WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

मनोना धाम के चमत्कार: मनोना धाम के चमत्कारों के बारे में जानकारी

बरेली जिले से लगभग बरेली की जो रेलवे जंक्शन है उसके बिल्कुल नजदीक ही मनोना धाम स्थित है जिसकी दूरी लगभग 8 किलोमीटर है यह धाम जिले से लगभग बाहरी इलाके में है अर्थात जिले की सीमा पर स्थित है । महाभारत काल के सबसे महान योद्धाओं में से एक बर्बरीक भी बहुत विशाल युद्ध थे जिनके बारे में यह धाम अपनी कथाएं उजागर करता है ।

बाबा खाटू श्याम और भगवान श्री कृष्ण के बारे में न जाने कितनी कहानियां इतिहास की किताबों में दर्ज हैं लेकिन उनमें से एक धाम मनोना धाम स्थित है जो बर्बरीक के त्याग और बलिदान के लिए जाना जाता है। आज के आर्टिकल में हम समझेंगे की मनोना धाम पर आने के बाद किस प्रकार के चमत्कार देखने को मिलते हैं।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

बाबा खाटू श्याम के दर्शन करने के चमत्कार–

बाबा खाटू श्याम के दर्शन करने के बाद ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसे दर्शनों का लाभ ना मिला हो कहने का अर्थ यह है कि यहां पर जाने के बाद हर व्यक्ति की अभिलाषा पूरी होती है । भारत में केवल बाबा खाटू श्याम का ही मंदिर नहीं है बल्कि इसके अलावा कई ऐसे मंदिर हैं जहां पर चमत्कार देखने को मिलता है। जहां पर आने के बाद कभी यह एहसास नहीं होता कि हमारा कोई भी कष्ट दूर नहीं होगा चाहे वह बागेश्वर धाम हो चाहे फिर खाटू श्याम ।

मनोना धाम के चमत्कार: मनोना धाम के चमत्कारों के बारे में जानकारी

क्या है बर्बरीक की कहानी?

पांडवों में सबसे बलशाली और गदाधारी भीम के पुत्र थे घटोत्कच और घटोत्कच के पुत्र हुए बर्बरीक जो बिल्कुल भी की तरह और अपने पिता की तरह बहुत ही ताकतवर और विशाल शरीर के हुए बर्बरीक का शरीर इतना विशाल था कि यह अपने दादाजी और पिताजी से भी कई गुना बड़ा था । बर्बरीक के बारे में कहा जाता है कि यह यदि किसी पहाड़ पर पर रख दे तो वह पहाड़ दबाकर नीचे हो जाता था अर्थात शरीर बहुत विशाल होने के कारण किसी युद्ध में आई हुई सी को पल भर में बर्बाद कर सकता था ।

बर्बरीक ने युद्ध की अभिलाषा की तो श्री कृष्ण ने कर दिया मना–

महाभारत के समय पांडवों का साथ देने के लिए जब बर्बरीक आगे बढ़ा तो भगवान श्री कृष्ण को लगा कि अब धर्म स्थापना नहीं होगी और एक ही दिन में युद्ध समाप्त हो जाएगा और सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा। भगवान श्री कृष्ण ने ऐसा इसीलिए कहा क्योंकि बर्बरीक के पास तीन बाण हुआ करते थे जो उसे तपस्या के दौरान मिले थे।

उनकी तपस्या का फल इतना प्रभावित हुआ कि वह किसी पर भी धनुष चला रहे हैं तो तीर कभी भी खाली नहीं जा सकता था चाहे कोई भी हो । इसीलिए भगवान श्री कृष्ण को लगा कि अब युद्ध में कोई भी परास्त हो सकता है और धर्म स्थापना का सपना भी टूट जाएगा और युद्ध भी समाप्त हो जाएगा इसीलिए श्री कृष्ण ने चल से बर्बरीक से उसका सर ही मांग लिया ।

Join telegram

Leave a Comment