खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए – KHAJURAHO KI MOORTIYA DIKHAYE

नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में म.प्र. के छतरपुर जिले के पर्यटन और धार्मिक स्थलों की जानकारी दी जाएगी | आज हम बात करेंगे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के मंदिरों और मूर्तियों की |
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो

म.प्र. की राजधानी भोपाल से 376 किलोमीटर  दूर छतरपुर जिले में स्थित है विश्व विख्यात पर्यटन नगरी खजुराहो  | खजुराहो में यहाँ के जैन धर्मो के मंदिरों का सबसे बड़ा समूह है | इन्हें विश्व के खूबसूरत रियासतों में से एक माना जाता है | खजुराहो के मंदिरों को 1986 में यूनेस्को वर्ल्ड हैरीटेज लिस्ट में शामिल किया गया है |

मंदिरों का इतिहास

खजुराहो के मंदिर नागर शैली का एक अद्भुत उदाहरण है,  9वी सदी से 1130 ईस्वी के बीच बनाये गये थे खजुराहो के ये मंदिर | खजुराहो और उसके मंदिरों का पहला उल्लेख अबू विहात अल और इब्न बतूता की किताबों में है | ऐसा कहा जाता है कि मंदिर बीस वर्ग किमी में पहले हुए थे | और 12 शताब्दी के लगभग 85 मंदिर थे, लेकिन वक्त  के साथ खजुराहो में मंदिरों की संख्या घटकर आज केवल 20 हो गई है | चंदेला साम्राज्य का 10वी शताब्दी और  14वी शताब्दी तक मध्यभारत पर शासन था | चंदेलों को, कला और वास्तु कला में रूचि के लिए जाना जाता था |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

चंदेल शासन और खजुराहो के मंदिर

हालांकि चंदेल शैव धर्म के अनुयायी थे, लेकिन जैन धर्म और वैष्णव धर्म के प्रति उनके झुकाव के प्रमाण खजुराहो में मिलते हैं | खजुराहो के मंदिरों की नक्काशी मुख्य रूप से हिन्दू देवताओं, पौराणिक कथाओं से संबंधित है | स्थापत्य शैली भी हिन्दू परंपराओं के अनुसार हैं | खजुराहो के मंदिर, हिंदू धर्म के मंदिरों का निर्माण की प्रमुख विशेषता है | मंदिरों का सम्मुख सूर्योदय की दिशा की ओर है, खजुराहो का सभी मंदिरों का निर्माण इस बात को ध्यान में रखकर ही किया गया है | इसके अलावा इनकी नक्काशी हिन्दू जीवन के चार लक्ष्य धर्म , काम, अर्थ, मोक्ष को दर्शाती है |

कंदरिया महादेव मंदिर : लाखों भक्त आते हैं महादेव दर्शन को

खजुराहो के मंदिरों में प्रमुख मंदिर में कंदरिया महादेव मंदिर है | लाखों भक्त आते हैं महादेव दर्शन के लिए |
कंदरिया मंदिरो को दूर से देखने में ऐसा लगता है ,जैसे हम किसी कंद्र, गुफा आदि में जा रहे हैं |
खजुराहो रहस्यमयी पर्यटन स्थल है जो विश्व भर में सुविख्यात है | खजुराहो के मंदिरों को देखने देश विदेश की सभी जगहों के लोग घूमने आते हैं |

खजुराहो के प्रमुख मंदिर

  • कंदरिया महादेव मंदिर
  • चौसठ योगिनी मंदिर
  • चित्रगुप्त मंदिर
  • पार्श्वनाथ मंदिर
  • चतुर्भुज मंदिर
  • कामसूत्र नक्काशी
  • नंदी प्रतिमा
  • मंदिरों का दक्षिणी समूह
  • देवी जगदंबा मंदिर
  • मातंगेश्वर मंदिर
  • आदिनाथ मंदिर
  • लक्ष्मण मंदिर
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खजुराहो : विश्व विख्यात पर्यटन स्थल

