स्व सहायता समूह के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

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स्व सहायता समूह/स्वयं सहायता समूह/SHG group

self help group स्वयं सहायता समूह एक ऐसा समूह होता है जिसमें लोग खुद की मर्जी से शामिल होते हैं और सहायता हेतु अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्व सहायता समूह में किसी भी व्यक्ति को शामिल करने के लिए वह आया नहीं जाता या फिर किसी दबाव से इसमें कोई व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता। स्वयं सहायता समूह में लोग अपनी मर्जी से शामिल होते हैं और इसमें यह समूह एक दूसरे की सहायता स्वयं करते हैं। दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं स्वयं सहायता समूह से संबंधित जितनी भी बातें हैं जैसे स्व सहायता समूह क्या है? स्व सहायता समूह में लोग कैसे शामिल होते हैं ? समूह की मदद से कैसे कोई लोन प्राप्त कर सकता है? सहायता समूह की शुरुआत कब से हुई? सहायता समूह में नौकरी कैसे करते हैं? स्वयं सहायता समूह में कितने प्रकार का होता है ? स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं ? कुल मिलाकर स्वयं सहायता समूह से रिलेटेड ऐसी कोई भी जानकारी नहीं बचेगी जो आप तक नहीं पहुंच पाएगी।  आज हम स्वयं सहायता समूह से संबंधित सभी प्रकार के महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ आप से चर्चा करेंगे।

   स्व सहायता समूह में निर्णय कौन करता है?

दोस्तों स्व सहायता समूह में जिला विकास प्रबंधक द्वारा निर्णय लिया जाता है जिनका संबंध नाबार्ड से होता है। स्व सहायता समूह की मदद करने के लिए जिला विकास प्रबंधक सबसे पहले बैंकों का निरीक्षण करते हैं इसके बाद स्व सहायता समूह की मदद करते हैं। नाबार्ड के अधिकारी गैर सरकारी संस्था को स्व सहायता समूह की मदद करने के लिए बैंक से लिंकेज करने की सहायता करते हैं । स्व सहायता समूह में बचत और ऋण संबंधित निर्णय को स्व सहायता समूह के सदस्य ही ले सकते हैं।

स्व सहायता समूह के एक गांव में कितने समूह बन सकते हैं?

दोस्तों  स्व सहायता समूह में एक ही गांव में एक से अधिक समूहों को बनाया जा सकता है लेकिन स्व सहायता समूह की एक कंडीशन होती है जिसमें एक व्यक्ति एक से अधिक समूहों में शामिल नहीं होना चाहिए । स्व सहायता समूह में यदि कोई व्यक्ति एक से अनेक समूहों में शामिल होता है तो उन समूह में बचत राशि जमा नहीं कर सकता और एक से अधिक समूहों के द्वारा ली गई राशि को लौटा भी नहीं सकता । दोस्तों एक ही गांव में स्व सहायता समूह के कई समूह बनाए जा सकते हैं और लोगों के द्वारा इन समूहों का सदस्य बन सकते हैं लेकिन केवल 1 सदस्य एक ही समूह का सदस्य बन सकता है ।

स्व सहायता समूह कैसे बनाएं?

दोस्तों भारत सरकार ने ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा गांव की महिलाओं को रोजगार देने के लिए और उनके स्तर को सुधारने के लिए एवं सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए स्व सहायता समूह का गठन किया । यह स्व सहायता समूह में 10 से 20 महिलाओं को एकत्रित किया जाता है इस समूह को बनाने के लिए सभी महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाता है। स्व सहायता समूह जब निर्मित किया जाता है तो उसमें एक महिला को सचिव और एक महिला को स्व सहायता समूह का अध्यक्ष और एक महिला को स्व सहायता समूह का कोषाध्यक्ष बनाया जाता है । इसके अलावा बाकी की अन्य महिलाओं को स्व सहायता समूह का सदस्य बना दिया जाता है ।

स्व सहायता समूह का रजिस्ट्रेशन अथवा पंजीकरण कैसे कराएं?

