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खरगौन जिला – Khargone tourist places GK History in hindi

खरगौन जिले की प्रमुख पर्यटक स्थल

दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के बारे में जो कि मध्य प्रदेश की “मिनी मुंबई “इंदौर संभाग के अंतर्गत आता है और इस जिले के अंतर्गत बहुत सुंदर-सुंदर पर्यटक स्थल पाए जाते हैं आज हम सभी पर्यटक स्थलों के बारे में चर्चा करेंगे| दोस्तों खरगौन को पश्चिमी निमाड़ के नाम से जाना जाता है जिले का इतिहास बहुत ही पुराना और रोचक इतिहास है इसके बारे में बहुत ही भावुकता पूर्ण कहानी सुनने को मिलती हैं | दोस्तों आज हम यहां मुख्य रूप से बात करेंगे जिले के ऐसे कौन- कौन से स्थल हैं जहां पर घूमने के लिए उपयुक्त रहता है और कौन-कौन से हैं ऐसे स्थल हैं जहां पर हम अपने पूरे परिवार के साथ घूम सकते हैं और प्रकृति का आनंद ले सकते हैं | दोस्तों खरगौन के अंतर्गत आने वाली नदियां कौन-कौन सी है जहां पर कौन-कौन से बांध बनाए गए हैं और कौन-कौन से झरना मौजूद हैं जहां पर घूमने में अच्छा लगता है| इन सभी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे |

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Khargone tourist places

सहस्त्रधारा जलप्रपातनर्मदा नदी
महेश्वररानी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी
मेलासंत सिंहाजी का मेला, नवग्रह मेला
आदिवासी जिलाखरगौन
समाधिपेशवा बाजीराव
मध्यप्रदेश का सुनहरा जिलाखरगौन
स्तूपकसरावद का स्तूप
अनुसंधान केंद्रमध्य प्रदेश का कपास अनुसंधान केंद्र
सबसे ज्यादा उत्पादनमूंगफली
बांधदेवड़ा बांध
बड़वाह और सनादरजुड़वा नगर
तहसीलों की संख्या9
विधानसभा क्षेत्र4
बैड़ियामिर्ची मंडी
महेश्वर का पुराना नाममाहिष्मती
प्रशिक्षण केंद्रसीआईएसफ
पर्यटक स्थलनवग्रह मंदिर ,ऊनी के मंदिर, महेश्वर, पांडव युगीन महादेव मंदिर ,गणपति मंदिर etc.
जलवायुआद्र उष्णकटिबंधीय
शांति मंदिरजैन संप्रदाय का प्रमुख मंदिर
बल्लालेश्वर मंदिर का निर्माणराजा उदयादित्य के द्वारा

खरगौन जिले के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थल-

दोस्तों मध्य प्रदेश का खंडवा और खरगौन निमाड़ क्षेत्र के अंतर्गत आता है इस क्षेत्र में अक्सर विंध्याचल पर्वत का कुछ हिस्सा आता है और कहीं पर सतपुड़ा पर्वत का कुछ ऐसा आता है |इन पर्वतों के बीच बहती हुई नदियां इन दोनों जिलों से होकर जाती हैं | दोस्तों मध्य प्रदेश का पश्चिमी निमाड़ हो या पूर्वी निमाड़ इन दोनों क्षेत्रों में नर्मदा नदी और इसके सहायक नदी बहती है आज सभी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे |

▶️ श्रीमंत बाजीराव पेशवा समाधि-

मध्य प्रदेश के पश्चिमी निमाड़ कहे जाने वाले खरगौन के अंतर्गत रावरखेड़ी गांव में बाजीराव पेशवा की समाधि स्थल बनी हुई है |

▶️ श्री महालक्ष्मी और ऊनी के मंदिर-

मध्य प्रदेश के लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर श्री महालक्ष्मी और उन्हीं के प्रसिद्ध है अन्य मंदिर मौजूद हैं | दोस्तों यहां पर जितने भी मंदिर हैं सभी परमार कालीन मंदिर हैं ऐसा कहा जाता है कि परमार वंश के शासन काल के दौरान इन मंदिरों का निर्माण करवाया गया था | दोस्तों इन मंदिरों का इतिहास लगभग 1000 वर्ष से भी अधिक का पुराना है यहां पर लगभग 12 मंदिरों की एक श्रंखला है |