खजुराहो के मंदिर देखने में बहुत सुन्दर लगते हैं इसकी सुंदरता बहुत दूर दूर तक फैली हुई है | खजुराहो एक विश्व प्रसिद्ध शहर है |
खजुराहो म.प्र. राज्य के जिला छतरपुर में स्थित है | कितनी भी दूर से खजुराहो घूमने आए खजुराहो में रूकने की व्यवस्था भी है | बहुत सारे होटल हैं खजुराहो में, आप किसी भी होटल में रूक सकते हैं |
खजुराहो में एक बहुत बड़ा मंदिर है जिस मंदिर में भगवान शिव जी विराजमान है, भगवान शिव के मंदिर में लाखों लोगों की भीड़ लगी रहती है और यहाँ आने पर लोगों की मनोकामना भी पूरी होती है, भगवान शिव सभी भक्तों पर दया करते हैं, और उनके दु:ख हरते है |

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खजुराहो प्रचीन कालीन इतिहास

हमारे देश में प्राचीनकाल में बहुत मंदिर थें लेकिन कुछ मंदिर मुगल शासकों ने तोड़ दिए है |
लेकिन सरकार ने मंदिरों पर बहुत ध्यान दिया है |
पुरानी परंपरा खत्म नही होनी दी है  |
खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा करवाया गया था | चंदेलों को संगीत और नृत्य के विभिन्न रूपों में भी रूचि थीं,इसलिए यहाँ के मंदिरों के दीवारों पर चित्रित संगीत और नृत्य की वास्तुकला देखने को मिलती है |  खजुराहो के मंदिरों की मूर्तिकला देश विदेश में प्रसिद्ध है | खजुराहो की कुछ मूर्तियां नग्न अवस्था में भी है इसी मूर्तियों में प्राचीन काल का रहस्य दिखाया गया है | जो आज के समय में दिखाया गया है |
दोस्तों जो भी लोग  खजुराहो में घूमने आते हैं, देश विदेश से हो चाहे लोकल क्षेत्र के हों, वो यही कहते हैं कि खजुराहो का नजरा बहुत ही अतिसुन्दर है |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

खजुराहो मंदिरों का निर्माण

दोस्तों एक हजार साल पहले जेजाकभुक्ति की भूमि से पैदा हुआ एक नया साम्राज्य जिसकी राजाओं की अद्भुत कहानी मिथिको और तंत्रकथाओ में दबी है |
कभी हमारी दुनिया में हेमवती नामक एक रूप स्त्री रहती थीं, ऐसी सुंदरी नारी कि,  तीनों लोक उस पर मोहित था | और एक रात चंद्रदेव उसके रूप से आकर्षित होकर पृथ्वी पर उतर आए |  चंद्रदेव और हेमवती का पुत्र चंद्रवर्मन कहलाया और उसने स्थापना की चंद्रवंशी और चंदेल कुल की, भूले ही उनकी उत्पत्ति रहस्यमयी रही हो  |
लेकिन चंदेलों ने अपनी कई विरासत छोड़ी है, आरादर्जी की चौरासी ईमारतें सब वास्तुकला का निचोड़ नमूना कामुकता  का प्रतीक रहा | पांच सौ साल बाद चंदेलों का राजपूत वंश खत्म हो गया, और उनकी बनाई कुछ ईमारतें तोड़ दी गई, और कुछ खुद ही नष्ट हो गई, जो बची थीं वो जंगल में छिप गई |

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खजुराहो मंदिरों की खोज: ब्रिटिश शासन

आठ सौ साल बाद भारत में ब्रिटिश आ गए, तब वहाँ के कई इलाकों की खोज तक नहीं हुई थी |

