सीहोर जिला | Sehore District Wise GK History Tourism

सीहोर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल-

दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाले प्रमुख पर्यटक स्थल जो कि राष्ट्रीय महत्व के हैं और जिनका ऐतिहासिक महत्व है | सीहोर जिले में बहुत सी ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं जिनकी नक्काशी और कलाकृति बहुत ही उत्कृष्ट है जिस कारण से यहां पर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती | सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाले सिद्ध गणेश मंदिर, कुंवर चैन सिंह, गिन्नौरगढ़ का किला और सारो- मारो अभिलेख सीहोर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल हैं | इन पर्यटक स्थलों के अलावा सीहोर जिले में बहुत सी नदियां हैं जिस कारण से यहां की प्राकृतिक सुंदरता बहुत ही खूबसूरत है |

सिद्ध गणेश मंदिरउज्जैन के राजा विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान निर्मित |
सारो मारो अभिलेख-सम्राट अशोक और भगवान बुद्ध के अवशेष तथा इनके द्वारा की गई यात्राओं के बारे में पता चलता है|
माता विंध्यवासिनी मंदिरसलकनपुर के अंतर्गत आता है जिसे माता बिजासन देवी के मंदिर के रूप में भी जाना जाता है | 
ऑल सेंट्स चर्चस्कॉटलैंड के समान चर्च  सन 1831 में निर्मित 
मध्य प्रदेश का मंगल पांडेकुंवर चैन सिंह 
सलकनपुर का मेलाजिला सीहोर 
गिन्नौरगढ़ का किलातोतों के लिए प्रसिद्ध है |
नरसिंहपुर का युवराजस्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर चैन सिंह 
पार्वती नदीजिला सीहोर 
कोलार जलाशय कोलार नदी पर निर्मित  जिला सीहोर

सीहोर जिले से जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्य –

#दोस्तों सीहोर जिले का पुराना नाम सिद्धपुर भी माना जाता है और यह जिला मध्यप्रदेश के भोपाल संभाग के अंतर्गत आता है |

# सीहोर जिले के अंतर्गत राजा विक्रमादित्य से जुड़ी बहुत ही कहानियां मिलती हैं |

# मध्य प्रदेश का सीहोर जिला अपने लिंग अनुपात के लिए भी जाना जाता है क्योंकि यहां का लिंग अनुपात 918/ 1000 है|

# सीहोर जिले की आष्टा तहसील सबसे चर्चित तहसील है |

1. सिद्ध गणेश मंदिर–

सीहोर जिले के भीतर सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाले पर्यटक स्थलों में से एक है | सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर जिले के सभी मंदिरों में प्रमुख मंदिर है | सीहोर जिले से पश्चिम दिशा की ओर लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है| पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि सिद्ध गणेश मंदिर उज्जैन के महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल का है| इस मंदिर का पुनः निर्माण बाजीराव पेशवा के द्वारा किया गया है | मराठा की बाजीराव पेशवा ने इस मंदिर को नवनिर्मित कराके इसकी शोभा को और अधिक बढ़ा दिया है |

सीहोर जिले में गणेश चतुर्थी के समय भगवान श्री गणेश के चतुर्थी त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और यह त्यौहार सिद्धि गणेश मंदिर पर आयोजित किया जाता है | इस मंदिर पर गणेश चतुर्थी के समय सीहोर जिले के अलावा दूर-दूर से पर्यटक यहां मनाए जाने वाले त्यौहार को देखने के लिए आते हैं | यह मंदिर देखने में बहुत खूबसूरत और आकर्षक लगता है | सीहोर जिले के गणेश मंदिर पर सबसे ज्यादा भीड़ प्रति सप्ताह है प्रत्येक बुधवार को होती है | इसके अलावा यहां पर अन्य 6 दिनों तक बहुत कम मात्रा में भीड़ देखने को मिलती है | सिद्ध गणेश मंदिर का इतिहास और इसकी प्राचीनता को देखने के लिए यहां पर अक्सर पर्यटक आते रहते हैं| दोस्तों यदि कोई सीहोर का भ्रमण करता है और सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाले पर्यटकों के बारे में सोचता है तो 1 वर्ष गणेश मंदिर के बारे में जरूर सोचता है |

2. सारो मारो अभिलेख-

सारो मारो अभिलेख में भगवान बुद्ध के विचार और उनके द्वारा की गई संगीतियों का पता चलता है | सारो मारो अभिलेख सीहोर जिले की बुधनी तहसील के अंतर्गत आने वाले पान गडरिया गांव में पड़ता है | यह अभिलेख सांची से करीब 119 किलोमीटर के आस पास पड़ता है | ऐसे स्थल के बारे में जान कर पता चलता है कि भगवान बुद्ध के भिक्षुओं और भगवान बुद्ध के स्तूपो का कोई विशेष पुराना स्थान है | इन गुफाओं में कई ऐसे चित्र अंकित किए गए हैं जिनको देखकर भगवान बुद्ध की संगीतियां का पता लगाया जा सकता है और उनके भिक्षुओं के बारे में पता चलता है |

