टीकमगढ़ जिला | Tikamgarh History District Wise GK in Hindi

टीकमगढ़ जिला के प्रमुख पर्यटक स्थल-

हेलो दोस्तों !आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले प्रमुख पर्यटक स्थल जो प्रमुख रूप से राष्ट्रीय महत्व के हैं और ऐतिहासिक हैं | हेलो दोस्तों! आज हम आपको बताएंगे ऐतिहासिक रूप से कौन से मंदिर कब बनाए गए और किन मंदिरों का सबसे अधिक है महत्त्व है | दोस्तों आज हम ऐसे पर्यटक स्थल के बारे में बात करना चाहते हैं जिसके बारे में कोई नहीं जानता | मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले जितने भी पर्यटक उनका महत्व कहीं ना कहीं ऐसे इतिहास से जुड़ा हुआ है जिसके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे |

बल्देवगढ़ का किला1783 में निर्मित टीकमगढ़ जिला
ओरछा का किलाबुंदेला राजवंश का शासन
जहांगीर महलटीकमगढ़ जिला (ओरछा)
कुंडेश्वरमहादेव सिद्ध पीठ हजारों वर्ष पुरानी
बगाज माता मंदिरसांप और बिच्छू के जहर को झाड़ने के लिए प्रसिद्ध 
गढ़कुंडार का किलाटीकमगढ़ जिले का सबसे सुरक्षित किला
मोहनगढ़ का किलाजिला टीकमगढ़ के अंतर्गत
चंद्रशेखर आजाद शहीद स्मारकओरछा के अंतर्गत टीकमगढ़
मरखेड़ा का सूर्य मंदिरविक्षिप्त मंदिर
ओरछा के रामराजा सरकारअयोध्या से लाई गई मूर्ति 

दोस्तों टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत ऐसी ऐसी पर्यटक स्थल की चीजें हैं जिनके बारे में लोगों को बिल्कुल भी पता नहीं है जबकि इस जिले के पर्यटक स्थल ऐसे भी हैं कि यहां पर साक्षात भगवान बसते हैं | दोस्तों इस जिले के अंतर्गत ऐसे -ऐसे पर्यटक स्थल आते हैं जिनके बारे में यदि भारत सरकार चाहे तो उसको बहुत ही ऊंचा स्थान दे सकती है | चलिए आज हम बात कर लेते हैं टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले जितने भी पर्यटक स्थल हैं उनके बारे में विस्तार से चर्चा होगी और एक-एक करके सभी के बारे में उनके इतिहास के साथ-साथ उनकी पर्यटक स्थल की जितनी भी चीजें हैं सभी के बारे में चर्चा होगी |

टीकमगढ़ जिले का विकास तो हुआ है लेकिन उस तरीके से नहीं जिस तरीके से होना चाहिए था क्योंकि इस जिले के अंतर्गत प्राकृतिक रूप से ऐसे- ऐसे दर्शनीय स्थल हैं जिनके अपने आप में बहुत बड़े महत्व है |

टीकमगढ़ जिले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य-

⬤टीकमगढ़ जिला समुद्र तल से करीब 350 मीटर ऊंचाई पर स्थित है |

⬤टीकमगढ़ जिला सागर संभाग के अंतर्गत आता है किस जिले में प्राचीन समय में कई राजाओं ने शासन किया यह जिला बुंदेलखंड क्षेत्र के अंतर्गत आता है |

⬤टीकमगढ़ जिले की ओरछा रियासत पर राज करने वाले बुंदेला राजा विक्रमजीत सिंह ने अपनी राजधानी और अच्छा से टिहरी स्थापित की थी |

⬤टीकमगढ़ का नाम टिहरी के आधार पर ही रखा गया है | टिहरी वर्तमान में पुरानी टिहरी के नाम से जानी जाती है |

⬤कुछ लोगों का कहना है कि टीकम नाम से टीकमगढ़ का नाम रखा गया है जो कि भगवान श्री कृष्ण के नाम से लिया गया है |