सन् 1838 में ब्रिटिश फौज के इंजीनियर, टीएस बर्टस  मध्यभारत के बुंदेलखंड से गुजर रहे थे | वहाँ के लोगों से उन्होंने उस इलाके के प्राचीन मंदिरों, खण्डहरों के बारे में सुना टीएस बर्टस  की उत्सुकता बड़ी तो वह सब छोड़कर मंदिरों की तलाशी करने लगे, इसी खोज में उन्हें खजुराहो के मंदिर मिले | इतना बड़ी खोज इस तरह हुई  |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

खजुराहो : हिंदुओं की विशेष मान्यता

खजुराहो के मंदिर आज के मध्यप्रदेश में छतरपुर जिले में है और उन्हें पूर्व, पश्चिम एवं दक्षिण के समूह में बांट दिया गया है |
खजुराहो की कुछ मूर्तियां पौराणिक कथाओं पर आधारित है, उनकी बाकी बची 10% मूर्तियों जो सबसे ज्यादा मसूर है | कामसूत्र की विभिन्न मुद्राओं को मंदिर की दीवारों पर उतार दिया गया है | और उन्हें देखकर कोई भी हैरान रह जाता है | 200 साल पहले केप्टन टीएस बर्टस पवित्र दीवारों पर कामसूत्र की मूर्तियों को देखकर चौके थे , उसी प्रकार से आज यहाँ आने वाले लोग मूर्तियों को देखकर तंग रह गए जाते हैं |

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  इन मूर्तियों को देखकर ये सवाल मन में आना लाजमी है कि मूर्तियों को बनाते समय बनाने वालों के मन में क्या चला रहा था | खजुराहो की कामुकता मूर्तियां आज भी बहस का मुद्दा हैं | लेकिन सन् 1838 में केप्टन टीएस बर्टस यह नहीं समझ पा किए इन मूर्तियों का क्या रहस्य है |
इस तरह खजुराहो के विश्व विख्यात मंदिरों की खोज हुई |

खजुराहो के मंदिरों की प्रमुख फोटो : ( खजुराहो की मूर्तियां)

खजुराहो के मंदिरों को देखने देश विदेश की सभी जगहों के लोग घूमने आते हैं |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

खजुराहो के मंदिर आज के मध्यप्रदेश में छतरपुर जिले में है और उन्हें पूर्व, पश्चिम एवं दक्षिण के समूह में बांट दिया गया है |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

एक हजार साल पहले जेजाकभुक्ति की भूमि से पैदा हुआ एक नया साम्राज्य जिसकी राजाओं की अद्भुत कहानी मिथिको और तंत्रकथाओ में दबी है |

खजुराहो की मूर्तियां दिखाइए

प्राचीनकाल में बहुत मंदिर थें लेकिन कुछ मंदिर मुगल शासकों ने तोड़ दिए है |
लेकिन सरकार ने मंदिरों पर बहुत ध्यान दिया है |

यदि खजुराहो में आपको ठहरना है या किसी से कुछ टिप्स या मदद चाहिए घूमने के लिए तो आप यहाँ पर 500 रुपये में गाइड भी ले सकते हैं | टूरिस्ट गाइड आपको और अच्छी तरह से खजुराहो को घूमने में मदद कर सकते हैं | खजुराहो में होटलों की संख्या भी बहुत ही अधिक मात्रा में है | आपको यहाँ पर ठहरने के लिए 1000 रुपये से लेकर 10000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से रहने के लिए होटल मिल जाएंगे | खजुराहो के चारों ओर होटलों की व्यवस्था है | कहने का मतलब है कि खजुराहो में आप जिस भी ग्रुप के मंदिर घूमना चाहते हैं आपको उसी तरफ होटल में रूम भी किराए पर ले लेना है | इस तरह से आप और भी आसानी से खजुराहो के मंदिरों के अद्भुत दृश्य को देख सकते हैं | खजुराहो के मंदिरों के आस पास ही वन विभाग का क्षेत्र है जहाँ पर आप टाइगर सफारी भी कर सकते हैं | खजुराहो के पास से ही पन्ना टाइगर रिजर्व का क्षेत्र लगा हुआ है | पन्ना टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश का जाना माना टाइगर रिजर्व क्षेत्र है | पन्ना टाइगर रिजर्व में दो वाटर फाल ( झरने) भी हैं, इन झरनों को देखकर आपका मन अत्यंत प्रफुल्लित होगा |