दोस्तों स्व सहायता समूह बनाने के लिए सबसे पहले 10 महिलाओं अथवा 20 महिलाओं  महिलाओं को भी शामिल किया जा सकता है। लेकिन स्व सहायता समूह में 20 से अधिक महिलाएं शामिल नहीं होगी । इतनी महिलाओं का समूह बनाकर समूह को एक यूनिक नाम दे दिया जाता है बाद इस समूह का पंजीकरण करवा दिया जाता है। सहायता समूह का पंजीकरण 3 तरीके से किया जाता है-

१. तहसील के द्वारा-

दोस्तों जिस स्व सहायता समूह का पंजीकरण कराना चाहते हैं सबसे पहले उस स्व सहायता समूह का एक अद्वितीय नाम देकर उस समूह में 10 अथवा 20 महिलाओं को शामिल कर लिया जाता है। इस समूह में एक महिला स्व सहायता समूह का अध्यक्ष होती है और एक कोषाध्यक्ष  और अन्य महिलाएं इस समूह की सदस्य होती हैं । यह सभी महिलाएं तहसील अथवा ब्लॉक जाकर स्व सहायता समूह का पंजीकरण करवा सकती हैं । ब्लॉक में स्व सहायता समूह का पंजीकरण ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा किया जाता है।

२. सी एस सी/CSC/common service centre  के द्वारा-

दोस्तों कॉमन सर्विस सेंटर के द्वारा स्व सहायता समूह में शामिल होने वाली इच्छुक महिलाएं एक ग्रुप बनाकर और सभी महिलाएं मिलकर कॉमन सर्विस सेंटर में जाकर अपने स्व सहायता समूह का पंजीकरण करा सकती हैं। कॉमन सर्विस सेंटर में स्व सहायता समूह का पंजीकरण कराने के लिए महिलाओं के लिए आवश्यक है आधार कार्ड और पैन कार्ड।

३. स्वयं से पंजीकरण कर सकते हैं-

दोस्तों आप घर बैठे स्व सहायता समूह का पंजीकरण कर सकते हैं जिसके लिए आपको एक एंड्रॉयड फोन अथवा एक लैपटॉप या फिर डेस्कटॉप पर कर सकते हैं । खुद से स्व सहायता समूह का पंजीकरण करने के लिए आप अपने डेस्कटॉप पर किसी ब्राउजर को ओपन करके स्व सहायता समूह की ऑफिशियल वेबसाइट nrlm पर जाकर स्व सहायता समूह का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। स्व सहायता समूह का रजिस्ट्रेशन होने के बाद 1 सप्ताह है अथवा 15 दिन के बाद स्व सहायता समूह का रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाता है इसके बाद स्व सहायता समूह कर रजिस्ट्रेशन कंफर्म हो जाता है।

स्व सहायता समूह का उद्देश्य क्या है?

दोस्तों सहायता समूह कोई ज्यादा बड़ा समूह नहीं होता इसमें 10 अथवा 20  व्यक्ति हो सकते हैं। स्व सहायता समूह में या तो केवल महिलाएं हो सकती हैं या फिर केवल पुरुष हो सकते हैं । परंतु पुरुष और महिलाएं भी मिलजुल कर स्व सहायता समूह का गठन कर सकती हैं । दोस्तों स्व सहायता समूह में लगभग ऐसे लोगों का होता है जिनकी आर्थिक स्थिति लगभग एक ही समान होती है जो मिडल क्लास फैमिली से आते हैं। इस समूह में ऐसी महिलाएं आती हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस समूह में अपनी सदस्यता लेती हैं ।

  • 1. स्व सहायता समूह का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बीच नेतृत्व स्थापित करना ।
  • 2. आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को शिक्षा पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • 3. स्व सहायता समूह का अंतिम उद्देश्य जन्म दर को कम करना है ।
  • 4. स्व सहायता समूह के द्वारा लोगों ने पोषण से संबंधित विचारों का और शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जाता है ।
  • 5. स्व सहायता समूह के माध्यम से सामुदायिक जीवन को बेहतर बना सकते हैं और जीवन जीने के तौर तरीके बदल जाते हैं।
  • 6. स्व सहायता समूह को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्व सहायता समूह के चुने गए नेताओं को समूह की सहभागिता में शामिल होना ।

समूह में बुक कीपर का क्या काम होता है?