दोस्तों इन मंदिरों का निर्माण खजुराहो की मंदिरों के समकालीन किया गया था यहां पर उपस्थित सभी मंदिरों का निर्माण परमार वंश के राजा उदयादित्य के द्वारा करवाया गया था |

▶️ महालक्ष्मी मंदिर-

दोस्तों महालक्ष्मी मंदिर जो कि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के लिए समर्पित है यह मंदिर खरगौन जिले से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यह मंदिर बहुत ही प्राचीन और विशाल मंदिर है इस मंदिर का निर्माण खजुराहो मंदिरों के समकालीन किया गया था | इंदौर संभाग के अंतर्गत इतिहास काल के दौरान निमाड़ क्षेत्र के सभी भागों पर परमार वंश का शासन हुआ करता था | दोस्तों यह एक धार्मिक मंदिर है यहां पर हिंदू धर्म से जुड़े हुए लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं |

▶️ बल्लालेश्वर मंदिर-

दोस्तों यह एक मध्य प्रदेश के द्वारा संरक्षित की गई स्मारक है ऐतिहासिक इमारत का नाम इसका निर्माण करवाने वाले शासक के नाम पर रखा गया है | दोस्तों प्राचीन समय में निमाड़ क्षेत्र पर परमार वंश का शासन हुआ करता था जिनमें परमार वंश के राजा उदयादित्य के पुत्र राजा बल्लाल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था | दोस्तों यह इमारत की एक ऐतिहासिक इमारत होने के कारण इसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं | दोस्तों इमारत के इतिहास के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता क्योंकि उस समय पत्थरों पर ऐसी कोई भाषा अंकित नहीं की गई जिस कारण से इस मंदिर के बारे में गहराई से पता लगाया जा सके |

▶️ शांतिनाथ मंदिर-

दोस्तों खरगोन जिले की एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित इस शांतिनाथ मंदिर को “ग्वालेश्वर मंदिर “के नाम से भी जाना जाता है | जैन संप्रदाय के इस मंदिर को ग्वालेश्वर मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर आसपास के लोग आंधी तूफान और आकस्मिक घटना से बचने के लिए इस मंदिर की शरण लिया कर देते इसीलिए इसे ग्वालेश्वर मंदिर कहा जाने लगा | जैन धर्म की शरण लेने वाले अनुयाई इस स्थान को निर्वाण स्थान मानते थे और इसी कारण से इस स्थान को पावागिरी भी कहते हैं |

▶️ सहस्त्रधारा महेश्वरी-

सहस्त्रधारा का अर्थ होता है -‘1000 धारा’ | दोस्तों कहा जाता है खरगोन जिले के अंतर्गत सहस्त्रधारा में जितनी धाराएं नर्मदा नदी पर देखने को मिलती है उतनी ही नदियां नर्मदा नदी में समाहित हैं| सहस्त्रधारा महेश्वरी तक पहुंचने के लिए हवाई यात्रा के लिए आपको इंदौर हवाई अड्डा से होकर आना पड़ेगा | यदि आप सड़क के माध्यम से आना चाहते हैं तो आप फोर व्हीलर, ऑटो, टू व्हीलर के माध्यम से भी आ सकते हैं |

दोस्तों सहस्त्रधारा एक ऐसा पर्यटक स्थल है जहां पर आपको प्रकृति की सुंदरता नजर आती है | यहां पर सुबह के समय इतना इतना मनोरम दृश्य लगता है मानव जैसे हम स्वर्ग में ही आ गए हो | पत्थरों के बीच बहता हुआ पानी और नर्मदा नदी की कलकल की आवाज कानों में ऐसे लगती है मानो हम एकदम स्वर्ग में जी रहे हैं | दोस्तों यह बिल्कुल सत्य है यदि हम ऐसे स्थान पर जाएं जहां पर हमें प्रकृति बहुत बारीकी से दिखाई दे और हमारा मन एकदम शांत हो तो हम कह सकते हैं कि हम स्वर्ग जैसी जगह पर पहुंच गए हैं | दोस्तों स्तर के जैसी जगह पर पहुंचना एक प्रकार से ऐसा कहा जा सकता है कि हमारा मन किसी भी तरह से विचलित नहीं हैं और हमें किसी भी प्रकार से कोई समस्या नहीं है हमारा मन एकदम खुश है |