इन गुफाओं के अंतर्गत सम्राट अशोक के शिलालेखों को भी देखा गया है दिन के माध्यम से सम्राट अशोक के शासन के बारे में पता चलता है | इन शिलालेखों के माध्यम से सम्राट अशोक की धर्म नीति और उनके द्वारा किए गए धर्म प्रचार आदि जानकारी को पता लगाया जा सकता है | इन शिलालेखों में एक शिलालेख सम्राट अशोक के पुत्र का भी देखने को मिलता है जिसमें सम्राट अशोक के धर्म प्रचार की जानकारी मिलती है तथा सम्राट अशोक के पुत्र के द्वारा किन-किन यात्राओं को किया गया है उनकी जानकारी मिलती है |

सम्राट अशोक की यात्रा के दौरान जब सम्राट अशोक का कुछ समय के लिए निवास विदिशा में रहा तब उस समय के दौरान उनकी यात्रा की जानकारी इन्हीं शिलालेखों से मिलती है | इन शिलालेखों की चित्रकला को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर भी सम्राट अशोक ने विदिशा निवास के दौरान यात्रा की थी |

बुधनी तहसील के अंतर्गत आने वाला है यह शिलालेख पर्यटन का एक ऐसा केंद्र बन गया है जहां पर प्रतिवर्ष हजारों लोग इस शिलालेख  का भ्रमण करते हैं |

3. माता विंध्यवासिनी मंदिर –

Sehore जिले के अंतर्गत आने वाला माता विंध्यवासिनी का मंदिर एक प्रमुख मंदिर है यहां पर प्रतिवर्ष नवरात्रि के अवसर पर माता विंध्यवासिनी की कृपा पाने के लिए हजारों की संख्या में लोग माता विंध्यवासिनी के दर्शन करने के लिए आते हैं | सीहोर जिले की रहती तहसील के अंतर्गत आने वाले सलकनपुर गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है | ऊंचाई पर होने के कारण यह मंदिर देखने में बहुत सुंदर लगता है और एक मनोरम दृश्य वाला मंदिर है | भोपाल जिले से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इस मंदिर में विराजमान माता विंध्यवासिनी को बीजासेन देवी के रूप में भी जाना जाता है |

वर्तमान में सलकनपुर ट्रस्ट के द्वारा इस मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था की जाती है और अभी हाल ही में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है| माता विंध्यवासिनी की इस पवित्र मंदिर के स्थल पर नवरात्रि के दौरान यहां पर बहुत ही सुंदर और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें दूरदराज से आए लोग मेले का आनंद उठाते हैं | इस मंदिर में करीब 1000 से भी अधिक सीढ़ियां मौजूद हैं और ऊंचाई पर होने के कारण यहां पर रोपवे की भी व्यवस्था की गई है |

4. सीहोर का प्रसिद्ध ऑल सेंट्स चर्च-

1831 के दौरान ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट के द्वारा इस चर्च का निर्माण किया गया है जो कि सीहोर जिले का प्रसिद्ध चर्च है| यह चर्च ब्रिटिश काल का होने के कारण और ऐतिहासिक होने के कारण यहां पर पर्यटक अक्सर इसकी कलाकृति को देखने के लिए आते हैं | सीहोर जिले का प्रसिद्ध है यह चर्च स्कॉटलैंड में निर्मित चर्च की बिल्कुल कॉपी है जिस तरीके से स्कॉटलैंड में चर्च दिखाई देता है ठीक वैसे ही सीहोर के चर्च को भी आप देख सकते हैं | Sehore जिले के प्रसिद्ध ऑल सेंट्स चर्च को देखने के लिए और यहां पर पर्यटन का आनंद लेने के लिए वर्ष का शरद ऋतु का मौसम सबसे उपयुक्त और अच्छा रहता है | इस मौसम में यहां पर सबसे अधिक पर्यटक घूमने के लिए आते हैं और सीहोर जिले के सभी पर्यटकों का आनंद लेते हैं |

इस मंदिर का डिज़ाइन बांस के पेड़ों के द्वारा और यहां पर मूल रूप से मूल हरियाली की सहायता से इसका डिजाइन किया गया है जिस कारण से यह बहुत प्रसिद्ध है | दोस्तों जैसा कि मैंने बताया आपको इसके अलावा ऐसा चर्च आसपास के शहरों में कहीं पर देखने को नहीं मिलता है बल्कि इसी के जैसा एक चर्च के स्कॉटलैंड में बना हुआ है जो कि इसके पहले का चर्च है |