दोस्तों स्व सहायता समूह में समूह के किसी भी महिला को बुक कीपर के रूप में चयनित किया जाता है। इसके बाद जब स्व सहायता समूह सुचारू रूप से चलने लगता है तब बुक् कीपर का काम होता है स्व सहायता समूह में होने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी रखना ।

स्व सहायता समूह में बुक् कीपर के द्वारा समूह की वित्तीय लेखा की जानकारी नोट की जाती है । वित्तीय कार्य की जानकारी को इसलिए नोट किया जाता है ताकि आगे जाकर समूह में किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो।

स्व सहायता समूह में बुक् कीपर समूह में होने वाले सभी इवेंट होने वाली प्रक्रिया को बुक में नोट कर सकता है ताकि स्व सहायता समूह का प्रशिक्षण सुचारु रुप से चल सके।

स्व सहायता समूह के लिए उम्र –

स्व सहायता समूह में शामिल होने के लिए महिलाओं के लिए आवश्यक उम्र 18 से 50 वर्ष तक रखी गई है। इस ग्रुप में शामिल होने के लिए कम से कम महिलाओं की संख्या 12 हो सकती है और अधिक से अधिक महिलाएं 25 इस ग्रुप में शामिल हो सकती हैं ।

स्व सहायता समूह कैसे चेक करें?

स्व सहायता समूह को चेक करने के लिए आपको nrlm.gov.in वेबसाइट पर जाना है इसके बाद आप चरणबद्ध तरीके से अथवा स्टेप बाय स्टेप स्व सहायता समूह को चेक कर सकते हैं । दोस्तों स्व सहायता समूह को चेक करने के लिए आप एंड्रॉयड फोन अथवा लैपटॉप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

#1. उससे पहले आपको अपने एंड्रॉयड फोन में किसी ब्राउजर को ओपन कर लेना है।

#2. ब्राउज़र ओपन करने के बाद आप स्व सहायता समूह की ऑफिशियल वेबसाइट nrlm नाम लिखकर सर्च बार में टाइप करेंगे और सर्च करेंगे।

#3. इतना करने के बाद आपके पास स्व सहायता समूह की ऑफिशियल वेबसाइट खुल कर सामने आ जाएगी।

#4. इसके बाद आप NRLM Reports वाली वेबसाइट पर टैब कर देंगे।

#5. इतना करने के बाद आपके पास अगला पेज खुल कर सामने आ जाएगा जिसमें डायलॉग बॉक्स की नीचे छठ वे नंबर पर self help group (SHGs) नाम से एक नीले कलर की एक लाने देखेगी जिस पर आपको टैब कर देना है।

#6. इतना करने के बाद आपके पास छोटा सा एक पेज ओपन हो जाएगा जिसमें g1 g2 g3 नाम से एक से अधिक नीले कलर की लाइने आपके सामने ओपन हो जाएंगी जिसमें से आपको G1 वाली लाइन पर टैब कर देना है । जिसमें NRLM database लिखा होगा ।

#7. जब आप डाटाबेस वाली लाइन पर टैब कर देंगे तो आपके सामने स्व सहायता समूह का ऑफिशियल पेज खुल कर सामने आ जाएगा।

#8. दोस्तों इस पेज में आप स्व सहायता समूह की राज्यवार जानकारी से लेकर जिलेवार और फिर इसके बाद तहसील तहसील के बाद छोटे छोटे कस्बे और फिर इसके बाद गांव लेवल पर आप पूरी जानकारी देख सकते हैं।

#9. यदि आप अपने गांव की जानकारी को देखना चाहते हैं तो जब स्व सहायता समूह का ऑफिशियल पेज खुल कर सामने आ जाए इसके बाद सबसे पहले आप अपने राज्य को सेलेक्ट करेंगे, आप जिस जिले का देखना चाहते हैं उस जिले को सेलेक्ट करेंगे, सेलेक्ट करने के बाद आप अपनी तहसील को सेलेक्ट करेंगे, तहसील सिलेक्ट करने के बाद आप अपने पंचायत को सेलेक्ट करेंगे, सर आप पंचायत के अंदर भी किसी गांव में रहते हैं तो आप उस गांव को सिलेक्ट करेंगे, कलेक्ट करने के साथ-साथ आपको सर्च बार का ऑप्शन भी मिलता है आप सर्च बारे में उस गांव के नाम को सर्च करके आसानी से ढूंढ सकते हैं ।

स्व सहायता समूह कितने प्रकार के होते हैं?

स्व सहायता समूह को दो भागों में बांटा गया है पहला आर्थिक आधार पर और दूसरा लिंग के आधार पर –

1. आर्थिक आधार पर स्व सहायता समूह के दो प्रकार होते हैं पहला गरीबी रेखा से नीचे निर्वहन करने वाले व्यक्तियों का समूह और दूसरा गरीबी रेखा से ऊपर करने वाले व्यक्तियों का समूह

2. लिंग के आधार पर स्व सहायता समूह में तीन प्रकार आते हैं-
जिनमें पहले समूह में केवल पुरुष होते हैं और दूसरे समूह में केवल महिलाएं हो सकती हैं और तीसरे समूह में महिलाओं और पुरुषों को एक साथ किया जा सकता है ।

स्व सहायता समूह में कौन सी नौकरी आई है?