दोस्तों पत्थरों के बीच बहता हुआ स्वच्छ जल सुबह के समय मोती भी खेलता हुआ आगे बढ़ता है | आसपास के सभी निवासी गांव में जलापूर्ति नर्मदा नदी के द्वारा ही होती है और नर्मदा नदी की सहायक नदियां भी आसपास के सभी गांव में जलापूर्ति करती हैं |

दोस्तों यह सहस्त्रधारा खरगौन जिले के महेश्वरी नामक स्थान पर स्थित है यहां पर हल्की मात्रा में जंगल और पर्वत देखने को मिलते हैं| पहाड़ों के बीच से बहता हुआ पानी बहुत ही सुंदर और खूबसूरत लगता है |

▶️ महेश्वरी-

दोस्तों मध्य प्रदेश का महेश्वरी एक ऐसा पर्यटक स्थल है जहां पर इतिहास काल के दौरान कई शासकों ने शासन किया है | समय-समय पर रियासतों को जीतकर महेश्वरी को अपनी राजधानी बनाया है | दोस्तों यह एक ऐसा स्थान है जोकि कई तपस्वी साधु महात्माओं की तपोभूमि रहा है | हिंदू धर्म के शास्त्रों में कई बार हमें महेश्वरी के बारे में विभिन्न प्रकार की कथाओं को सुनाया जाता है जिनमें से कई ऋषि मुनि का संबंध इसी महेश्वरी से होता है | कई धार्मिक पुराणों में बताया जाता है कि रावण को हराने वाले हैयवंश के एक राजा सहस्त्रार्जुन नेम महेश्वरी को अपनी राजधानी बनाया था | दोस्तों महेश्वरी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी भी रही है यह उस समय की बात है जब भगवान परशुराम ने सहस्त्र गढ़ का वध किया था | आदि गुरु शंकराचार्य जी का संबंध भी इसी महेश्वरी से हैं| यह स्थान बड़ा ही रोचक और घूमने योग्य स्थान है इंदौर के माध्यम से आप एरोप्लेन के द्वारा भी आ सकते हैं और यदि आप लोकल के है तो कार ,ट्रेन ,बस अथवा टू व्हीलर के माध्यम से भी यहां पर घूम सकते हैं |

नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है महेश्वरी प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश में साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है यहां पर मिलने वाली साड़ियों को लोग दूर-दूर से खरीदने के लिए आते हैं | दोस्तों नर्मदा नदी के इस घाट पर बहुत सुंदर और खूबसूरत लगता है साथ ही इस घाट के नजदीक राजराजेश्वरी नाम से एक मंदिर है जो कि यहां का बहुत ही प्रसिद्ध और सुंदर मंदिर है | यह पर्यटक स्थल खरगौन से लगभग 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

▶️ऊन के पर्यटक स्थल-

ऊन के नाम से खरगौन में एक बहुत ही प्राचीन गांव है जहां पर जैन धर्म के अथवा हिंदू धर्म के कई मंदिरों की श्रंखला को देखा जा सकता है | दोस्तों यहां पर जैन संप्रदाय के कई मंदिरों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है | यहां पर निर्मित किए गए सभी मंदिर खजुराहो मंदिरों के समकालीन माने जाते हैं जिनको परमार वंश के द्वारा बनवाया गया था |

दोस्तों इस गांव में इतिहास काल की ऐसी धरोहर मौजूद है जिसकी सुरक्षा मध्य प्रदेश पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के द्वारा की जा रही है| इन सभी पर्यटक स्थलों की सुंदरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इनके ठीक है पास में और जरूरत के हिसाब से प्रकृति के साथ-साथ मां नर्मदा इनके साथ है यह सभी मां नर्मदा की किनारे पर मौजूद हैं |
दोस्तो इन मंदिरों के इतिहास को जानने के लिए कई लोगों ने कई बार कोशिश की और यहां पर अक्सर पर्यटक घूमने के लिए आते हैं तो उनके मन में सबसे पहले एक ही ख्याल आता है कि आखिर इन मंदिरों का इतिहास क्या होगा | इन मंदिरों के इतिहास को जानने के लिए वह सबसे पहले शिलालेख रखने की कोशिश करते हैं परंतु बहुत से मंदिर हैं ऐसे हैं जिनके शिलालेख मौजूद नहीं हैं |