सीहोर का प्रसिद्ध ऑल सेंट्स चर्च-

5. कुंवर चैन सिंह समाधि स्थल –

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कुंवर  चैन सिंह जीने का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम  से जुड़ा हुआ है | प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर चैन सिंह जी समाधि स्थल Sehore जिले में बहने वाली लोटिया नदी के किनारे स्थित है | सन 1824 के समय “नरसिंहपुर का युवराज” कहे जाने वाले चैन सिंह अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत कर चुके थी | कुंवर चैन सिंह और ब्रिटिश अधिकारियों के बीच घमासान युद्ध के बाद चैन सिंह इसी स्थान पर शहीद हुए थे जिस कारण से इस स्थान का नाम कुंवर चैन सिंह समाधि स्थल पड़ गया और इसी स्थान पर कुंवर चैन सिंह की समाधि भी स्थित है |

कुंवर चैन सिंह की ब्रिटिश अधिकारी मैड हॉक से लंबी लड़ाई के बाद कुंवर चैन सिंह आखिरी में शहीद हो गए | पर यह युद्ध जहाँ हुआ था उसे “दशहरा का मैदान” कहा जाता है | कुंवर चैन सिंह जुड़े ऐसे स्थल के बारे में शायद ही कोई व्यक्ति जानता होगा लगभग बहुत कम लोगों को इनके बारे में पता होता है जिस कारण से यहां पर बहुत कम लोग ही जा पाते हैं | जैसे ही कुंवर चैन सिंह की समाधि के बारे में और इनके शौर्य के बारे में किसी को पता चलता है तो वह इस समाधि स्थल पर जाने से कभी नहीं भूलता | इस समाधि स्थल के द्वारा कुंवर चैन सिंह के जीवन के मूल पलों को याद किया जा सकता है और उनके द्वारा  उनके दिए गए इस  बलिदान को याद किया जा सकता है |

कुंवर चैन सिंह से संबंधित यहां पर एक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है जो कि वर्ष के प्रत्येक के जुलाई के महीने में किया जाता है | इस आयोजन में कुंवर चैन सिंह के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर के रूप में पुरस्कृत किया जाता है |

✔️24 जुलाई को प्रतिवर्ष इनकी पुण्यतिथि के अवसर पर ‘एकता दिवस ‘के रूप में मनाया जाता है |

6. सलकनपुर का मेला-

माता बीजासेन देवी के मंदिर के ठीक पास ही सलकनपुर मेले का आयोजन किया जाता है यहां पर प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग इस मेले में भाग लेते हैं |  सलकनपुर में विराजमान बीजासेन देवी को माता विंध्यवासिनी के नाम से भी जाना जाता है |

5. गिन्नौरगढ़ का किला-

सीहोर जिले का प्रसिद्ध है गिन्नौरगढ़ का किला पर्यटन का प्रमुख केंद्र है जहां पर सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा लोग इस किले को देखने के लिए आते हैं | यह किला लगभग 800 मीटर ऊंची एक पहाड़ी पर स्थित है ऊंचाई पर होने के कारण इस किले का नजारा दूर से बहुत खूबसूरत लगता है |

गिन्नौरगढ़ का किला तोतों के लिए प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है यहां पर इस किले के अंदर आप युद्ध की सामग्रियों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि उस समय युद्ध के समय कितने बड़े बड़े और खतरनाक घातक हथियारों का प्रयोग किया जाता था | दोस्तों किले के अंदर बहुत ही पुरानी पत्थर की बनाई गई उत्कृष्ट कलाकृति से निर्मित मूर्तियां आज भी मौजूद हैं जिनको देखने के लिए पर्यटक बहुत दूर-दूर से आते हैं |

वर्तमान में यह किला खंडहर अवस्था में मौजूद है जिस कारण से इसके लिए की दुर्दशा बहुत ही खराब हो रही है |

6. कोलार जलाशय –

सीहोर जिले में बहने वाली कोलार नदी की उत्पत्ति सीहोर जिले से ही होती है | कोलार नदी की सहायता से यहां पर निवास पर सभी लोगों को इस नदी के द्वारा प्रदान किए जाने वाले जलते जीवन यापन होता है |

इस नदी का पानी खेती के लिए भी प्रयुक्त होता है जिससे यहां की खेती बहुत अच्छी तरीके से हो जाती है | कोलार नदी के द्वारा यहां पर एक कोलार जलाशय परियोजना को शुरू किया गया है जिसका लाभ संपूर्ण सीहोर जिले को मिलता है |

