक मंडी में  क्या भाव चल रहा है ? एक की उपयोगिता क्या है? इसकी बुवाई कब होती है? सभी प्रकार की बातों पर चर्चा करने वाले हैं | दोस्तों इसकी उत्पादन की बात करें 9 लाख हेक्टेयर में 1700000 टन जौ का उत्पादन किया जा सकता है | 

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मध्य प्रदेश की मंडियों में जौ का भाव –

  • 1. छतरपुर मंडी भाव की अगर बात करें तो छतरपुर मंडी में जौ का भाव 1900- 2700 रुपए प्रति क्विंटल का भाव चल रहा है |
  • 2. मध्यप्रदेश के दतिया जिले में दतिया मंडी में जौ का भाव 2350 से ₹2600 प्रति क्विंटल चल रहा है | 
  • 3. मध्य प्रदेश के कटनी में मंडी में जौ का भाव 1900₹2450 प्रति क्विंटल चल रहा है |
  • 4. मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पन्ना मंडी में इसका भाव 1800-2250 चल रहा है |
  • 5. मध्य प्रदेश के रीवा मंडी में इसका भाव 1880 -₹2400 प्रति क्विंटल चल रहा है |
  • 6. मध्यप्रदेश के सतना मंडी में आज का भाव 1850-2200 प्रति क्विंटल चल रहा है | 
  • 7. मध्य प्रदेश की अनाज वाली सबसे चर्चित मंडी नीमच में इसका भाव 2500 से 3050 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है |
  • 8. मध्य प्रदेश की टीकमगढ़ मंडी में इसका भाव 2450 से 2650 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है |
  • 9. मध्य प्रदेश के सिंगरौली मंडी में इसका भाव 1885- 2250 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है |

जौ के भाव में बढ़ रही तेजी-

दोस्त वर्तमान में जिस तरह से इसकी भाव बढ़ रही हैं और इसकी मांग को देखते हुए मध्य प्रदेश की प्रत्येक अनाज मंडी में इसकी अधिक से अधिक मांग हो रही है जिस कारण से इसके भाव में अचानक से वृद्धि हो गई | दोस्तों किसानों के लिए तो सबसे बड़ी खुशखबरी तो यह है कि किसान भाई अपना अनाज बेचने से पहले उसका मंडी भाव जरूर पता कर लें अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है |

साहूकारों के बजाय मंडी में बेचने से होगा किसानों को फायदा –

दोस्तों साहूकारों को बेचने से पहले सभी किसान भाई अगर जौ का मंडी भाव पता करके इसको अपने नजदीकी मंडी में बेचा जाए तो किसान भाइयों को इसका उचित लाभ मिल सकता है | साहूकारों की अपेक्षा मंडियों में अनाज हमेशा अधिक मूल्य पर खरीदा जाता है क्योंकि मंडियों से दूर-दूर के खरीदी केंद्र और विदेशों तक के लिए एक्सपोर्ट किया जाता है |

जौ की यदि समय पर नहीं की कटाई तो हो सकता है किसानों को बहुत बड़ा नुकसान –

दोस्तों अन्य अनाज की तुलना में इसकी खेती होने में 20 से 25 दिन का कम समय लगता है साथ ही अन्य अनाज की तुलना में पानी भी कम लगता है | पानी की मात्रा कम होने के कारण किसान भाई इसको कम पानी में भी अच्छे तरीके से उगा सकते हैं और इसका उत्पादन पर्याप्त मात्रा में कर सकते हैं |

जौ का घर में उपयोग –

दोस्तों इस प्रकार के अनाज का सबसे अधिक उपयोग पशुओं के लिए मुख्य आहार के रूप में किया जाता है | पशुओं के लिए दिए जाने वाली खली के बाद इसका प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है | पशुओं को( भैंस अथवा गाय) को पौष्टिक आहार के रूप में इसका आटा प्रयोग में लाया जाता है | किस का आटा मुख्य आहार के रूप में देखें पशुओं से पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन किया जाता है | और पशुओं का शारीरिक स्वास्थ्य और चमकदार त्वचा के लिए यह बहुत ही लाभदायक होता है |

कम पानी में करें जौ की खेती-

दोस्तों गेहूं की तुलना में जौ को कम पानी की आवश्यकता होती है इस प्रकार का अनाज गेहूं की अपेक्षा दो बार पानी कम लेता है जिस कारण से किसान इसको कम पानी में भी उत्पादित कर सकते हैं और लाभ कमा सकते हैं | जिन क्षेत्रों में पानी की कमी होती है उन क्षेत्रों में इसकी खेती करना बहुत ही लाभदायक होता है |

