निवाड़ी जिला | Niwari MP District Wise GK History Tourism

निवाड़ी के प्रमुख पर्यटक स्थल –

दोस्तों आज हम बात करेंगे मध्य प्रदेश के नए जिले निवाड़ी के बारे में जो कि अभी हाल ही में कुछ समय पहले टीकमगढ़ जिले से अलग हो गया है | आज हम निवाड़ी जिले के बारे में पूरी चर्चा करेंगे कैसे इस जिले को अलग किया गया है और इस जिले के अंतर्गत कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं जो कि पर्यटक स्थल के महत्व के हैं |

रामराजा मंदिर/ रामराजा सरकारAyodhya से भगवान श्री राम की मूर्ति को ओरछा में लाया गया इसके बाद रामराजा सरकार के रूप में स्थापित किया गया | 
राज महलइसे राजा महल भी कहते हैं | 
ओरछा महलजिला निवाड़ी में स्थित मध्य प्रदेश
जहांगीर पैलेसओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव ने बनवाया
शीश महलअपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है | 
राय प्रवीण महलमहाराज इंद्रजीत की पत्नी के राय प्रवीण की याद में बना महल
लक्ष्मी नारायण मंदिर1622 ईस्वी में निर्मित
चतुर्भुज मंदिर1558 से 1573 के बीच राजा मधुकर शाह के शासन काल में निर्मित
सुंदर महलबुंदेला राजा जुझार सिंह के पुत्र  धुरभजन की प्रेम कहानी से संबंधित
ओरछा का किलासोलवीं सदी में निर्मित

1. निवाड़ी का प्रमुख दर्शनीय स्थल ओरछा–

1 अक्टूबर 2018 से पहले निवाड़ी टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत ही आता था और ओरछा की महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल भी टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आते थे | निवाड़ी जिला टीकमगढ़ जिले से अलग होने के कारण टीकमगढ़ का कुछ ऐसा निवाड़ी जिले में आ गया है | ओरछा शहर निवाड़ी जिले में शामिल होने के कारण ओरछा के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल निवाड़ी जिले के अंतर्गत आते हैं |

ओरछा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य-

दोस्तों ओरछा मध्य प्रदेश राज्य का एक ऐसा शहर है जहां पर ऐतिहासिक काल की बहुत सी ऐसी कथाएं और वहां की कलाओं को देखने के बाद कोई भी भावुक हो सकता है | ओरछा प्रमुख रूप से बुंदेला राजकुमार हरदौल की जहर पीने के कारण पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है  | बुंदेला राजकुमार हरदोल ने यह जहर अपनी भाभी की पवित्रता को कायम रखने के लिए और अपने भैया के वचनों का पालन करने के लिए खाया था | ओरछा से जुड़े बहुत ऐसे किस्से हैं जिनके बारे में यदि जानने की कोशिश की जाए तो उन किस्सों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है |

ओरछा के महाराज रूद्र प्रताप सिंह से जुड़े बहुत से ऐसे कहते हैं जिनके बारे में जानकर लोगों को विश्वास ही नहीं होता लेकिन जब ओरछा शहर में भ्रमण किया जाता है तब वहां पर देखे जाने वाले साक्ष्य पर  जरूर लोग विश्वास कर लेते हैं |

2. ओरछा का किला-

ओरछा का किला बहुत ही पुराना और ऐतिहासिक है 16वी सदी में यहां के राजा रूद्र प्रताप सिंह ने इसके लिए को बनवाया था | दोस्तों आज से हजारों वर्ष पहले जिस तरीके से किले निर्मित किए गए उसके बाद आज तक ऐसी नक्काशी कहीं देखने को मिली ही नहीं|
दोस्तों ओरछा का किला बहुत ही पुराना और ऐतिहासिक होने के कारण पर्यटकों का केंद्र बन चुका है | 