IPRP –

दोस्तों वर्तमान में शायद ही ऐसा कोई होगा जो नौकरी नहीं करना चाहता होगा वरना आज के जमाने में सब नौकरी करना चाहते हैं। तो आज हम आपको बताने वाले हैं । राष्ट्रीय आजीविका मिशन की तरफ से आईपीआरपी में  निकली नौकरी के बारे में जिसको केवल स्व सहायता समूह की महिलाएं ही कर सकती हैं । नौकरी को स्व सहायता समूह के अलावा कोई अन्य व्यक्ति के लिए कोई पात्रता नहीं होती है । दोस्तों स्व सहायता समूह में दो से तीन सदस्यों की नियुक्ति की जाती है समूह में चाहे पुरुषों का हो या महिलाओं का हो अगर पुरुषों का समूह है तो उसमें से भी दो से तीन सदस्यों की नियुक्ति की जाती है यह नियुक्ति खुद की पंचायत में ही होती है ।

यदि समूह महिलाओं का है तो महिलाओं के समूह में भी दो से तीन महिलाओं की नियुक्ति होती है। दोस्तों स्व सहायता समूह की तरफ से सबसे पहले ग्राम संगठन का भी गठन किया जाता है जिसे सीएलएफ भी बोला जाता है। इसके बाद दूसरी पोस्ट होती है संकुल स्तरीय संगठन जो ग्राम संगठन के निचले स्तर की पोस्ट होती है।
दोस्तों ग्राम संगठन की पोस्ट और संकुल स्तरीय संगठन की पोस्ट क्रियान्वयन करने के लिए और स्व सहायता समूह का कार्य संभालने के लिए आईपीआरपी नियुक्ति की जाती है । दोस्तों स्व सहायता समूह में आईपीआरपी की पोस्ट स्व सहायता समूह की सखी की पोस्ट से बड़ी होती है। आईपीआरपी की पोस्ट पर कार्यरत महिला को स्व सहायता समूह की संचालित होने वाली योजनाओं का क्रियान्वयन करना और स्व सहायता समूह की सभी जानकारी को सबके साथ साझा करना तथा समय-समय पर सब को जागरुक करना होता है ।

स्व सहायता समूह में रहने से क्या फायदा है?

  • दोस्तों स्व सहायता समूह में रहने से समूह में रहने वाले सदस्य एक दूसरे की मदद करते हैं ।
  • स्व सहायता समूह में महिला सशक्तिकरण में वृद्धि होती है। एक दूसरे की सहायता करती हैं ।

स्व सहायता समूह की सहायता से कोई भी लघु उद्योग शुरू कर सकता है और लघु उद्योग से होने वाली बचत से अपना निर्वाह कर सकता है ।

  • स्व सहायता समूह में कई प्रकार की शिक्षा को सदस्यों के बीच स्व सहायता समूह के संचालक और स्व सहायता समूह में बड़ी पोस्ट पर रहने वाले महिलाअथवा व्यक्ति स्व सहायता समूह की महिलाओं अथवा व्यक्तियों को जन्म दर संबंधी शिक्षा भी प्रदान करते हैं  ताकि जन्म दर को नियंत्रित किया जा सके ।
  • स्व सहायता समूह के माध्यम से गरीबों में साख क्षमता में वृद्धि की जाती है । और स्व सहायता समूह की सहायता से गरीबों में जीवन निर्वाह हेतु लघु उद्योगों को भी शुरू करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है ।
  • स्व सहायता समूह के माध्यम से स्कूलों में नामकरण से संबंधित बढ़ावा मिलता है ।
  • स्व सहायता समूह के द्वारा लोगों को बैंकों से बचत ऋण संबंधी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं ।

स्व सहायता समूह में कितने पैसे मिलते हैं?