मात्र 90 दिन में करें जौ की खेती –

दोस्तों अन्य अनाज की तुलना में इसकी खेती कम समय में की जा सकती है जी हां दोस्तों जैसा कि आपको मैंने बताया 90 दिन में इसकी खेती की जा सकती है | 90 दिन में इसका अनाज पक कर तैयार हो जाता है और कम समय में किसान इसको अच्छी मात्रा में उत्पादित कर सकते हैं | दोस्तों इसकी खेती करने से पहले आपको उन्नत किस्म के बीज की आवश्यकता है जिसको आप मार्केट से उपलब्ध करा सकते हैं इसके बाद इसकी बुवाई कर सकती तो आपको अच्छी मात्रा में उत्पादन होगा |

जौ की खेती करने से पहले करा लें मृदा परीक्षण –

दोस्तों कोई भी खेती हो कोई भी मौसम हो रबी की खेती कर रहे हो अथवा खरीफ की खेती कर रहे हैं कोई भी अनाज बोने से पहले जिस खेत में आप बोना चाहते हैं उस खेत की मृदा का परीक्षा करा कर ही खेती करें ,तो आपको होने वाले नुकसान से तो बचा ही जा सकता है साथ ही खेती से पर्याप्त मात्रा में लाभ कमा सकते हैं | यदि आप मृदा का परीक्षा करा लेते हैं तो आपको पता चल जाता है कि मृदा में कौन से तत्वों की कमी है यदि आपको मरदा में तत्वों की कमी का पता चल जाता है तो आप उसके तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं जिसके लिए आप जैविक खाद का प्रयोग कर सकते हैं कंपोस्ट खाद का भी प्रयोग कर सकते हैं तो आप की मृदा में होने वाले तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है |

यदि नहीं कराया मृदा परीक्षण तो किसानों को हो सकता है बहुत बड़ा नुकसान –

यदि आप मिट्टी का परीक्षण नहीं कराते हैं तो आप को बहुत बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है क्योंकि मिट्टी का परीक्षण कराने के बाद आप उसके पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं लेकिन यदि नहीं कराया तो आप खेती में होने वाले लाभ से वंचित रह सकते हैं | मृदा का परीक्षण नहीं कराएंगे तो उसमें पता ही नहीं चलता कि कौन सा अनाज है सबसे ज्यादा मात्रा में उगाया जा सकता है | मृदा परीक्षण कराने के बाद पता लगा सकते हैं कि किस अनाज की खेती इस मृदा में की जा सकती है और किस अनाज का सबसे ज्यादा मात्रा में उत्पादन किया जा सकता है | दोस्तों सरकार का भी किसान भाइयों के लिए हमेशा सलाह होती है कि सभी किसान भाई मृदा का परीक्षण करवाने के बाद ही खेती को करें जिसके लिए सरकार प्रत्येक जिले में मृदा परीक्षण केंद्र सहायता भी करती है |

E Mandi Rates MP Chhattisgarh 2024 – Mandi Bhav 2024

          मिट्टी का परीक्षण कराने के लिए आपको ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है लेकिन आपको अपने नजदीकी शहर के मृदा परीक्षण केंद्र पर जरूर जाना होगा | खेत में आप बुवाई करना चाहते हैं बुवाई करने से पहले उस खेत की मिट्टी को थोड़ी मात्रा में लेकर मिट्टी परीक्षण केंद्र पर ले जाकर मिट्टी का परीक्षण करवा सकते हैं | मिट्टी का परीक्षण करवाने के बाद मिट्टी परीक्षण केंद्र पर पता चल जाता है कि मृदा में कौनसी तत्वों की कमी है किस तरीके से इन तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है और कौन सी खेती किस प्रकार की मृदा में अच्छी तरीके से हो सकती है | मिट्टी का परीक्षण कराने के बाद मिट्टी क्षारीय है कि अम्लीय इसका भी पता चल जाता है जिसके बारे में किसान भाइयों को जानना बहुत आवश्यक होता है |

जौ की खेती के लिए सिंचाई –

दोस्तों इसकी सिंचाई के लिए पहली सिंचाई आप 25 से 30 दिन के अंतराल पर कर सकते हैं इसके बाद दूसरी सिंचाई सालों से 45 दिन के अंतराल पर और समय-समय पर इसकी देखरेख और सिंचाई करना चाहिए | दोस्तों यह अधिक पानी नहीं मांगता है यदि पानी की कम मात्रा भी मिले तो भी यह आसानी से हो जाता है |

जौ की खेती करने से किसान जायद की फसल भी समय से उगा सकते हैं –

इसकी खेती बहुत ही कम समय में हो जाती है अर्थात अन्य अनाज की तुलना में 20 से 25 दिन कम का समय लगता है | इस तरीके इसकी खेती जल्दी हो जाती है तो इसके बाद खेत खाली हो जाते हैं खेत खाली होने के बाद किसान भाई समय से जायद की फसल को भी बो सकते हैं और जायद की फसल का उत्पादन करके भी अच्छा खासा लाभ कमा सकते हैं |