⬤टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाली बहुत सी ऐसी जगह हैं जहां पर बुंदेलखंड के जाने-माने वंशजों ने राज किया है जिनमें प्रमुख रूप से चंदेल शासकों ने और गुप्त वंश के शासकों ने मूल रूप से यहां पर शासन किया है इसके अलावा मौर्य वंश ने भी यहां पर शासन किया है |

गर्भ गिरावण तोप/Baldevgarh——

दोस्तों गर्भ गिरावण तो बहुत ही घातक और अत्यधिक आवाज करने वाली तो है | दोस्तों यह तोप महाराजा बिक्रमजीत सिंह जी के शासनकाल के दौरान निर्मित की गई थी | इस तोप की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह तोप निर्मित होने के बाद केवल एक बार उपयोग में लाई गई | दोस्तो ऐसा कहा जाता है कि यह सब तो पक्के दागने के बाद आसपास की स्त्रियों के गर्भ गिर जाते थे | दोस्तों इतना बड़ा घातक नुकसान होने के कारण इस तोप का दोबारा प्रयोग नहीं किया गया | इस तोप की इसी विशेषता के कारण इसको पुरातत्व संग्रहालय के रूप में बलदेव गढ़ किले के अंदर सुरक्षित रूप से रखा गया है | इसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक देखने के लिए आते हैं | दोस्तों इस तोप के प्रयोग से आज तक इतिहासकार बताते हैं कि जिस भी सेना के लिए इस तोप का प्रयोग किया गया था उस सेना का नरसंहार हो गया था | यह तो बहुत ही घातक और मजबूत लोहे से निर्मित की गई है इसकी डिजाइन इतनी खतरनाक है कि आज तक ऐसी औजार का निर्माण हुआ ही नहीं है | इस तोप का जब प्रयोग किया गया था तब स्त्रियों के गर्भ गिर जाने के कारण इसको युद्ध के दौरान प्रयोग में लाना बंद कर दिया गया | तभी तो यह तोप का नाम गर्भ गिरावण तो पड़ गया |

टीकमगढ़ फोर्ट——

दोस्तो टीकमगढ़ किला मध्य-प्रदेश के सभी किलो में एक अपना बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है | दोस्तों यह किला अपनी सुरक्षा के लिए पहाड़ी पर निर्मित किया गया ताकि सेना दूर से ही दिखाई दे जाए | दोस्तो टीकमगढ़ जिले की बनावट बहुत ही गहरी और रोचक तरीके से की गई है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं | दोस्तों टीकमगढ़ किला के बारे में लोग बहुत कम ही जानते हैं क्योंकि इसका इतिहास बहुत ही पुराना है और इसके बारे में कई इतिहासकार बहुत कम ही बताते हैं जिस कारण से इसके बारे में लोगों को पता नहीं चल पाता |

मोहनगढ़ का किला——

दोस्तों मोहनगढ़ का किला मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत ही आता है यह अकेला अपनी नक्काशी कला के साथ-साथ शानदार द्वार के लिए जाना जाता है | एक किले के जितने भी द्वारा निर्मित किए गए उनमें सभी अपनी – अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं | दोस्तों मोहनगढ़ के किले में प्रवेश करना दुश्मन के लिए बहुत ही टेढ़ी खीर है क्योंकि इसके लिए के अंदर प्रवेश करने से पहले आपको मुख्य द्वार से होकर जाना ही पड़ेगा | मुख्य द्वार के अलावा कोई ऐसा रास्ता नहीं है जहां से आप मोहनगढ़ किला का भ्रमण कर सकें | दुश्मनों के लिए मोहनगढ़ के लिए पर अधिकार करना बहुत ही कठिन था क्योंकि मोहनगढ़ का किला बहुत ही सुरक्षित जिला माना जाता था |

बल्देवगढ़ का किला——-

दोस्तों बल्देवगढ़ के किले के बारे में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसको इसके बारे में पता नहीं होगा क्योंकि मध्यप्रदेश का यह किला सबसे सुरक्षित किला माना जाता है | दोस्तों बल्देवगढ़ का किला मध्य प्रदेश के अन्य किलो में बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगता है | बल्देवगढ़ किले की पूर्व की तरफ बहुत ही सुंदर और बड़ा तालाब और किले के दूसरी तरफ बल्देवगढ़ की सुरक्षा के लिए दीवार निर्मित की गई है | यह किला धरातल से काफी ऊंचा होने के कारण दुश्मनों पर आसानी से वार किया जा सकता है | यह किला धरातल से ऊंचा होने के कारण दुश्मन इस किले पर बड़ी मुश्किल से राज कर पाते थे इसको जीतना अन्य किलो की तुलना में बहुत मुश्किल था |