ओरछा का किला- Niwari MP

3. जहांगीर महल –

जहांगीर महल का निर्माण वीर सिंह जूदेव ने ही करवाया था | दोस्तों जहांगीर महल के बारे में बहुत से किस्से सुनने को मिलते हैं जिनमें प्रमुख रूप से कहा जाता है जहांगीर के ओरछा आगमन के उपलक्ष में इस महल का निर्माण किया गया था | इतिहास काल के दौरान कई किस्से ऐसे सुनने को मिलते हैं जिनमें जब एक राजा किसी दूसरे राजा को अपने राज्य में बुलाता है तब उस राजा के स्वागत में कोई ना कोई आश्चर्यजनक वाली चीज को उस राजा के सामने पेश करता है | जहांगीर महल के साथ भी कुछ ऐसा ही किस्सा जुड़ा हुआ है |
जहांगीर महल के निर्माण में ईट, पत्थरका इस्तेमाल किया गया है जो कि वर्तमान में आज भी वैसा का वैसा मौजूद और एकदम मजबूत मिलता है | दोस्तों जहांगीर महल बहुत पुराना और ऐतिहासिक होने के कारण यहां पर पर्यटक अक्सर इसे देखने के लिए आते हैं | जहांगीर महल की बनावट एकदम सुंदर और खूबसूरत है जिनके दरवाजे की नक्काशी एकदम विदेशी तर्ज पर की गई है |

4. सावन भादो का महल-

सावन भादो महल का निर्माण वीर सिंह जूदेव ने अपने शासनकाल के दौरान बड़ी ही सूज- बूझ और उत्कृष्ट कलाकृति के माध्यम से करवाया | सावन भादो महल जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग ही जान पाते हैं क्योंकि इस प्रकार के महल का किसी भी प्रकार से कहीं से भी लोगों को पता नहीं चल पाता | लोगों से अनजान होने के कारण सावन भादो महल तक लोग बहुत कम ही जा पाते हैं लेकिन जिसको इस महल के बारे में जानकारी लगती है वह एक बार इस महल को देखने जरूर जाता है |

5. ओरछा का राम मंदिर-

ओरछा के राम मंदिर का निर्माण 1554 से 1591 के दौरान राजा मधुकर सिंह ने अपने शासनकाल में करवाया था | ओरछा के राम मंदिर में भगवान श्री राम की प्रतिमा विराजमान है और यह प्रतिमा इतनी सुंदर और आकर्षक लगती है जैसे भगवान श्री राम यहां पर निवास कर रहे हैं | यहां के स्थानीय लोगों ने मंदिर की स्थापना के तुरंत बाद ही भगवान श्रीराम को अपना राजा मानकर रामराजा सरकार के रूप में उन्हें स्वीकार किया | रामराजा सरकार के बारे में कहा जाता है कि भगवान श्रीराम को अयोध्या से ओरछा लाया गया था |

रामराजा सरकार के बारे में कहा जाता है कि जब ओरछा में बुंदेला शासक मधुकर शाह का शासन था तब उनकी पत्नी कुंवरि गणेश अयोध्या से भगवान श्री राम की मूर्ति को रामलला सरकार के रूप मे ओरछा लाई थी |

6. ओरछा का राज महल-

ओरछा के राजा और रानियों ने 1783 की समय में ओरछा के राज महल में निवास किया था हालांकि इस महल का निर्माण सोलवीं सदी में ही शुरू हो चुका था | ओरछा के राज महल जिसे राजा महल भी कहा जाता है इसके अंदर देवी देवताओं की मूर्तियों को भी स्थापित किया गया और इस महल के अंदर बहुत से धार्मिक छोटे-छोटे मंदिर मौजूद हैं | पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु की एक महल में प्राचीन काल से ही पूजा होती आ रही थी और ठीक वैसा ही आगे होता रहा | वर्तमान में इस महल का भ्रमण करने से पता चलता है कि भगवान विष्णु की मूर्ति के कुछ साक्ष्य देखने के बाद लोग भगवान विष्णु के बारे में पूर्ण रुप से विश्वास कर लेते हैं |

इस महल की नक्काशी कुछ इस तरीके से बनाई गई ताकि महल के अलग-अलग कमरों का तापमान अलग-अलग हो सके | महल की खिड़कियों और दरवाजों में कुछ ऐसे कांच का प्रयोग किया गया ताकि कमरों को समय पर गर्म किया जा सके | दोस्तों इतिहास के अनुसार कहा जाता है कि राज महल राजा का ऐसा महल होता था ,जहां पर दुश्मनों के द्वारा यदि आकस्मिक आक्रमण हो जाए तब कोई ना कोई ऐसा रास्ता जरूर बनाया जाता था जिससे रानियों और महल में उपस्थित लोगों को आसानी से महल के बाहर किया | राजमहल में कोई ना कोई एक ऐसा गुप्त दरवाजा होता था जहां से रानियों को संकट के समय में बचने का मौका मिल सके |

ओरछा का राजमहल पर्यटकों के लिए एक ऐसा उदाहरण है जिसे देखने के बाद ओरछा के इतिहास के बारे में बड़ी आसानी के साथ समझा जा सकता है | ओरछा का भ्रमण करने के साथ लोग राजमहल तो घूमते ही हैं साथ ही यदि लोगों को शीश महल के बारे में थोड़ा सा भी पता चलता है तो शीशमहल जाना कभी नहीं भूलते |

