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झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल MP Jhabua District GK History & Tourism in Hindi

हेलो दोस्तों आज हम आपको झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं ।झाबुआ मध्य प्रदेश का एक ऐसा जिला है जो राजस्थान और गुजरात दोनों राज्यों की सीमा को छूता है ।मध्यप्रदेश में झाबुआ को भील जनजाति का घर कहा जाता है। झाबुआ नगर बहादुर सागर झील के किनारे बसा हुआ है। मध्य प्रदेश का पहला आदिवासी शोध संचार केंद्र झाबुआ में खोला गया था । सन 1935 में अंग्रेजों के खिलाफ कर वृद्धि आंदोलन की शुरुआत झाबुआ में ही हुई थी।

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झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल
देशभारत
राज्यमध्य प्रदेश
संभागइंदौर
जिला मुख्यालयझाबुआ
जिलाझाबुआ
तहसील5
विधानसभा3
झाबुआ नगर के झील के किनारे बसा हैबहादुर सागर झील
भोपाल से झाबुआ की दूरी332 किलोमीटर
झाबुआ  की स्थापना1584 केशव दास जी द्वारा
मोहनकोटझाबुआ
हाथी पावा पहाड़ीझाबुआ
हनुमान टेकरीझाबुआ
जनसंख्या घनत्व285 प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात989
क्षेत्रफल3782
झाबुआ जिले में कुल जनसंख्या1024091
झाबुआ जिले की साक्षरता44.45 परसेंट
मोर अभ्यारणझाबुआ मध्य प्रदेश

▶️ झाबुआ जिले का इतिहास

दोस्तों आज हम आपको ऐसे जिले के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने इतिहास कला और संस्कृति के लिए पहचाना जाता है। इस जिले का नाम है झाबुआ। ब्रिटिश काल में झाबुआ रियासत की राजधानी झाबुआ हुआ करती थी। इस रियासत का अधिकांश भाग भील समुदाय द्वारा बसाया गया था । जिन्होंने बहुसंख्यक आबादी का गठन किया था । अमरकोट झाबुआ रियासत का एक ठिकाना हुआ करता था । जो भी अपनी कला शीलता के लिए पहचाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान झाबुआ को 11 गन स्टेट सलूट का दर्जा प्राप्त था। यहां के शासकों को राजा की उपाधि प्रदान की गई थी। भोपाल से झाबुआ की दूरी लगभग 332 किलोमीटर है। झाबुआ रियासत का प्रारंभिक इतिहास 15 वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है।

झाबुआ जिले का इतिहास
झाबुआ जिले का इतिहास

✔️✔️ झाबुआ राज्य की स्थापना सन 1584 में केशव दास जी ने की थी उन्हे बंगाल में एक संपत अभियान के लिए दिल्ली के मुगल सम्राट जहांगीर ने राजा की उपाधि प्रदान की थी।

✔️✔️ ब्रिटिश राज्य के समय झाबुआ रियासत मध्य भारत का हिस्सा हुआ करती थी। सन 1927 में इसे मालवा एजेंसी का हिस्सा बनाया गया था ।

✔️✔️ सन 1947 में भारत की आजादी के बाद 15 जून सन 1948 को भारतीय संघ में का प्रवेश किया और झाबुआ नवनिर्मित भारत राज्य का हिस्सा बना।

✔️✔️ सन 1956 में मध्य प्रदेश में झाबुआ रियासत को मिला लिया गया तब से झाबुआ मध्य प्रदेश का हिस्सा बना हुआ है।

☑️ झाबुआ रियासत पर किन किन राजाओं ने राज किया

झाबुआ राज्य के पहले राजा केशव दास जी सन 1584 से 1607 के मध्य यहां के राजा बने रहे। उनके पश्चात दूसरे राजा करन सिंह जी सन 1607 से 1610 तक बने रहे। उसके बाद मान सिंह जी सन 1610 से 1677 तक यहां के राजा बने रहे । सन 1677 से 1723 में विशाल जी के नेतृत्व में झाबुआ रियासत का कार्यभार संभाला।  इस प्रकार से झाबुआ रियासत के अनेक राजा बने। झाबुआ राज्य के अंतिम शासक के रूप में 1942 से 1947 के मध्य भाग सिंह जी ने यहां का कार्यभार संभाला और धार्मिक सिंह जी ने अपने रियासत को भारतीय संघ में मिलाने के लिए हस्ताक्षर किए थे।