टीकमगढ़ से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह किला बहुत ही सुरक्षित किला माना जाता है | माना जाता है कि जब 1783 में ओरछा के महाराज विक्रमजीत सिंह ने अपनी राजधानी टिहरी बनाई थी तब उसी के दौरान उन्होंने बल्देवगढ़ के किले का निर्माण भी करवाया था | इस किले को देखने के लिए देश-विदेश से लोग घूमने के लिए आते हैं |इस किले की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किले के पूर्व की ओर बने तालाब के बीचोंबीच एक गढ़िया भी निर्मित की गई है | तालाब के बीचो बीच बनी गढ़िया तालाब की सुंदरता को 2 गुना बढ़ा देती है |

बल्देवगढ़ का किला Tikamgarh

कुंडेश्वर धाम मंदिर——-

कुंडेश्वर धाम मंदिर टीकमगढ़ से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह मंदिर भगवान देवा दी देव महादेव के लिए प्रसिद्ध है| यह धाम जमधर नदी के किनारे स्थित है | ऐसा माना जाता है कि कुंडेश्वर में वर्तमान में जिसे शिवलिंग की पूजा हो रही है वह शिवलिंग आज से करीब हजारों वर्ष तक कुंडेश्वर की भूमि में छिपा हुआ था | कई भूगर्भ शास्त्रियों ने बताया है कि कुंडेश्वर धाम पर जिस शिवलिंग को पाया गया है इस शिवलिंग की पूजा करीब लाखो वर्ष पहले से होती आ रही है | कुंडेश्वर धाम के एक एक और खूब घना जंगल है और एक तरफ कुंडेश्वर धाम का मंदिर है इस धाम पर हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं | कुंडेश्वर धाम की रहस्यमई गुणों के कारण यहां पर विदेशों से भी लोग भ्रमण करने के लिए आते हैं | कुंडेश्वर धाम के रहस्य कुछ ऐसे हैं जिनके बारे में लोगों को बिल्कुल भी भरोसा नहीं होता परंतु यही सत्य है |

कुंडेश्वर धाम मंदिर के बारे में कुंडेश्वर निवासी लोगों के द्वारा तरह-तरह की कहानियां सुनने को मिलते हैं लेकिन ऐसा कहा जाता है कि कुंडेश्वर धाम का इतिहास हजारों नहीं बल्कि लाखों वर्ष पुराना है | कुंडेश्वर धाम कई बार भूमि पर ही धरासाही हो गया लेकिन फिर भी कई बार किसी ना किसी कारण से यह धाम अपने अस्तित्व में आया और यहां पर कई देवी-देवताओं की स्थापना की गई |

कुंडेश्वर धाम मंदिर का जीर्णोद्धार राजा विक्रम सिंह जी ने करवाया था यह वही राजा है जिन्होंने अपनी राजधानी ओरछा से आकर टिहरी को बनाया था |

ऊषा वॉटरफॉल टीकमगढ़——-

ऊंचा जलप्रपात टीकमगढ़ जिले का अब विश्वास नहीं है और एक रहस्यमई झरना है | यह झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों को बहुत ही आकर्षक करता है | इस झरने को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक देखने के लिए आते हैं | टीकमगढ़ के घने जंगलों के बीच बना यह जलप्रपात लोगों के आकर्षण का केंद्र है |

बैरी घर ——-

दोस्तों बैरी घर टीकमगढ़ जिले का एकमात्र ऐसा पिकनिक स्थल है जहां पर टीकमगढ़ के अलावा प्रदेश के अन्य भागों से भी यहां पर लोग पिकनिक मनाने आते हैं और साथ ही पर्यटन का मजा लेते हैं|
बैरी घर टीकमगढ़ जिले का एक ऐसा आकर्षक और रहस्यमय स्थान है जहां पर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है | प्राकृतिक रूप से यह जगह सुंदर होने के कारण लोग यहां पर वर्ष की शुरुआती के दौरान पिकनिक मनाने के लिए आते हैं | यदि कोई पर्यटक टीकमगढ़ के किले को घूमने के लिए आता है और ऊंचा जलप्रपात कोई अधिक घूमता है तो बैरी घर एक बार जरूर घूमने के लिए आता है |