ओरछा का राज महल- Niwari

7. शीश महल–

दोस्तों जैसा कि एक का नाम है ठीक वैसे ही किस महल की सुविधाओं में अंतर देखा जा सकता है | राज महल से कहीं ज्यादा शीश महल में रानियों के लिए सुविधा उपलब्ध रहती थी | वर्तमान की जानकारी के अनुसार शीश महल एक होटल के रूप में पूरी तरीके से बदल चुका है अर्थात शीश महल आवास युक्त महल हो चुका है | शीश महल देखने में बहुत ही आकर्षक और सुंदर लगता है जिस कारण से यहां पर विदेशी लोग ज्यादातर ठहरने के बारे में सोचते हैं | कोई भी पर्यटक यदि ओरछा का भ्रमण करता है तो एक बार शीश महल के बारे में जरूर सोचता है क्योंकि यह महल बहुत ही सुंदर और खूबसूरत लगता है | दोस्तों शीश महल कोई बहुत बड़ा  नहीं है लेकिन यह महल बहुत ही खूबसूरत है | यह महल छोटा है लेकिन लोगों को बहुत ज्यादा आकर्षित करता है |

8. राय प्रवीण महल-

दोस्तों राय प्रवीण की कहानी बहुत ही रोचक और भावुक कर देने वाली कहानी है दरअसल राजा इंद्रजीत राय प्रवीण से बहुत प्रेम करते थे | राय प्रवीण भी राजा हिंदू जी से सच्चा प्रेम करती थी और राय प्रवीण अपने समय की जानी-मानी रानियों में से एक थी इनकी सुंदरता के चर्चे पूरे भारत में जाने जाते थे | दोस्तों उस समय अकबर का शासन था जब अकबर को राय प्रवीण की सुंदरता के बारे में पता चला तो अकबर ने अपनी सेना को राय प्रवीण को दिल्ली लाने का आदेश दे दिया | अकबर के सेनापति और उनकी सेना राय प्रवीण को दिल्ली ले गई लेकिन राय प्रवीण के सच्चे प्रेम को इंद्रजीत के प्रति देखकर अकबर ने राय प्रवीण को वापस ओरछा भेज दिया |

राजा इंद्रजीत की प्रेमिका राय प्रवीण एक सुंदर गाय का और कवयित्री थी | राजा इंद्रजीत ने राय प्रवीण की याद में ही राय प्रवीण महल का निर्माण करवाया था |  महल के साथ-साथ राजा इंद्रजीत ने फूल बाग का भी निर्माण करवाया था जो कि उस समय से चलते चलते आज भी ओरछा में फूलबाग और राय प्रवीण महल मौजूद है| राय प्रवीण महल की सुंदरता ठीक उसी प्रकार है जिस तरीके से राय प्रवीण उस समय की रानियों में सबसे खूबसूरत थी | फूल बाग ओरछा का सबसे समृद्ध और जाना जाने वाला बाग है जिसे ओरछा जाने के बाद हर एक व्यक्ति के मन में देखने की इच्छा होती है |

9. ओरछा का लक्ष्मी नारायण मंदिर-

ओरछा का लक्ष्मी नारायण मंदिर सन 1622 ईसवी में वीर सिंह जूदेव ने बनवाया था | यह मंदिर ओरछा के पश्चिम में एक पहाड़ी पर निर्मित किया गया | यह मंदिर पहाड़ी पर होने के कारण बहुत ही आकर्षक और देखने में खूबसूरत लगता है | इस मंदिर में सोलवीं सदी और 17वीं सदी के समय के बहुत ही खूबसूरत और रंगीन चित्र आज भी दिखाई देते हैं | लक्ष्मी नारायण मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का चरित्र चित्रण किया गया है जहां पर आप उनकी लीलाओं को चित्रों के माध्यम से बड़ी आसानी से समझ सकते हैं| मंदिर में बने यह चित्र ऐसा लगता है जैसे जीवंत उदाहरण हो | इस मंदिर में महारानी लक्ष्मीबाई की जीवन कथा को बड़ी आसानी के साथ आप समझ सकते हैं क्योंकि उनके द्वारा लड़ी गई लड़ाई के चरित्र चित्रण आपको इस मंदिर में देखने को मिलेंगे |