स्व सहायता समूह में कार्यरत रहने वाली प्रमुख महिलाओं में स्व सहायता समूह की अध्यक्ष और स्व सहायता समूह की कोषाध्यक्ष महिलाएं प्रमुख होती हैं। स्व सहायता समूह की अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को वर्तमान में किसी भी प्रकार की वेतन नहीं मिलती और ना ही केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार की तरफ से अभी तक इनको किसी भी प्रकार की वेतन देने की घोषणा की गई है। स्वयं सहायता समूह में कार्यरत रहने वाली महिला जोकि स्व सहायता समूह की लेखा-जोखा परीक्षण को संभालती है उसको हाल ही में केंद्र सरकार ने ₹9000 देने की घोषणा की है लेकिन अभी तक इस वेतन की किसी भी प्रकार से पुष्टि नहीं हुई है।

स्व सहायता समूह क्या है? लोन कैसे मिलेगा समूह से

दोस्तों अब आप लोग सोचते होंगे कि स्व सहायता समूह में कार्यरत रहने वाली कितनी महिलाओं में से किसी को कोई भी राशि प्राप्त नहीं होती ना ही केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की वेतन मिलती है। दोस्तों ने आपको बता देना चाहता हूं स्व सहायता समूह में कार्यरत रहने वाली महिलाओं को बहुत ही सुविधाएं प्राप्त होती हैं साथ ही स्व सहायता समूह की महिलाओं में जो महिला सदस्य होते हैं उनको भी स्व सहायता समूह की तरफ से बहुत ही सुविधाएं प्रदान की जाती है।

हाल ही में केंद्र सरकार के द्वारा महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत मनरेगा के कार्यों को संभालने का जिम्मा स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया जाएगा ‌ । मनरेगा के कार्यों को करने के लिए स्व सहायता समूह के सदस्यों को अप्वॉइंट किया जाएगा जिसके लिए उन्हें ₹6000 की वेतन देने की घोषणा की गई है ।

BC Sakhi Yojna-

दोस्तों बीसी सखी का कार्य होता है गांव में बैंकिंग की सुविधाओं को बढ़ावा देना । स्व सहायता समूह में किसी एक महिला को बीसी सखी के पद पर नियुक्त किया जाता है जिसका कार्य होता है गांव में बैंकिंग की सुविधाओं को उपलब्ध कराना। दोस्तों बीसी सखी योजना की शुरुआत केंद्र सरकार के द्वारा की गई है जिसमें मुख्य रुप से गांव की स्व सहायता समूह में नियुक्त महिलाओं को बैंकिंग की आईडी प्रदान की जाएगी। प्रदान की गई बैंकिंग की आईडी के द्वारा गांव में बीसी सखी बैंकिंग की सुविधाओं को प्रदान करेंगी।

दोस्तों यह सुविधा इसलिए की गई है क्योंकि गांव में ज्यादातर बैंक अधिकतर गांव से बाहर होते हैं जहां पर बैंकिंग की सुविधाओं में समस्या जाती है और गांव के लोग अक्सर कम पढ़े लिखे होने के बाद बैंकिंग के कार्य में समझ नहीं पाते और उनको बैंकिंग की सुविधा बहुत दूर भी लगती है जिस कारण से इस व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। दोस्तों केंद्र सरकार की तरफ से स्व सहायता समूह की बीसी सखी को बैंकिंग की आईडी प्रदान करने के साथ-साथ एक लैपटॉप दिया जाता है। केंद्र सरकार के द्वारा बीसी सखी को ₹55000 तक की सैलरी देने की घोषणा की गई है हालांकि अभी तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। दोस्तों बिजली बिल ऑनलाइन जमा होने के कारण गांव में अधिकतर बिल जमा करने के लिए लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसके लिए बीसी सखी के द्वारा गांव के जिन लोगों को बिल जमा करने में समस्या जाती है उनके बिल जमा करने का जिम्मा भी बिजी सखी का होता है ।

महिलाओं की बदली  जिंदगी-

दोस्तों स्व सहायता समूह के द्वारा महिलाओं की मानो जिंदगी ही बदल गई है क्योंकि स्व सहायता समूह के द्वारा महिलाओं को बहुत ही ऐसी सुविधाओं को प्रदान किया जाता है जिनसे उनका जीवन निर्वाह बहुत ही आसान हो गया है । स्व सहायता समूह के द्वारा महिलाओं को बहुत से ऐसे लाभ प्राप्त होते हैं जिनको कभी उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।

स्व सहायता समूह का उद्देश्य होता है जन्म दर को कम करना जिसको शिक्षा प्रदान करने के माध्यम से ही किया जा सकता है। जन्म दर को कम करने के लिए स्व सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा मीटिंग के दौरान यह शिक्षा प्रदान की जाती है जिससे जन्म दर को कम किया जा सके।