मां विंध्यवासिनी मंदिर ——

दोस्तों माता विंध्यवासिनी का मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है इस मंदिर पर बहुत ही पुराने समय से माता विंध्यवासिनी की पूजा होती आ रही है | टीकमगढ़ जिले के आसपास के सभी लोग नवरात्रि के दौरान माता विंध्यवासिनी मंदिर पर जवारे चढ़ाने के लिए आते हैं | माता विंध्यवासिनी की पूजा करने के लिए प्रदेश के दूर-दूर के हिस्सों से लोग नवरात्रि के दौरान दर्शन करने के लिए आते हैं और माता विंध्यवासिनी की कृपा से अपनी हर मनोकामना पूरी करते हैं | यह मंदिर बहुत ही प्राचीन होने के कारण लोगों के पर्यटन का केंद्र बन चुका है | यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है इस मंदिर की पहाड़ी से आप बलदेव गढ़ के किले को आसानी से देख सकते हैं |

बगाज माता मंदिर———

बगाज माता मंदिर प्रमुख रूप से सांप के द्वारा काटे गए जहर को झरवाने के लिए और बिच्छू के द्वारा काटे गए जहर को झरवाने के लिए जाना जाता है | लोगों का कहना है कि यदि एक मंदिर पर कोई पूर्ण रुप से विश्वास लेकर आता है तो सांप के द्वारा काटे गए जहर को भी भगाया जा सकता है | लोगों का कहना है कि बिच्छू के द्वारा काटे गए जहर को आसानी से बगाज माता मंदिर की कृपा से बिच्छू के जहर को दूर किया जा सकता है | दोस्तों इस मंदिर की विशेषता के कारण प्रदेश के विभिन्न भागों से लोग हमेशा यहां पर दर्शन करने के लिए आते रहते हैं | नवरात्रि के दौरान कई श्रद्धालु लोग मंदिर पर कन्या भोज का आयोजन करते हैं |

ओरछा का रामराजा मंदिर —–

दोस्तो टीकमगढ़ जिले की ओरछा का रामराजा मंदिर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में से एक है | बस मंदिर में भगवान श्री राम की प्रतिमा विराजमान है इस मंदिर में दर्शन करने के बाद ऐसा लगता है मानो हम भगवान से ही मिल रहे हैं | ऐसा कहा जाता है किशन 1631 में रामराजा सरकार का जब ओरछा में आगमन हुआ तब उसी समय के दौरान रामचरितमानस की लिखावट भी पूरी हो गई थी |

ओरछा का रामराजा मंदिर

तालाजी और पपौराजी प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल——-

ताला जी और पपौराजी प्रसिद्ध मंदिर हैं जो कि जैन धर्म से संबंध रखते हैं | इन मंदिरों का निर्माण भी चंदेल राजवंश के दौरान ही किया गया था | इन मंदिरों की नक्काशी कुछ इस तरीके से की गई है जिनकी तुलना किसी और मंदिर से नहीं की जा सकती क्योंकि इसके अलावा कोई ऐसा मंदिर ही नहीं है जो इनकी आकृति के समान हो | अपनी एक अलग ही आकृति के कारण ही यह मंदिर हमेशा सुर्खियों में रहता है |