✔️✔️ सन 1857 की देशव्यापी क्रांति में झाबुआ रियासत और झाबुआ रियासत की जनता ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और महत्वपूर्ण योगदान दिया।

✔️✔️ सन 1857 से  1947 के मध्य प्रदेश और भारत में जितनी भी क्रांतिकारी गतिविधियां हुई उसमें इस रियासत ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया बल्कि अपनी शौर्यता का परिचय देते हुए अपने प्राणों का बलिदान भी भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया।

✔️✔️ झाबुआ नगर की कला संस्कृति और इस नगर के गौरवशाली इतिहास पर मालवा क्षेत्र के लोगों को गर्व है।

 झाबुआ रियासत पर किन किन राजाओं ने राज किया
झाबुआ रियासत पर किन किन राजाओं ने राज किया

➡️ भगोरिया मेला झाबुआ

भील जनजाति का प्रसिद्ध भगोरिया मेला झाबुआ जिले में आयोजित होता है । मध्य प्रदेश में रेल रिपेयरिंग झाबुआ में ही है। सोनार नदी के तट पर देवझिरी का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। राज्य सरकार के द्वारा जल ग्रहण मिशन की शुरुआत झाबुआ जिले से ही की गई थी । मध्यप्रदेश में सर्वाधिक मक्के का उत्पादन झाबुआ में ही होता है। माही, कंचन यहां उगने वाली मक्के की प्रसिद्ध किस्मे है ।

भगोरिया मेला झाबुआ
भगोरिया मेला झाबुआ

✔️✔️ मुर्गे की प्रसिद्ध प्रजाति कड़कनाथ झाबुआ जिले में ही पाई जाती है । झाबुआ जिले का प्रमुख उद्योग केंद्र मेघनगर है।

✔️✔️ मध्य प्रदेश में सबसे कम अनुसूचित जाति झाबुआ में ही निवास करती है। झाबुआ जिले के अंतर्गत 5 तहसीलें और 3 विधानसभा आती है।

✔️✔️ झाबुआ में मध्य प्रदेश की सबसे ज्यादा जनजातियां पाई जाती हैं। झाबुआ में लगभग 45 प्रकार की जनजातियां पाई जाती है।

✔️✔️ विश्व की भील जनजाति से संबंधित पहली फिल्म फैसला झाबुआ में गई थी।

▶️ मोर अभ्यारण झाबुआ

मध्य प्रदेश का पहला मोर अभ्यारण झाबुआ में स्थापित किया गया है। झाबुआ एसबेस्टस के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है । झाबुआ में आदिवासी विद्यालय स्थापित किया गया है। झाबुआ जिले का क्षेत्रफल 3782 वर्ग किलोमीटर है। झाबुआ जिले में कुल जनसंख्या 1024091 निवास करती है। यह  2011 की जनगणना के अनुसार है। झाबुआ जिले का जनसंख्या घनत्व 285 प्रति वर्ग किलोमीटर है। झाबुआ जिले की साक्षरता 44.45 परसेंट है। झाबुआ जिले का लिंगानुपात 989 है।

झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल

झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल निम्न है

▶️ देवझिरी
▶️ श्री राम शरणम्
▶️ हनुमान टेकरी
➡️ मोहनकोट
➡️ देवल शिव मंदिर
➡️ मालवाई
🔲 लखमनी ग्राम
🔲 हाथी पावा पहाड़ी
🔲 भगोर