▶️ जलवायु-

दोस्तों इस जिले की जलवायु उष्णकटिबंधीय जलवायु है और आद्र उष्णकटिबंधीय जलवायु भी | यहां पर आपको तीनों मौसम देखने को मिल जाते हैं जैसे गर्मी, सर्दी और बरसात | यहां पर जून के अंत में मानसून आता है और बारिश भी अच्छी खासी हो जाती है | यहां पर बारिश होने का सबसे खास कारण यह है कि आसपास विंध्यांचल पर्वत और सतपुड़ा पर्वत मौजूद है |

▶️ कृषि महाविद्यालय खरगौन-

दोस्तों खरगौन के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय भी मौजूद है जहां से किस जिले के विद्यार्थी स्नातक की पढ़ाई अपने जिले नहीं कृषि जैसे क्षेत्र की कर पाते हैं | दोस्तों कई शहर ऐसे हैं जहां पर कृषि संबंधित महाविद्यालय स्थापित नहीं है परंतु यहां पर एक कृषि महाविद्यालय स्थापित है जिस कारण से यहां के विद्यार्थियों को अन्य शहर में स्नातक की पढ़ाई करने के लिए भटकना नहीं पड़ता |

▶️ मंडलेश्वर-

खरगौन जिले का यह एक धार्मिक स्थल है यह धार्मिक स्थल महेश्वर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहां पर माता शीतला माता मंदिर, राम मंदिर, हनुमान मंदिर, नाग मंदिर ,दत्त मंदिर, 56 Dev मंदिर आदि मंदिर मौजूद है | यह सभी मंदिर अपने अपने धार्मिक महत्व के कारण पूरे प्रदेश में चर्चित और विख्यात हैं | दोस्तों यहां पर घूमने के लिए आप अपने खुद के वाहन से जा सकते हैं किसी देखने के लिए किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती है |

▶️ श्री गणपति मंदिर-

खरगौन जिले के अंतर्गत एक छोटा सा गांव चोली पड़ता है जिसके अंतर्गत है मंदिर आता है | यहां भगवान गणेश की बहुत बड़ी मूर्ति विराजमान है जिसे बड़ा गणपति के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | भगवान गणेश के अलावा यहां पर हिंदू धर्म से जुड़े हुए कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद |

यह एक धार्मिक मंदिर है जहां पर गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर भगवान श्री गणेश के दर्शन करने के लिए यहां पर लाखों श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं | दोस्तों भगवान श्री गणेश कुछ इस प्रकार से संकट हारी कहा जाता है उसी तरीके से यह अपने भक्तों को विश्वास दिलाते हैं कि आपके ऊपर कोई भी संकट नहीं आने दिया जाएगा | यह बिल्कुल सत्य भी है भगवान श्री गणेश के भक्त भगवान गणेश के चरणों में जो भी अर्जी लगाते हैं वह जरूर पूरी होती है | मंदिर में भगवान श्री गणेश शाम सुबह आरती भी होती है और उनकी पूजा करने के लिए लोग लगे हुए हैं |

▶️ पांडव युगीन महादेव का मंदिर-

खरगौन जिले के अंतर्गत एक बहुत ही प्राचीन और ऐतिहासिक गांव बसता है जिसे चोली के नाम से जाना जाता है एक ही गांव के अंतर्गत पांडव युगीन गुफा स्थित है जहां पर महादेव का मंदिर मौजूद है | इस मंदिर में भगवान शिव की शिवलिंग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है जिसकी पूजा करने के लिए प्रति महीना अमावस्या के समय पर भगवान शिव के भक्त आते रहते हैं | दोस्तों यह गुफा जंगल की बीचो-बीच स्थित है भूगर्भ नेताओं के द्वारा बताया जाता है कि यह गुफा पांडवों के समय की है कई लोग बताते हैं कि पांडवों के द्वारा ही इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था |