चंद्रशेखर आजाद शहीद स्मारक —-

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद जी का बहुत सारा जीवन टीकमगढ़ जिले के ओरछा में व्यतीत हुआ है | चंद्रशेखर आजाद जी का टीकमगढ़ की मिट्टी से अत्यधिक प्रेम और उनका जुड़ाव हमेशा रहा है | टीकमगढ़ जिले की मिट्टी से अत्यधिक प्रेम और जुड़ा होने के कारण टीकमगढ़ के सतार तट पर बेतवा नदी के किनारे चंद्रशेखर आजाद जी की शहीद स्मारक भी स्थित है | चंद्रशेखर आजाद जी की तिथि तय स्मारक को देखने के लिए आसपास के लोग ही नहीं बल्कि दूर-दूर से पर्यटक भी आते हैं क्योंकि यह स्मारक बहुत ही सुंदर और मजबूत बनी हुई है | चंद्रशेखर आजाद जी की शहीदी स्मारक की सबसे खास बात तो यह है कि पहली बात चंद्रशेखर आजाद एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे दूसरी बात उनके जीवन के बारे में पता चलता है |

ओरछा का रामायण संग्रहालय—-

ओरछा का रामायण संग्रहालय जहां पर राम राजा सरकार के साक्ष्य सुरक्षित रखे हुए हैं | ओरछा के रामायण संग्रहालय को मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा सुरक्षित किया गया है क्योंकि इस संग्रहालय में पुरातत्व के साक्ष्य सुरक्षित रखे हुए हैं |

  1. ओरछा का किला —–

ओरछा का किला ओरछा के राजा रूद्र प्रताप सिंह जी ने 1501 ईसवी के दौरान करवाया था | ओरछा के किले पर इतिहास से पता चलता है कि कई राजाओं ने इसके लिए पर राज किया है | यह किला देखने में बहुत सुंदर लगता है क्योंकि इस किले की अंदर बुंदेला राजकुमार और बुंदेला राजाओं ने भी निवास किया है | इस किले के अंदर बहुत ही सुंदर -सुंदर मंदिरों का निर्माण भी किया गया था |

ओरछा का किला महारानी चंपावती के द्वारा अपनी पवित्रता का प्रमाण देने के लिए अपने ही सगे देवर को जहर देने के कारण ओरछा के राजा और ओरछा बहुत ही चर्चा में रहता है |

जहांगीर महल——

दोस्तों जहांगीर महल टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत ही आता है| ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव थे तब जहांगीर ने एक बार ओरछा का भ्रमण किया था जहांगीर के भ्रमण के उपलक्ष में ओरछा के राजा वीर सिंह ने जहांगीर की स्वागत के रूप में जहांगीर महल का निर्माण करवाया था | इसका निर्माण 17वीं शताब्दी के समय हुआ था | जहांगीर महल 4 मंजिला इमारत है यह इमारत बहुत ही आकर्षक और टाइल्स के द्वारा ढकी हुई है |

15.मरखेड़ा का सूर्य मंदिर—–

टीकमगढ़ जिले के बरखेड़ा के अंतर्गत आने वाला सूरमंदिर पुरातत्व विभाग के लिए बहुत ही घटिया बात है क्योंकि इस मंदिर कि किसी भी प्रकार से सुरक्षा नहीं की जा रही है | यह मंदिर 4s संभव पर खड़ा हुआ है और घटते हुए वर्षों के साथ इस मंदिर का अस्तित्व भी धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है | इस मंदिर का शीर्ष पूरी तरह से टूटा हुआ है मंदिर में जल चढ़ाने से मंदिर क्षीण हो रहा है | मरखेड़ा का सूर्य मंदिर बहुत ही प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है जिसकी सुरक्षा करना प्रशासन का काम है लेकिन प्रशासन इस पर किसी भी प्रकार से ध्यान नहीं दे रहा है |

गढ़कुंडार का किला——-

दोस्तों इस किले के बारे में हम जितना बताएं उतना ही रहस्य आपके लिए कम है क्योंकि इसके लिए कर रहा था अन्य किलो की तुलना में बहुत ही गहराई से है जिसको जानने के बारे में हमेशा हर एक व्यक्ति जिज्ञासु होता है | दोस्तो टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाला गढ़कुंडार का किला अपनी बहुत बड़ी विशेषता लेकर चलता है | इस किले की विशेषता यह है कि यह किला दूर से तो नजर आता है मगर पास जाते ही किला धीरे-धीरे गायब होने लगता है | इस किला का रहस्य यहां पर पास रहने वाले लोगों के द्वारा पता चलता है कि इसके लिए के अंदर भूल भुलैया भी है जिस कारण से दिन के समय यहां पर डर भी लगता है | कहा जाता है कि इसके अंदर जाने के बाद कोई भी व्यक्ति दोबारा वापस आने के बारे में बिल्कुल भी ना सोचे क्योंकि यदि एक बार इस किले के अंदर भूल गया तो वापस आना बिल्कुल मुश्किल हो जाता है | दोस्तों किला इतना रहस्यमई होने के बाद भी लोगों के मन में किसी भी प्रकार का डर नहीं होता है| इतनी अधिक मात्रा में रहस्य जानने के बाद भी लोग यहां पर जाने से डरते नहीं हैं क्योंकि इसका रहस्य बहुत ही गहरा होने के कारण लोगों के मन में वहां जाने की लालसा उत्पन्न हो जाती है |