▶️ देवझिरी झाबुआ

झाबुआ से लगभग 8 किलोमीटर दूर अहमदाबाद इंदौर रोड पर सुनार नदी के किनारे देवझिरी स्थित है । यह जगह शिवाजी के प्राचीन मंदिर और एक झील यानी जल स्रोत के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक समाधि भी है। श्रवण मास में कावड़ यात्री यहां से जल भरते हैं। यहां पर महाशिवरात्रि में एक मेले का आयोजन भी होता है। देवझिरी झाबुआ जिले का एक पर्यटक स्थल माना जाता है देवझिरी में घूमने के लिए दर्शक दूर-दूर से पहुंचते हैं देवझिरी घने जंगलों के बीच प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यह स्थान हरे-भरे जंगलों के बीच होने के कारण बहुत ही खूबसूरत एवं सुंदर लगता है।

देवझिरी झाबुआ
देवझिरी झाबुआ

➡️ श्री राम शरणम्

तालाब के समीप श्री राम शरणम् का विशाल भवन झाबुआ जिले और साथ ही पूरे प्रदेश में आस्था का केंद्र बना हुआ है । यह भवन 7000 वर्ग फीट में बना हुआ है। यह तीन मंजिला भवन बहुत ही सुंदर एवं आकर्षक है। यहां की हरियाली और तालाब इस भवन की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। श्री राम शरणम्  एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। श्री राम शरणम् में भगवान श्री राम की प्रतिमा स्थापित है।

🔲 हनुमान टेकरी

झाबुआ में एक टेकरी पर हनुमान मंदिर स्थित है । जो लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर भूमि तल से लगभग 70 फीट या 80 फीट ऊंची पहाड़ी टेकरी पर स्थित है। यहां से झाबुआ शहर का अद्भुत नजारा भी देखा जा सकता है। हनुमान टेकरी झाबुआ जिले का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। हनुमान टेकरी में हनुमान मंदिर बहुत ही एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। हनुमान टेकरी घूमने के लिए दर्शक बहुत ज्यादा की संख्या में यहां पर पहुंचते हैं।

☑️ मोहनकोट

झाबुआ के पेटलावद से दक्षिण दिशा में लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर मोहनकोट गांव स्थित है यहां पर एक मंदिर है यह मंदिर छोटे खुले मैदान में है जो कि लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि यहां पर मंदिर खुले में होने पर भी यहां पर कोई चोरी नहीं होती है। मोहनकोट झाबुआ जिले का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है मोहनकोट में श्रद्धालु बहुत दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं यह मंदिर बहुत ही आकर्षक एवं दर्शनीय स्थल हैं।

मोहनकोट
मोहनकोट

🔘 भगोर

झाबुआ जिले में भगोर एक पर्यटक स्थल है। झाबुआ मध्य प्रदेश का एक पश्चिमी जिला है। झाबुआ जिला गुजरात के दाहोद, राजस्थान के बांसवाड़ा और मध्य प्रदेश के धार वह रतलाम व अलीराजपुर जिलों से घिरा हुआ है । झाबुआ बहादुर सागर झील के किनारे स्थित है। झाबुआ में भील और भिलाला व पटेलिया आदिवासी जातियां पाई जाती हैं। झाबुआ जिले को जनजातियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है।

👉 देवल शिव मंदिर

रानापुर से लगभग 12 किलोमीटर और झाबुआ से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर यह  शिव मंदिर स्थित है। आसपास के लोग इसे देवल फलिया मंदिर के नाम से जानते हैं। मंदिर पर गणेश , विष्णु व कई देवी देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं ।ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर 1100 साल पुराना है। देवल शिव मंदिर घूमने के लिए दर्शक बहुत ही ज्यादा की संख्या में यहां पर पहुंचते हैं। देवल शिव मंदिर झाबुआ जिले का प्रसिद्ध मंदिर है।

✉️ मालवाई

यह स्थान विंध्याचल की निचली पहाड़ियों के सबसे  रमणीय स्थलों में से एक माना जाता है। 11वीं शताब्दी में बना महादेव मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। यह मंदिर मालवा शैली में बना है । मंदिर में पत्थरो की शानदार मूर्तियां स्थापित हैं। यह मूर्तियां 12वीं व 13 वी सदी की है। यहां पर प्रसिद्ध चामुंडा माता का मंदिर है।

