Tikamgarh tourist places in hindi टीकमगढ़ के पर्यटन स्थल

आज हम बात करेंगे मध्य प्रदेश राज्य के टीकमगढ़ जिले के बारे में टीकमगढ़ जिला सागर मंडल के अंतर्गत आता है। इसका मुख्यालय टीकमगढ़ जिले में टीकमगढ़,निवाड़ी जतारा जिला टीकमगढ़ पृथ्वीपुर जतारा बल्देवगढ़ निवाड़ी खड़कपुर जिले में 5 विधानसभा क्षेत्र है।जो टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्रों के अंतर्गत आती है। टीकमगढ़ का अपना व्यक्तिगत व्यवस्थित इतिहास भारत के बुंदेला राजा विक्रम जीत ने करवाया था।
टीकमगढ़ का इतिहास स्वतंत्र होने के बाद ही स्थापित होता है। इससे पहले ओरछा राजवंश के अंतर्गत आता था। जिसका निर्माण रुद्र प्रताप सिंह बुंदेला ने करवाया था। 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश में टीकमगढ़ जिले को शामिल कर लिया गया था। यह जिला मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है।इसकी अधिकांश सीमा उत्तर प्रदेश राज्य से मिलती हैं। टीकमगढ़ जिले से निवाड़ी जिला अलग हो जाने के बाद उसके पर्यटन में बहुत कमी आई है। जितने भी पर्यटन स्थल महत्वपूर्ण थे। वे सभी पर्यटन स्थल अब निवाड़ी जिले का हिस्सा बन चुके हैं।

टीकमगढ़ जिले के पर्यटन स्थल

टीकमगढ़ जिले में बहुत कम पर्यटन स्थल देखने को मिलते हैं। मैं आपको टीकमगढ़ जिले के पर्यटन स्थल के बारे में संपूर्ण जानकारी बता देता हूं। ताकि आप जब भी टीकमगढ़ जाएं, तो इन सभी प्लेस को एक बार अवश्य देखकर आए, जो भी अभी टीकमगढ़ जिले के अंतर्गत पर्यटन स्थल आते हैं। वह भी बहुत अच्छे अच्छे पर्यटन स्थल हैं।

जिलाटीकमगढ़
प्रसिद्ध मंदिरकुंडेश्वर, विंधवासनी देवी मंदिर
उद्योगिक केंद्रप्रतापपुरा
नदीजमदार
संभागसागर के अंतर्गत
तालाबसर्वाधिक
पहले नामटिहरी
प्रसिद्ध पान की खेती
भाषाहिंदी
पर्यटक स्थलमहेंद्र तालाब, टीकमगढ़ का किला, मोहनगढ़ का किला
पुराना नामटेहरी 
स्थापना1947
मेलाभूतो का मेला
महाविद्यालयसंत रामदासस्नातकोत्तर महाविद्यालय

टीकमगढ़ का किला

प्राचीन समय में निर्मित यह किला बहुत ही बड़ा बना हुआ है। मध्यप्रदेश में बहुत सारे किले हैं। उनमें से एक किला टीकमगढ़ का किला भी अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस किले को रक्षा की दृष्टि से बेहद शक्तिशाली माना जाता है।अन्य किलो की तुलना में इस किले में सुरक्षा के बहुत अधिक साधन उपलब्ध थे। इस किले को बल्देवगढ़ का किला के नाम से भी जाना जाता है। यह किला टीकमगढ़ जिले से 26 किलोमीटर की दूरी पर छतरपुर मार्ग पर स्थित है। यह किला 70 एकड़ की जमीन में बना हुआ है। सैनिक छावनी के लिए बनवाया गया था।सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खास था। इस किले में प्रवेश करने के लिए 7 द्वार बनाए गए थे। इस किले को खाई के बीचो बीच बनाया गया था। जब भी दुश्मन हमला करते थे। तो दुश्मनो को नजदीक आने पर खाई में गिरा दिए जाता था।जिसके कारण उनकी मृत्यु हो जाती थी। यह किला तीन ओर से खाई से घिरा हुआ था। इस खाई में पानी भरा हुआ था। और अजगर, मगरमच्छ आदि को पाला गया था। जिसके कारण इस किले को भेद पाना नामुमकिन था। दूसरा द्वार पहरेदारो को खड़ा करने के लिए बनाया गया था। इसी कारण से इस द्वार को काफी ऊंचा बनाया गया था। यह किला तीनों तरफ से तालाब से गिरा हुआ है। इस किले के अंदर अभी भी एक बंदूक और एक तोप रखी हुई है। इस तोप को मात्र एक बार ही चलाया गया था, इसकी तेज आवाज के कारण बहुत सी स्त्रियों का गर्वपात हो गया था। उसके बाद उस तोप का इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया था।