ओरछा अभ्यारण —–

दोस्तों ओरछा अभ्यारण प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर है और आकर्षक भी लगता है जिस कारण से यहां पर पर्यटक देखने के लिए आते हैं | दोस्तों ओरछा अभ्यारण जिसे ओरछा पक्षी अभ्यारण भी कहा जाता है किस अभ्यारण में प्रमुख रूप से बाघ ,तेंदुआ, बंदर, उल्लू ,किंगफिशर ,सियार ,भालू, आदि कई प्रकार के पक्षी होने के साथ-साथ जानवर भी शामिल हैं | दोस्तों ओरछा अभ्यारण की स्थापना वर्ष 1994 के समय हो गई थी जो कि यह अभ्यारण हाल ही में एक प्रकार से नया अभ्यारण है | दोस्तों ओरछा अभ्यारण में ही बेतवा नदी बहती है |दोस्तों ओरछा पक्षी अभ्यारण के अंतर्गत आने वाले जीव जंतु सभी का जीवन बेतवा नदी के द्वारा ही चलता है |

ओरछा अभ्यारण

तालाबों और पर्वतों का जिला—-

दोस्तो टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत जितने भी किले पाए जाते हैं प्रत्येक किले के लिए एक तालाब प्रमुख रूप से निर्मित किया गया था जिसका निर्माण किले के निर्माण के समय ही हो जाता था | दोस्तों टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले जितने भी तालाब हैं वह बहुत ही गजब की टेक्नोलॉजी पर आधारित निर्मित हैं |यदि एक तालाब का पानी बढ़ जाता है और एक तालाब का पानी कम हो जाता है तो कम पानी वाले तालाब में ऑटोमेटिक अधिक पानी वाले तालाब से पानी आ जाता है | दोस्तो टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत अधिक से अधिक तालाब निर्मित किए गए | टीकमगढ़ जिले में जितने भी किले निर्मित किए गए प्रमुख रूप से वह के लिए ऊंचाई पर निर्मित किए गए हैं किसी लिए टीकमगढ़ को पर्वतों का जिला भी कहते हैं |

टीकमगढ़ संग्रहालय –

दोस्तो टीकमगढ़ संग्रहालय एक ऐसा संग्रहालय है जिसका कोई भी निश्चित नाम नहीं है और ना ही इसकी कोई देखरेख की जाती है ना ही किसी प्रकार की सुरक्षा की जाती है | दोस्तों इस संग्रहालय में चंदेल काल से लेकर मौर्य काल तक और बुंदेला शासन तक रहने वाले जितने भी शासक थे जिन्होंने मूर्तियों का निर्माण करवाया और जितने भी अवशेष मिले इन अवशेषों को टीकमगढ़ संग्रहालय में रखा गया है | दोस्तों इस संग्रहालय में एक बार विजिट करने के बाद कोई भी व्यक्ति टीकमगढ़ जिले को एक बेस्ट पुरातत्व और पर्यटक जिला बोलने से कहीं पीछे नहीं हटेगा| टीकमगढ़ का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि टीकमगढ़ जिले में ऐतिहासिक और पुरातत्व चीजें होने के बावजूद भी इस जिले को किसी भी प्रकार से पर्यटक स्थल का दर्जा प्राप्त नहीं है जबकि साक्ष्यों के अनुसार किसी पर्यटक स्थल के लिए टीकमगढ़ जिले में पर्याप्त स्थल हैं |

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