दोस्तों भगवान शिव का यह मंदिर जंगल के बीच में बीच स्थित है ठीक उसी प्रकार से जिस प्रकार पुराणों में बताया जाता है कि भगवान शिव को एकांत पसंद होता है | वेद पुराणों में हमको बताया जाता है कि भगवान से हमेशा तपस्या में लीन रहते थे जिस कारण से उनको एकांत की आवश्यकता होती थी जिस कारण से वे ज्यादातर जंगलों एवं झाड़ियों को अथवा पर्वत और पहाड़ियों को चुना करते थे| दोस्तों ठीक उसी प्रकार से यह मंदिर भी जंगल के बीचोंबीच स्थित है परंतु गुफा के माध्यम से अंदाजा लगाया जाता है कि यह गुफा पांडवों की समय की है और इस मंदिर का निर्माण भी पांडवों के द्वारा करवाया गया है | दोस्तों एक मंदिर का निर्माण किसने करवाया अभी तक किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है केवल संगीत बताया जा रहा है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया है |

दोस्तों कई पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में बताया जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान मध्य प्रदेश के कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जहां पर पांडवों ने अपना निवास स्थल बनाया था | यह स्थान भी कुछ उसी से संबंधित है हालांकि इस बात की कोई भी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है |

▶️ नवग्रह मंदिर-

दोस्तों इस मंदिर में आप नौ ग्रहों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं परंतु इनमें सबसे प्रमुख भगवान सूर्य की प्रतिमा है | दोस्तों यह मंदिर बहुत ही प्राचीन और सुंदर मंदिर है इसी देखने के लिए और सूर्य की नेविगेशन को देखने के लिए लोग अक्सर इस मंदिर को देखने के लिए आते | इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती है यदि आप इंदौर के द्वारा आते हैं तो आप हवाई माध्यम से आ सकते हैं | यदि आप नेशनल हाईवे के द्वारा आते हैं तो आप खरगौन नेशनल हाईवे पर आकर एस मंदिर के दर्शन कर सकते हैं |

दोस्तों इस मंदिर को देखने के लिए यहां पर प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं और दर्शन करते हैं | दर्शन करने के बाद जो लोग घूमना पसंद करते हैं उनके लिए घूमने की भी उपयुक्त व्यवस्था है यहां पर आप अपने पर्सनल वाहन अथवा बस के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं |

▶️ चिड़िया भटकाने वाला-

दोस्तों यह एक प्राकृतिक पर्यटक स्थल है जो कि नर्मदा नदी के किनारे पर है इसे देखने के लिए देश के दूर-दूर के राज्यों से लोग आनंद लेने के लिए आते है | यहां पर बहुत सुंदर लगता है और प्रकृति एकदम आकर्षक लगती है |

यह एक प्रकार से टूरिस्ट प्लेस है जहां पर गार्डन भी है और हरे भरे पेड़ पौधों के साथ बैठने की तथा घूमने की उपयुक्त व्यवस्था है | यहां पर पहुंचने के लिए आप यदि ज्यादा दूर से हैं तो इंदौर के माध्यम से हवाई यात्रा भी कर सकते हैं | यदि आप पास के हैं तो बस कार अलवर टू व्हीलर के माध्यम से इस स्थल तक पहुंचकर आनंद उठा सकते हैं |

खरगौन जिला – Khargone tourist places in hindi FAQ’s

🌗 मध्यप्रदेश में सीआईएसएफ का प्रशिक्षण केंद्र कहां पर है?

मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में सीआईएसएफ का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है |

🌗 मध्यप्रदेश में महेश्वर कहां पर स्थित है?

मध्यप्रदेश में महेश्वर खरगौन जिले के अंतर्गत आता है?

🌗 महेश्वर का पुराना नाम क्या है?

महेश्वर का पुराना नाम माहिष्मती इसके बारे में पुराणों में भी सुनने को मिलता है क्योंकि यह एक बहुत ही प्राचीन काल की जगह है और ऐतिहासिक जगह है |

🌗 महेश्वर किस नदी के किनारे बसा है?