कुंडेश्वर धाम

भारत हमेशा से ही कला संस्कृति एवं चमत्कारों की वजह से जाना जाता है। आज हम बात करेंगे ऐसे ही चमत्कारी शिवलिंग के बारे में नमस्कार दोस्तों बुंदेलखंड नगरी में आपका स्वागत है।एक चमत्कारी शिवलिंग जो अपने आकार बढ़ने के बात के साथ प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित कुंडेश्वर मंदिर का शिवलिंग अपने चमत्कार के कारण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जी हां शिवलिंग को लेकर लोगों की ऐसी मान्यता है, कि कुंडेश्वर मंदिर में स्थित यह शिवलिंग एक दिव्य एवं चमत्कारी शिवलिंग है। भक्तों का कहना है कि शिवलिंग का आकार वर्ष में एक चावल के जितना बढ़ता है।आकार बढ़ने के कारण यह शिवलिंग श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।कुंडेश्वर के स्थानीय निवासरत लोगो का भी यही कहना है, कि शिवलिंग का आकार वर्ष में एक चावल के जितना बढ़ता है। हालांकि शिवलिंग का बड़ना एक प्राकृतिक घटना भी हो सकती है।वैज्ञानिक खुद इस बात को मानते हैं, कि पत्थर का आकार पानी या दूध से भी बढ़ सकता है। परंतु शिव भक्त इसे अपनी आस्था से जुड़कर चमत्कार के रूप में बताते हैं।

Kundeshwar Dham

इस मंदिर और शिवलिंग के बारे में एक और कथा प्रचलित है जिसे यहां के स्थानीय लोग सत्य मानते हैं, कहा जाता है कि बहुत समय पूर्व बानपुर के महाराज बाणासुर की पुत्री राजकुमारी ऊषा रात्रि के समय महल से निकलकर जामनी नदी को पार करके इस स्थान पर आया करती थीं। जो यहां स्थित कुंड के अंदर जाती थी। कुंड का पानी दो हिस्सों में बांट कर कुंड के अंदर जाने के लिए राजकुमारी ऊषा को मार्ग प्रदान करता था। जब महाराज बाणासुर को पता चला कि उनकी पुत्री रात्रि के समय महल के बाहर जाती है,तो उन्होंने राजकुमारी ऊषा का पीछा किया। और राजकुमारी के पीछे पीछे कुंड तक आ गए। प्रतिदिन की तरह कुमारी ऊषा ने कुंड में प्रवेश किया। और उनके कुंड में प्रवेश करते ही कुंड के अंदर जाने वाला मार्ग बंद हो गया।महाराज बाणासुर बाहर ही राजकुमारी ऊषा की प्रतीक्षा करते रहे। सुबह होते ही राजकुमारी जैसे ही कुंड से बाहर आई। तो अपने पिताश्री को बहुत देखकर चकित रह गई। महाराज ने उनसे पूछा कि वह रात्रि के समय कुंड में क्यों जाती है, इसका रहस्य क्या है तब राजकुमारी ने महाराज बाणासुर को बताया कि कुंड के अंदर भगवान शिव हैं।और वे शिव की पूजा करने वहां जाते हैं। तब महाराज बाणासुर ने उन्हें कुंड के अंदर जाने के लिए मना कर दिया। फिर उसने भगवान शिव से प्रार्थना की कि अब मैं आपकी पूजा के लिए कुंड के अंदर नहीं आ सकती। इसीलिए आप कुंड के बाहर आकर मुझे दर्शन दे।भगवान शिव ऊषा की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवलिंग के रूप में कुंड से बाहर आए इसलिए इस मंदिर का नाम कुंडेश्वर नाम से विख्यात हो गया।

