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चुलकाना धाम जाने का रास्ता, चुलकाना धाम निकटतम रेलवे स्टेशन

हरियाणा के पानीपत जिले से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर एक चुलकाना गांव स्थित है जहां पर भगवान श्री कृष्णा और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक से संबंधित ऐतिहासिक तीर्थ स्थल मौजूद है यहां पर पहुंचने के लिए आप किसी भी रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं ट्रेन के माध्यम से भी पानीपत जा सकते हैं और पानीपत जाने के बाद आप ऑटो रिक्शा या फिर किसी अन्य वाहन के माध्यम से भी चुलकाना गांव जा सकते हैं । आज के आर्टिकल में हम समझेंगे कि चुलकाना धाम कैसे पहुंच सकते हैं?

समालखा रेलवे स्टेशन से जाना हुआ आसान!

स्थानसमालखा रेलवे स्टेशन
जिलापानीपत
राज्यहरियाणा
तीर्थ स्थलबाबा श्याम का पावन तीर्थ स्थल
अंतराललगभग 5 किलोमीटर
परिवहनरेलवे स्टेशन से टैक्सी या अन्य माध्यम से धाम पहुंच सकते हैं

हरियाणा के पानीपत जिले में आने वाली लगभग हर राज्य से ट्रेन की व्यवस्था है क्योंकि पानीपत से ही होकर ट्रेनों का आना-जाना रहता है। यातायात की सुविधा के लिए केवल ट्रेन ही नहीं बल्कि कई अन्य वाहन भी मौजूद हैं जैसे बस, कार, टैक्सी तो आप इस प्रकार के वाहनों के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं।

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चुलकाना धाम की प्रसिद्ध का कारण?

चुलकाना धाम महाभारत काल की समय होने वाली एक बहुत ही प्राचीन घटना के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां पर बर्बरीक का सिर मौजूद है जो भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र के द्वारा काटा था। भगवान श्री कृष्णा और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की रोचक में कहानी है क्योंकि बर्बरीक अगर उस दिन युद्ध में शामिल हो जाता तो युद्ध एक ही दिन में समाप्त हो जाता है और महाभारत का इतना बड़ा उदाहरण हमारे सामने कभी नहीं होता साथ ही सबसे बड़ा धनुर्धर और सबसे बड़ा योद्धा भी वही कहलाता।

बाबा ने यहीं पर दिया था भगवान श्री कृष्ण को दान में सिर

बाबा खाटू श्याम के बारे में न जाना है सिखाई कहानी मौजूद हैं दिन के बारे में हमने सुन रखा है लेकिन उनमें से एक कहानी बहुत ही सुंदर है जो घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक से जुड़ी हुई है क्योंकि बर्बरीक के बारे में भगवान श्री कृष्ण ने खुद कहा था कि इस संसार में केवल तीन ही सबसे बड़ी योद्धा है एक में दूसरा अर्जुन और तीसरा घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक।

भगवान श्री कृष्ण ने कियाविवरण
क्या कियाधर्म स्थापना के लिए युद्ध समाप्त न होने की प्रार्थना
इसके बदले कियाबर्बरीक से बलिदान मांग लिया
बलिदान का प्रकारउन्होंने ब्राह्मण भेष रख के बर्बरीक का सिर मांगा

भगवान श्री कृष्ण ने धर्म स्थापना के लिए एक ही दिन में युद्ध समाप्त न हो जाए इसके बदले बर्बरीक से अपना बलिदान मांग लिया और बलिदान के तौर पर उन्होंने ब्राह्मण भेष रख के उसका सिर मांग लिया। बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण को दान में कर दे दिया और यह उदाहरण साबित कर दिया कि मैं एक ही बाद से सब कुछ खत्म कर दूंगा जो मेरे लक्ष्य में आ जाएगा इसी के लिए एक उदाहरण ऐसा दिया गया है कि वहां पर जो पीपल का पेड़ है उसमें हर पत्ते में छेद मिलेगा क्योंकि एक ही बाद से उसने पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को जला दिया था।

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