दोस्तों महेश्वर एक बहुत ही सुंदर पर्यटक स्थल है और यह नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है | यह पर्यटक स्थल मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के अंतर्गत आता है |

🌗 मध्यप्रदेश में लाल मिर्ची की मंडी कहां पर स्थित है?

मध्यप्रदेश में लाल मिर्ची की मंडी खरगोन जिले में स्थित है यह मंडी विश्व की प्रसिद्ध मंडी है |

🌗 खरगोन की मिर्ची मंडी का नाम क्या है?

खरगोन की मिर्ची मंडी का नाम बैड़िया है |

🌗 खरगोन जिले में कुल कितनी तहसील है आती हैं?

खरगोन जिले के अंतर्गत लगभग 9 जिले आते हो और इस जिले में 4 विधानसभा क्षेत्र आते हैं|

🌗 मध्य प्रदेश में जुड़वा नगर कहां पर हैं?

मध्य-प्रदेश के खरगौन जिले के अंतर्गत आने वाले बड़वाह और सनावद को जुड़वा नगर के नाम से जाना जाता है यह नगर नर्मदा नदी के किनारे आमने सामने बसे हुए हैं | आमने सामने होने के कारण इनको जुड़वा नगर कहा जाता है |

🌗 मध्यप्रदेश में गुरु शंकराचार्य जी का संबंध किस जिले से है?

आदि गुरु शंकराचार्य जी का संबंध मध्य-प्रदेश के खरगौन जिले से हैं क्योंकि यहां पर आप भी गुरु शंकराचार्य जी को और पंडित मंडन मिश्र का शास्त्रार्थ इसी जिले में हुआ था |

🌗 खरगोन जिले में कौन सा बांध है?

खरगोन जिले में देवड़ा बांध बना हुआ है यह कौन है यहां पर बहने वाली कुंडा नदी पर बना हुआ है |

🌗 मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मूंगफली किस जिले में उगाई जाती है?

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मूंगफली खरगौन जिले में उगाई जाती है|

🌗 मध्य प्रदेश का कपास अनुसंधान केंद्र किस जिले में है |

Madhya Pradesh का कपास अनुसंधान केंद्र खरगौन जिले में स्थित है |

🌗 कसरावद का स्तूप कहां है?

प्रसिद्ध ऐतिहासिक कसरावद स्तूप मध्य-प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित है |

🌗 मध्यप्रदेश में रंगीन कपास और सुनहरा कपास कहां पर होता है?

मध्यप्रदेश में रंगीन कपास और सुनहरा कपास खरगौन जिले में उत्पादित किया जाता है इसीलिए इस जिले को ‘सुनहरा’ जिला कहा जाता है|

🌗 सुनहरा जिला किस जिले को कहा जाता है?

मध्य-प्रदेश के खरगौन जिले को सुनहरा जिला कहा जाता है क्योंकि यहां पर भारी मात्रा में कपास की सुंदर किस्मों को उत्पादित किया जाता है |

🌗 peshva Bajirao की समाधि मध्य प्रदेश में कहां पर स्थित है?

पेशवा बाजीराव की समाधि मध्य प्रदेश के रावरखेड़ी में स्थित है जोकि खरगौन जिले के अंतर्गत आता है |

🌗 मध्य प्रदेश का आदिवासी जिला कौन सा है?

मध्य-प्रदेश के खरगोन जिले को एकमात्र आदिवासी जिला घोषित किया गया |

🌗 Madhya Pradesh का नवग्रह मेला कहां पर आयोजित होता है?

मध्यप्रदेश का नवग्रह मेला खरगौन जिले में आयोजित होता है|

🌗 मध्यप्रदेश में सिंहा जी के मेले का आयोजन कहां पर होता है?

मध्यप्रदेश में सिंहा जी के मेले का आयोजन खरगौन जिले में होता है इसमें सैकड़ों लोग पार्टिसिपेट करते है|

🌗 रानी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी क्या थी?
प्रसिद्ध रानी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी महेश्वर हुआ करती थी जो कि खरगोन जिले के अंतर्गत ही आती है |

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