दोस्तों गांव में कई बार क्या होता है बहुत सी महिलाएं ऐसी होती हैं जो कम पढ़ी-लिखी होने के कारण अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और अच्छा पोषण नहीं दे पाती। दोस्तों बच्चों को यदि अच्छे संस्कार और अच्छे पोषण नहीं मिले तो उनका मानसिक विकास और शारीरिक विकास बहुत कम होगा। बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ यदि उपयुक्त मानसिक विकास करना है तो उनकी पोषण में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होना चाहिए। गांव की महिलाओं पोषण संबंधित टिप्स स्व सहायता समूह के द्वारा मिल जाती हैं जिस कारण से वे अपने बच्चों को उपयुक्त पोषण दे सकते हैं ।

स्व सहायता समूह की बिजली सखी / योगी की बिजली सखी–

दोस्तों उत्तर प्रदेश में महिलाओं को बहुत ही शानदार रोजगार प्राप्त हुआ है जिसमें कई महीनों से जमाना हुए बिजली बिल को स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा बिल जमा करवाया जाता है। स्व सहायता समूह की सदस्यों को बिजली सखी के रूप में नियुक्त किया जाता है। आपको पता है एक ही गांव में एक से अधिक स्व सहायता समूह को बनाया जा सकता है जिसमें ग्रुपों में कई महिलाएं हो सकती हैं। इन स्व सहायता समूह की महिलाओं को बिजली सखी के रूप में नियुक्त किया जाता है। बिजली सखी का प्रमुख काम यह होता है कि गांव में अथवा शहरों में जिन लोगों की बिजली बिल जमा नहीं है उन लोगों को बिजली बिल जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना और घर-घर जाकर बिल जमा करवाना होता है ।

दोस्तों अब हम बात करते हैं बिजली सखी की सैलरी के बारे में -तो दोस्तों स्व सहायता समूह की नियुक्त की गई महिला सदस्य को बिजली बिल के रूप में किसी भी प्रकार की सैलरी नहीं दी जाती लेकिन प्रति बिल जमा करवाने के लिए ₹20 दिए जाते हैं। बिजली सखी को सबसे ज्यादा फायदा तब होता है जब बिजली का बिल ₹2000 से ऊपर होता है यदि किसी का बिल ₹2000 से ऊपर होता है तो बिजली सखी को एक फ़ीसदी लाभ होता है ।

पशु सखी की सैलरी कितनी होती है?

दोस्तों गांव में शायद ही ऐसा कोई होगा जिसके घर पर पशु नहीं होते हैं या फिर जिनको पशुओं की जरूरत नहीं होती। गांव में अधिकतर सब के घर पर पशु होते हैं और सभी दूध दोहने का कार्य भी करते हैं । दोस्तों पशुओं के द्वारा मिलने वाले दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए और पशुओं को एक व्यवसाय के रूप में पालने के लिए लोगों में व्यवस्थाओं के साथ साथ प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए पशु सखी योजना का शुभारंभ किया गया।

दोस्तों गांव की लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए पशु सखी योजना को शुरू किया गया जिसमें मुख्य रुप से पशु संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है। दोस्तों पशु सखी योजना पर सरकार भी बहुत तेजी से काम कर रही है पशु सखी की पोस्ट पर नियुक्त किसी भी स्व सहायता समूह की सदस्य को ₹10000 तक की सैलरी मिलती है। पशु सखी को पशुपालन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर पशु सखी गांव में घर घर जाकर पशुओं की देखरेख से लेकर पशुओं को किस तरह पाला जाता है उनको किस तरीके से एक उद्योग के रूप में काम में लाया जा सकता है इसके बारे में जानकारी बतानी होती है । पशु सखी का प्रमुख कारक होता है पशु संबंधित पाले गए पशुओं को किस तरीके से पालना चाहिए और कौन सी नस्ल के पशु ज्यादा लाभदायक होते हैं। पशुओं में होने वाली बीमारियों से संबंधित प्रशिक्षण करना और तरह तरह के कैंप चलाना।

स्व सहायता समूह की सखी का वेतन कब मिलेगा?

दोस्तों स्व सहायता समूह की सखी के वेतन के बारे में अभी तक किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है। स्व सहायता समूह की सखी के वेतन के बारे में केंद्र सरकार के द्वारा अभी तक किसी भी प्रकार की घोषणा भी नहीं हुई है कि आखिर कितनी वेतन भी जाएगी। हो सकता है स्व सहायता समूह की सखी को वेतन देने की घोषणा की जाए ।

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