10. चतुर्भुज मंदिर-

1558 से 1573 के समय राजा मधुकर शाह का शासन रहा है और उन्हीं के द्वारा ही चतुर्भुज मंदिर का निर्माण किया गया | यह मंदिर यूरोप की कैथेड्रल की तर्ज पर बना हुआ मंदिर है जिसकी नक्काशी अन्य मंदिरों की तुलना में पूरी तरीके से अलग है | चतुर्भुज मंदिर को देखने के बाद एक अलग ही इतिहास देखने को मिलता है इसके बारे में जितना सोचा जाए उससे कहीं ज्यादा निकलता है | दोस्तों चतुर्भुज मंदिर के अंदर बहुत बड़ा प्रांगण है जहां पर प्रार्थना करने के लिए कृष्ण भक्तों की भीड़ जमी रहती है | चतुर्भुज मंदिर ओरछा का एकमात्र एक ऐसा आकर्षण मंदिर है जिसे देखने के बाद लोग हक्के बक्के रह जाते हैं | दोस्तों पर्यटकों के लिए यह मंदिर बहुत ही आकर्षक और घूमने योग्य मंदिर है |

चतुर्भुज मंदिर

11. सुंदर महल-

सुंदर महल का इतिहास बहुत ही रोचक और आनंदित कर देने वाला इतिहास है | सुंदर महल का निर्माण बुंदेला शासक जुझार सिंह के पुत्र के द्वारा करवाया गया था | सुंदर महल का निर्माण जुझार सिंह के पुत्र की प्रेम कहानी के उपलक्ष में बनवाया गया था हालांकि इस महल का निर्माण जुझार सिंह के पुत्र ने ही करवाया था | जुझार सिंह के पुत्र को एक मुस्लिम लड़की से प्रेम था और एक मुस्लिम लड़की से जुझार सिंह के पुत्र ने विवाह भी किया था विवाह करने के उपरांत मुस्लिम धर्म को भी जुझार सिंह के पुत्र धुरभजन ने अंगीकृत किया था | जुझार सिंह के पुत्र ने धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन को त्याग दिया और उस सुंदर महल को भी त्याग दिया | धुरभजन पूरी तरीके से भक्ति में लीन हो चुके थे उनकी मृत्यु के बाद उनको संत के रूप में जाना गया था | यह महल प्रेम कहानियों से जुड़ा हुआ है जिस कारण से यहां पर पर्यटक अक्सर घूमने आते हैं क्योंकि पर्यटक ओं को प्रेम कहानियां बड़ी सुंदर और रोचक लगती है जिनमें जो प्रेम कहानियां इतिहास से जुड़ी उनके बारे में लोग जरूर जानने की कोशिश करते हैं |

निवाड़ी जिला | Niwari District Wise GK History Tourism FAQ’s

प्रश्न- 1 .जहांगीर महल कहां पर है?

जहांगीर महल मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले टीकमगढ़ से अलग होने वाले निवाड़ी के अंतर्गत आता है |

प्रश्न -2.निवाड़ी किस जिले से अलग हो गया है?

निवाड़ी -1. अक्टूबर 2018 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से अलग हो गया है |

प्रश्न- 3 .ओरछा महल कहां पर है?

ओरछा महल वर्तमान में टीकमगढ़ जिले से अलग होने वाली निवाड़ी जिले के अंतर्गत आता है | 1 अक्टूबर 2018 से पहले ओरछा महल टीकमगढ़ जिले का हिस्सा हुआ करता था |

प्रश्न- 4. जहांगीर महल किसने बनवाया?

जहांगीर महल वीर सिंह जूदेव ने अपने शासनकाल के दौरान बनवाया था ?

प्रश्न -5 .जहांगीर महल क्यों बनवाया गया था?

जहांगीर महल जहांगीर के आगमन पर राजा वीर सिंह जू देव के द्वारा जहांगीर के स्वागत के लिए बनवाया गया था |

प्रश्न- 6.ओरछा किस नदी के किनारे स्थित है?

ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की अंतर्गत आता है जोकि निवाड़ी में बहने वाली बेतवा नदी के तट पर स्थित है |

प्रश्न- 7 .ओरछा का किला कब बनवाया गया था ?

ओरछा का किला 16वीं सदी की समय बनवाया गया था|

प्रश्न -8 .ओरछा का किला निवाड़ी से कितने दूर स्थित है?

ओरछा का किला मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जबकि उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

प्रश्न- 9 .राजा महल कहां पर स्थित है?

राजा महल मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के अंतर्गत आने वाले ओरछा क्षेत्र के अंतर्गत आता है जिसे राजमहल भी कहा जाता है|

प्रश्न- 10 .शीश महल कहां पर स्थित है?