कुंडेश्वर धाम

विंध्यवासिनी देवी मंदिर

विंध्यवासिनी देवी मंदिर टीकमगढ़ से 22 किलोमीटर दूर छतरपुर रोड पर स्थित है। यह मंदिर काफी प्रचलित मंदिर है। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है, कि देवी को विंध्यांचल पर्वत से लाया गया था। और यहां पर विराजमान कराया गया था।उनका कहना है कि जो भी भक्त श्रद्धा के साथ आता है। उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती हैं। आप सभी को एक बार विंध्यवासिनी मंदिर होकर आना चाहिए।ताकि आपकी भी मनोकामना पूर्ण हो सके।

महेंद्र तालाब

महेंद्र तालाब टीकमगढ़ जिले का सबसे बड़ा तालाब माना जाता है। यह तालाब बहुत बड़े एरिया में बना हुआ है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यह तालाब बहुत ही सुंदर तरीके से बनाया गया है। एक बार आपको इस तालाब को देख कर आना चाहिए।इस तालाब को चमत्कार के रूप में भी जाना जाता है। कहा जाता है कि उसका पानी हमेशा एक समान बना रहता है।

मोहनगढ़ का किला

यह बहुत ही प्राचीन किला है, बताया जा रहा है, कि यह किला अपने आप में बहुत ही भव्य बना हुआ था। तीन गड़ो के नाम पर इस किले का नामकरण किया गया था। यह 2 मंजिला इमारत के रूप में बनाया गया था।यहां पर मूर्तियो की संख्या भी काफी थी।अब यह किला खंडहर के रूप में बन गया है।इसकी ज्यादा देखरेख ना होने के कारण यह खंडहर में परिवर्तित हो गया है।

•टीकमगढ़ जिला बुंदेलखंड भाग के अंतर्गत आता है। यहां पर मुख्य रूप से बुंदेलखंडी भाषा बोली जाती है।
•धसान, बेतवा टीकमगढ़ की प्रमुख नदियां हैं।
• टीकमगढ़ जिले में ओरछा महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
• टीकमगढ़ जिले का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कुंडेश्वर धाम है।
• टीकमगढ़ जिले मे मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा तालाब मिलते हैं।
• टीकमगढ़ जिले को 2013 में रेल सेवा से भी जोड़ दिया गया है।
• टीकमगढ़ जिले का क्षेत्रफल निवाड़ी जिले के अलग हो जाने के बाद 1048 वर्ग किलोमीटर बचा है।
• कुंडेश्वर धाम के बगल में बना कुंड जिसकी गहराई का पता कोई नहीं कर पाया है।

मोहनगढ़ का किला

Tikamgarh tourist places in hindi टीकमगढ़ जिले के पर्यटन स्थल FAQ’s

  1. कुंडेश्वर धाम मंदिर में किसकी मूर्ति विराजमान है?
    भगवान शिव की
  2. कुंडेश्वर धाम मंदिर का मुख्य चमत्कार क्या है?
    प्रतिवर्ष एक चावल के दाने के बराबर आकार का बढ़ना।
  3. टीकमगढ़ जाने के लिए हवाई सेवा उपलब्ध है या नहीं।
    नहीं (बस और ट्रेन सुविधा उपलब्ध है)
  4. टीकमगढ़ जिले का सबसे प्रसिद्ध स्थान कौन सा है।
    कुंडेश्वर धाम
  5. टीकमगढ़ जिले में सबसे ज्यादा किसकी संख्या है।
    तालाबों की
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