 कोलार जलाशय - Sehore

7.  गुप्त काल के अवशेष-

सीहोर जिले के निन्नौर गांव मे गुप्त काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं | यहां पर मौजूद शिलालेखों से पता चलता है कि गुप्त काल के समय के लोगों ने भी यहां पर निवास किया है और कहीं ना कहीं से गुप्त काल भी सीहोर जिले से संबंधित है |

8. पार्वती नदी –

दोस्तों मध्य प्रदेश की अनजान पार्वती नदी जिसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा परंतु ,यह नदी बहुत ही सुंदर और स्वच्छ जल से बहने वाली नदी है | यह नदी मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा तहसील से कुछ ही दूरी के पास से होकर बहती है | किस नदी के किनारे बहुत सुंदर- सुंदर पौधे मौजूद हैं जिस कारण से इस नदी की सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है | किस नदी में कोई भी बड़ी आसानी के साथ स्नान कर सकता है परंतु नदी के किसी- किसी हिस्से में बहुत गहरा पानी है |

पार्वती नदी Sehore

9. मध्य प्रदेश का मंगल पांडे-

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और नरसिंहपुर के युवराज के रूप में जाने जाने वाले कुंवर चैन सिंह जी को मध्यप्रदेश का” मंगल पांडे” भी कहा जाता है | कुंवर चैन सिंह को मध्य प्रदेश का मंगल पांडे इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका स्वर और इनके जीवन गाथा की कला पूरी तरीके से 1857 की क्रांति के मंगल पांडे की तरह है | मंगल पांडे की तरह कुंवर चैन सिंह जी बहुत गुस्सैल और क्रोधित हुआ करते थे यह किसी गैर की बात बिल्कुल भी नहीं सुनते थे | इनकी रगों में अपमान बिल्कुल भी नहीं जाता था जिस कारण से उनकी कहीं भी लड़ाई हो जाती थी | अपने स्वाभिमान को कायम रखने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर चैन सिंह अंग्रेजी अधिकारियों से लड़ते हुए शहीद हो गए |

10. रफी अहमद और किदवई कॉलेज –

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के बीचों-बीच स्थित रफी अहमद और किदवई कॉलेज एग्रीकल्चर से संबंधित कॉलेज है | यहां पर कृषि से जुड़ी शिक्षा को बड़े रूप में प्राप्त किया जाता है ,जैसे- स्नातक इत्यादि|

सीहोर जिला | Sehore District Wise GK History Tourism FAQ’s

प्रश्न -1. मध्य प्रदेश का मंगल पांडे किसे कहा जाता है?

मध्य प्रदेश का मंगल पांडे कुंवर चैन सिंह को कहा जाता है|

प्रश्न -2. नरसिंहपुर का युवराज किसे कहा जाता है ?

नरसिंहपुर का युवराज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर चैन सिंह को कहा जाता है |

प्रश्न -3 .एग्रीकल्चर से संबंधित रफी अहमद ऑफ के दवाई कॉलेज एग्रीकल्चर कहां पर स्थित है?

रफी अहमद किदवई कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के अंतर्गत आता है |

प्रश्न -4. मध्यप्रदेश में स्कॉटलैंड के समान चर्च किस जिले में बना हुआ है?

स्कॉटलैंड के समान चर्च मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में बना हुआ है |

प्रश्न -5. आंवला का त्रिफला मध्य प्रदेश में कहां पर बनता है?

आंवला और जड़ी-बूटियों को मिलाकर त्रिफला बनाया जाता है और यह त्रिफला मध्य प्रदेश के लघु वन उपज संघ सीहोर के द्वारा बनाया जाता है |

प्रश्न -6 .पार्वती नदी कहां पर बहती है?

पार्वती नदी सीहोर जिले की आष्टा तहसील से होकर बहती है |

प्रश्न- 7 . सारो मारो अभिलेख कहां हैं?

सारो मारो अभिलेख मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में स्थित है, जो किसी और के पानगुड़रिया नामक स्थान के अंतर्गत आता है |

प्रश्न -8. गिन्नौरगढ़ का किला कहां पर स्थित है?

गिन्नौरगढ़ का किला मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित है यह किला तोतो के लिए बहुत प्रसिद्ध है |  तोतों के लिए प्रसिद्ध होने के कारण यहां पर पर्यटक बहुत अधिक मात्रा में आते हैं |

प्रश्न -9. सीहोर जिले का पुराना नाम क्या है?

सीहोर जिले का पुराना नाम सिद्ध पुर है |

प्रश्न -10 .भोपाल जिला किस जिले से अलग होकर बनाया गया है?

भोपाल जिला मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से अलग होकर बना है |

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