🌏 लखमनी ग्राम

यह ग्राम सूकर नदी के किनारे बसा गांव अपने जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। जिनमें सफेद संगमरमर व काली संगमरमर की आकर्षण प्रतिमा स्थापित है। झाबुआ जिला जल मिशन में प्रथम है । झाबुआ जिला  न्यूनतम एस सी जनसंख्या वाला जिला हैं। लखमनी ग्राम में बहुत से प्रसिद्ध मंदिर और पर्यटक स्थल हैं। झाबुआ जिले में लखमनी ग्राम एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है।

💟 बाबादेव समोई

बाबा देव समोई झाबुआ जिले का प्रमुख पर्यटक स्थल है। झाबुआ पर सदियों से आदिवासी राजाओं का शासन रहा है। प्रथम भील राजा कसुमर थे। कसुमर जी की पूजा यहां पर की जाती है यहां शुक भील का भी शासन रहा है। बाबा देव समोई झाबुआ जिले का देखने योग्य पर्यटक स्थल है । बाबा देव समोई में दर्शक बहुत ज्यादा की संख्या में यहां पर देखने के लिए पहुंचते हैं।

🟣 हाथी पावा पहाड़ी

हाथी पावा पहाड़ी झाबुआ जिले का प्रमुख पर्यटक स्थल है। झाबुआ जिले में 6 तहसीलें हैं जिनमें रानापुर झाबुआ रामा मेघनगर थोदला पेटलावद शामिल हैं। झाबुआ जिले से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। झाबुआ जिले में औसत वर्षा 800mm होती है। हाथी पावा पहाड़ी घने जंगलों से घिरी हुई पहाड़ी है हाथी पावा पहाड़ी को देखने में बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगती है। हाथी पाव पहाड़ी को देखने में आनंद की अनुभूति होती है । हाथी पावा पहाड़ी का क्षेत्रफल काफी बड़ा है।

हाथी पावा पहाड़ी
हाथी पावा पहाड़ी

झाबुआ जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल, इतिहास जनरल नॉलेज संबंधित FAQ’S [ Major Tourist Places of Jhabua District, History General Knowledge FAQ’S ]

1️⃣ झाबुआ जिले में कितनी तहसीलें हैं?

उत्तर- 5

2️⃣ झाबुआ जिले में कितनी विधानसभा है?

उत्तर- 3

3️⃣ देवल शिव मंदिर किस जिले में स्थित हैं?

उत्तर – झाबुआ

4️⃣ हाथी पावा पहाड़ी किस जिले में स्थित है?

उत्तर – झाबुआ

5️⃣ श्री राम शरणम् प्रसिद्ध स्थान किस जिले में स्थित है?

उत्तर- झाबुआ

6️⃣ देवझिरी किस जिले में है ?

उत्तर- झाबुआ

7️⃣ मोहनकोट किस जिले में स्थित है ?

उत्तर- झाबुआ

8️⃣ सर्वाधिक मक्के का उत्पादन मध्य प्रदेश जिले में किया जाता है?

उत्तर- झाबुआ

9️⃣ झाबुआ जिले में कितने प्रकार की जनजातियां पाई जाती हैं ?

उत्तर- 45 प्रकार की

🔟 झाबुआ जिले को किस जनजाति का घर कहा जाता है ?

उत्तर- भील जनजाति

1️⃣1️⃣ सर्वाधिक मक्के का उत्पादन किस जिले में किया जाता है?

उत्तर- झाबुआ

1️⃣2️⃣ मुर्गे की प्रसिद्ध प्रजाति कड़कनाथ किस जिले में पाई जाती है ?

उत्तर- झाबुआ

1️⃣3️⃣ झाबुआ जिले का  उद्योग केंद्र क्या है?

उत्तर- मेघनगर

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