शीश महल निवाड़ी जिले की ओरछा में स्थित है |

प्रश्न -11. शीश महल का निर्माण किसने करवाया?

ओरछा बहुत ही पुराना और ऐतिहासिक शहर रह चुका है यहां पर तरह-तरह के राजाओं ने अपना शासन किया हुआ है |

राजा उदैत सिंह के शासनकाल में शीश महल का निर्माण किया गया जो कि वर्तमान में शाही आवास के रूप में जाना जाता है |

ओरछा का आवागमन –

#1 सड़क मार्ग के द्वारा ओरछा नेशनल हाईवे के माध्यम से भी आप ओरछा जा सकते हैं |

#2 ओरछा रेलवे स्टेशन भी वर्तमान में मौजूद है जिसकी सहायता से इंदौर ,भोपाल ,दिल्ली ,छतरपुर ,खजुराहो आदि सभी जगह से ट्रेनें मौजूद हैं |

#3 Orchha के लिए वायुयान मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है ओरछा से करीब लगभग 165 किलोमीटर दूर खजुराहो हवाई अड्डा मौजूद है जिसकी सहायता से आप किसी भी दूरी को बड़ी आसानी के साथ तय करके ओरछा पहुंच सकते हैं |

प्रश्न– ओरछा किसलिए प्रसिद्ध है?

ओरछा इतिहास काल का एक ऐसा केंद्र रहा है जहां पर समय-समय पर कई राजाओं ने शासन किया परंतु यहां पर मूल रूप से बुंदेला राजाओं का सबसे अधिक समय के लिए शासन रहा है | बुंदेला राजाओं की धरती और था पर कई बार मुगलों ने अपना शासन जमाने की कोशिश की परंतु मुगल बुंदेला राजाओं के सामने कमजोर पड़ गए |

ओरछा से जुड़े कई ऐसे महत्वपूर्ण किससे हैं जिनके बारे में जानकारी बहुत ही गर्व महसूस होता है क्योंकि यहां पर एक बार एक रानी को अपनी पवित्रता का प्रमाण देने के लिए अपने ही देवर को भोजन के रूप में जहर दे दिया था जिस कारण से उसकी देवर की मृत्यु हो चुकी थी | दोस्तों यह कहानी मुगल काल के दौरान बुंदेला राजा जुझार सिंह की समय की है जब ओरछा पर राजा जुझार सिंह का शासन था | राजा जुझार सिंह दो भाई थे जिनमें से बड़े भाई का नाम जुझार सिंह था जिसका और था पर शासन था राजा जुझार सिंह बुंदेला समुदाय से आते थे | राजा जुझार सिंह के छोटे भाई का नाम हरदौल का जिनको भोजन के बारे में और जहर के बारे में सब कुछ मालूम होते हुए भी भोजन को ग्रहण कर लिया और स्वर्ग सिधार गए | हरदौल की मृत्यु ओरछा राज्य के चुगलों के द्वारा Raja सिंह के कान भरने के कारण हुई थी |

↪️ मध्यप्रदेश का 52 वां जिला कौन सा है?

मध्यप्रदेश का 52 वां  जिला निवाड़ी जिला है |

↪️ निवाड़ी जिले के अंतर्गत कितनी तहसील है आती हैं?

निवाड़ी जिले में कुल 3 तहसीलें आते हैं जिनमें निवाड़ी पृथ्वीपुर और ओरछा प्रमुख हैं ओरछा यहां की प्रमुख तहसील   है |

↪️ निवाड़ी जिले में कौन-कौन सी जनपद पंचायत हैं?

निवाड़ी जिले में कुल 2 जनपद पंचायत हैं जिनमें निवाड़ी और पृथ्वीपुर प्रमुख हैं |

↪️ निवाड़ी जिले का कुल क्षेत्रफल कितना है?

निवाड़ी जिले का कुल क्षेत्रफल 1318 वर्ग किलोमीटर है|

➤ निवाड़ी जिले की कुल जनसंख्या कितनी है?

2018 के अनुसार निवाड़ी जिले की कुल जनसंख्या 401000 थी|

➤ रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश में कहां पर स्थित है?

रामराजा सरकार मंदिर निवाड़ी जिले की ओर से तहसील के अंतर्गत आता है निवाड़ी जिले की स्थापना से पहले यह मंदिर टीकमगढ़ जिले में आता था  |

➤ निवाड़ी जिला किस संभाग में आता है ?

निवाड़ी जिला सागर संभाग के अंतर्गत आता है|

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