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खजुराहो के प्रमुख जल प्रपात ( वाटरफॉल / झरने)

  • रनेह वाटरफॉल
  • पाण्डव वाटरफॉल
  • पिपरी वाटरफॉल

इन वाटरफॉल पर यदि आप जाना चाहते हैं तो टूरिस्ट गाइड के साथ लेकर जा सकते हैं क्योंकि टूरिस्ट गाइड इन वाटरफॉल को आपको और अच्छी तरह से घुमा सकते हैं |

खजुराहो एक और रोचक बात मैं आपको बताना चाहता हूँ कि खजुराहो खूड़र नामक नदी के किनारे बसा हुआ है और खजुराहो के ज्यादातर मंदिर भी खूड़र नदी के किनारे पर ही स्थित हैं | खूड़र नदी के मनोरम दृश्य को यदि आप और भी अच्छी तरह से देखना चाहते हैं तो आपको खूड़र नदी के किनारे वाले होटल में ही रुकना चाहिए ताकि आप खूड़र नदी के मनोरम दृश्य को भी आनंदमय तरीके से देख सकें |

खजुराहो में रुकने के लिए बहुत से होटल भी हैं जिन्हें Five Star होटल से लेकर सस्ते से सस्ता होटल भी है |


खजुराहो के प्रमुख होटल –

  • होटल चंदेला खजुराहो
  • होटल क्लार्क्स खजुराहो
  • होटल रमादा खजुराहो
  • रैडिसन जैस होटल खजुराहो
  • होटल प्लाजा खजुराहो
  • होटल इसाबेल पैलेस खजुराहो
  • होटल पायल खजुराहो
  • होटल निर्वाण खजुराहो
  • होटल खुश खुश खजुराहो
  • होटल सूर्य खजुराहो

खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर नवंबर का है क्योंकि यहाँ पर इस समय ज्यादा ठंड का मौसम भी नहीं रहता है और झरनों में पानी भी बहुत ही अधिक मात्रा में रहता है | झरनों की एक बात तो मैं बताना भूल ही गया कि आप यहाँ पर झरनों में मगरमच्छ भी देख सकते हैं | मगरमच्छ भी खजुराहो के इन झरनों में बहुत ही अधिक मात्रा में उपस्थित हैं |
खजुराहो को घूमने के लिए आपको यहाँ किराये पर साइकिल और मोटर साइकिल भी मिल जाएगी | मैं आपको साइकिल यआ मोटरसाइकिल के लिए इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि यहाँ पर मंदिर 1 -1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | इस तरह आप खजुराहो का आनंद ले सकते हैं |

खजुराहो के मंदिरों की मूर्तियों के बारे में, ये अपने प्राचीन अद्भुत कला शैली के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है । जिसे हम खजुराहो के नाम से जानते हैं | जिसे प्राचीन काल में खजुरपुरा और खजूरवाहिका के नाम से भी जाना जाता था। खजुराहो मंदिरों के लिए फेमस मुड़े हुए पत्थरों से बने मंदिर, संभोग की विभिन्न कलाओ के लिए भी फेमस है। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिंदू धर्म और जैन धर्म, दोनों के मंदिर मिलते हैं। भारत के अलावा यहां देश विदेश से के लोग अद्भुत शैली कला के कारण साल भर लोग आते रहते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार साल से भी पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि यह शहर चंदेल वंश के संस्थापक राजा चंद्रयान द्वारा दुबारा बसाया गया है।
और यह उनकी प्रथम राजधानी भी थी | राजा चंद्रयान बुंदेलखंड में शासन करने वाले राजा थे वह अपने आपको चंद्र पक्षी कहते थे | खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950ईस्वी से लेकर 1050ईस्वी के बीच माना जाता है।

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