मार्केट में जौ की मांग बढ़ने से किसानों को हो सकता है मुनाफा –

दोस्तों मार्केट में जौ की मांग बढ़ने से इसके भाव में भी वृद्धि हो सकती है इसकी मांग बढ़ने से किसानों को अच्छा खासा लाभ प्राप्त हो सकता है |

जौ कि महत्वपूर्ण किस्में –

1. ज्योती-

दोस्तों यह किस्म अन्य किस्मों की तुलना में पानी की मात्रा थोड़ा ज्यादा मानती है लेकिन उत्पादन में यह बहुत आगे होती है | यह किस्म  रोधक क्षमता से भरी होती है इस प्रकार की किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता होती है तो पौधों में किसी भी प्रकार का रोग नहीं लग पाता जिस कारण से किसानों को होने वाली हानि से तो बचा ही जा सकता है साथ ही उपयुक्त लाभ कमाया जा सकता है |

2. NDB1173-

दोस्तों यह किस्म सबसे महत्वपूर्ण होती है किसान भाई सबसे अधिक मात्रा में इसी की बुआई करते हैं मार्केट में सबसे ज्यादा इसी किस्म की मांग होती है क्योंकि यह किस्म उचित दामों पर उपलब्ध हो जाती है साथ ही उत्पादन क्षमता भी ईद की बहुत अधिक होती है |

3.नरेंद्र जौ 1-

दोस्तों इस प्रकार की किस्म से किसान भाई पर्याप्त मात्रा में अच्छा खासा उत्पादन कर सकते हैं अन्य किस्मों की तुलना में यह किस्म में थोड़ी महंगी होती है लेकिन इसका उत्पादन अन्य किस्म की तुलना में अधिक होता है |

प्रीति ,Kd3 आदि बहुत सी ऐसी  किस्में हैं जोकि किसान भाइयों के लिए सबसे उपयुक्त और महत्वपूर्ण है जिनकी उत्पादन में कभी कोई कमी नहीं आती साथ ही रोगों से लड़ने की क्षमता होती है जिस कारण से उन्हें रोग भी नहीं लगते|

जौ की  महत्वपूर्ण विशेषताएं –

१. इसमें मुख्य रूप से पोटेशियम, फास्फोरस और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है

२. दोस्तों गेहूं से अधिक मात्रा में प्रोटीन पाए जाने के कारण यह बहुत ही लोकप्रिय होता है और इसका उत्पादन भी गेहूं के साथ पर्याप्त मात्रा में किया जाता है | अधिक प्रोटीन होने के कारण पशुओं को पोषक आहार के रूप में दिए जाने के कारण पशुओं की त्वचा चमकदार होती है और साथ ही उनके दूध में वृद्धि होती है |

३. दोस्तों पशुओं के द्वारा इनका अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है लेकिन फिर भी पशुओं को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता क्योंकि इसमें फाइबर पाया जाता है जो पशुओं के भोजन को पचाने में मदद करता है |

४. दोस्तों इसमें आठ प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं इंसुलिन के निर्माण में भी यह बहुत ही सहायक होता है |

५. इसमें मुख्य रूप से प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन b1 ,विटामिन B3 ,मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो मुख्य रूप से आहार के लिए प्रयुक्त होता है |

६. दोस्तों इसमें इतने प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं कि हीरो जैसे रोगियों के लिए भी डॉक्टरों द्वारा इसके सेवन करने के लिए कहा गया है | शरीर की अच्छी क्रियाओं के लिए यह बहुत ही आवश्यक होता है और लोग इसका सेवन भी करते हैं |

पशुओं के लिए आटा –

दोस्तों इसको पिसवाकर मुख्य आहार के रूप में दिया जाता है जिस कारण से पशुओं के दूध के उत्पादन में वृद्धि होती है साथ ही पशुओं का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है | दोस्तों पशुओं के लिए मोटे आटे के रूप में इसको दिया जाता है|

जौ का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग –

दोस्तों इस में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन ,कार्बोहाइड्रेट, फाइबर ,विटामिन और बहुत से छोटे -छोटे और बड़े बड़े पोषक तत्व पाए जाने के कारण इसकी मांग और उपयोगिता बहुत अधिक होती है | हमारे दैनिक जीवन में इसका आटा पिसवाकर है रोटी के रूप में इसका सेवन किया जाता है | दोस्तो हमारे चेहरे पर होने वाले मुंहासे और पिम्पल्स को इसके द्वारा बनाए जाने वाले काढ़े के द्वारा ठीक किया जा सकता है जिसमें मुख्य रुप से इसकी औषधि बनाकर सेवन किया जाए तो आसानी से ठीक हो सकता है | इसकी खेती करने से पहले किसानों को सबसे जरूरी होता है उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग यदि किसान भाई उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग करेंगे तो सबसे अधिक मात्रा में उत्पादन कर सकते हैं और लाभ कमा सकते हैं |

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