मूलाकरम क्या है? नांगेली का बलिदान और स्तनकर – Mulakkaram Breast Tax

मूलाकरम /ब्रेस्ट टैक्स / Breast Tax , ब्रेस्ट टैक्स क्या है? ब्रेस्ट टैक्स कहाँ लागू हुआ करता था, मूलाकरम या मूलाकरण क्या है?, स्तरकर क्या है? Breast Tax Kya Hai, Mulakkaram Breast Tax Kya Hai?, आज हम इन सभी प्रश्नों के बारे में विस्तृत तरीके से जानेंगे |

दोस्तों ! बहुत कम लोग ही जानते हैं कि कुछ टैक्सों का प्रभाव तो आम जनता पर ऐसा रहा कि उनका जीना ही मुश्किल हो जाता था | यहां तक कि उनको कहीं ना कहीं उस टैक्स के कारण जब दे नहीं पाते थे, तो अपनी जान के दुश्मन स्वयं बन जाते थे |

            दोस्तों ! यह कहानी हैं सन् 1729 के आसपास की  , हमारे भारत देश के दक्षिणी राज्य केरल की जहां पर उच्च जातियों के द्वारा यह कर लगाया गया था निचली जातियों पर जिसमें निचली जातियों को अपना स्तन को ढकना नहीं था | यदि किसी निचली जाति को अपना स्तन ढकना है तो उसको मूलाक्रम देना होता था अर्थात ब्रेस्ट टैक्स चुकाना होता था |दोस्तों यह थी मोटी- मोटी जानकारी पूरी जानकारी के लिए आगे देखें—-

Table of Contents

1. स्तनकर क्या है? : मूलाकरम कर, मूलाकरम /ब्रेस्ट टैक्स / Breast Tax ,

         दोस्तों ! बात उस समय की है जब भारत आजाद नहीं था उस समय हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन था | दोस्तों ऐसे कर जो कभी विदेशी शासन ने भी नहीं लगाए देश की जनता पर, लेकिन कभी-कभी हमारे देश के कुछ राजाओं ने ऐसे कर लगाए, जिनको चुकाना तो आम जनता के लिए अलग बात है, कर इकट्ठा कर पाना भी उनके लिए बहुत मुश्किल था  |

मुझे तो यहां बताने में भी शर्म आती है कि लोग ऐसे भी शासन करते हैं, कर लगाने में कोई बुराई नहीं थी ना ही किसी को चुकाने में कोई हैरानी होती थी लोग कर चुकाते भी थे | लेकिन यह कर तब नुकसानदायक और अत्याचार की तरफ गया ,जब राजाओं ने अपनी समाज की महिलाओं को छोड़कर और उच्च जाति की महिलाओं को छोड़कर, निचली जातियों पर इस कर को लागू किया | इस समय एक राजा नहीं हुआ करता था कई राजा हुआ करते थे भारत तब अलग-अलग रियासतों में बंटा था |

2. त्रावणकोर / Travancore में मूलाकरम कर

दोस्तों ! त्रावणकोर केरल का ही नाम है उस समय इसे त्रावणकोर के नाम से जाना जाता था | दोस्तों बात तब की है जब ब्रिटिश शासन की पूरी हुकूमत मद्रास प्रेसीडेंसी पर चलने लगी थी |

             दोस्तों !1729 में त्रावणकोर राज्य की स्थापना की गई | इस राज्य की स्थापना का श्रेय मार्तंड वर्मा (1729-1758 )को जाता है | आज के समय में हम इसे केरल कहते हैं |  त्रावणकोर राज्य 1729 से 1949 तक चला अब 1949 में सबको पता है भारत आजाद हो चुका था | इसके बाद रियासतों वाला दौर धीरे-धीरे खत्म हो चुका था अलग-अलग शासन करना बंद हो गया था | रियासतों को खत्म कर राज्य बनाए गए फिर राज्यों को मिलाकर भारत राज्यों का संघ कहलाने लगा |

मूलाकरम क्या है

3.  त्रावणकोर का कानून

दोस्तों ! जब मार्तंड वर्मा ने 1729 में त्रावणकोर की स्थापना की तब वहां पर एक कानून बनाया गया | जिसमें उच्च जातियों की महिलाओं को छोड़कर और उच्च जाति के पुरुषों को छोड़कर निचली जाति के लोगों पर स्त्री और पुरुष दोनों पर लागू होता था यह कानून ऊंची जातियों के द्वारा बनाया गया था |

4. पुरुषों के लिए कानून 

दोस्तों केवल निचली जाति के लोगों पर यह कानून लागू होता था | इस कानून में यदि निचली जाति के जो पुरुष वर्ग होंगे वह यदि सिर पर किसी प्रकार की पगड़ी रखते हैं , गमछा डालते हैं अर्थात सर को ढकने के लिए किसी भी तरीके से किसी कपड़े का प्रयोग करते हैं और सर ढकते हैं तो उस कारण उसे टैक्स भरना पड़ता था |

            अब आप लोग सोच सकते हैं कि कानून बनाने वाला कोई विदेशी नहीं था बल्कि हमारे ही बड़े बुजुर्ग जो पहले से प्रशासन चलाते आ रहे हैं  |  इस कानून की खास बात यह है कि यह ऊंची जातियों द्वारा बनाया गया था और केवल निम्न जातियों पर लागू होता था | दोस्तों यह किस प्रकार का कानून है यदि कोई पगड़ी रखे तो टैक्स भरना पड़ेगा | अब यह साधारण लोग उस समय निम्न जाति के मजदूर हुआ करते थे धूप में काम भी कैसे करते होंगे उनको पगड़ी रखना भी जुर्म है, रखें ! तो टैक्स भरना पड़ेगा, ना रखें तो काम कैसे करेंगे?

5. महिलाओं के लिए कानून- 

दोस्तों थोड़ा आपने पुरुषों के बारे में जाना कि उनको किस वजह से मूलाकरम कर को भरना पड़ता था | वहीं दूसरी ओर निम्न जाति की महिलाओं पर यह कर बहुत ही हावी हो गया यहां तक कि मुझे तो बताने में झिझक हो रही है तो आप सोचो कि उनको क्या करना होता होगा, किस तरह से यह टैक्स उन पर लागू होता होगा | दोस्तों ! महिलाओं को कर देने में कोई समस्या नहीं होती यदि कर देने का तरीका सही होता |  कर लगाने का तरीका सही होता लेकिन ,समस्या यह थी कि केवल निम्न जाति की महिलाओं पर यह कर लागू होता था | ऊंची जाति की महिलाओं पर यह कर लागू नहीं होता था | ऊंची   जाति की महिलाएं पूरी तरह से इस कर से  मुक्त थी और सुरक्षित थी |

6. स्तन को ना ढ़कना – एक प्रकार का कर

             दोस्तों उस समय निम्न जाति की महिलाओं को अपना स्तन ढककर नहीं चलना होता था | वह हमेशा स्तन को बिना ढके रहेंगी | अब आप सोचिए कि कितना मुश्किल होता होगा नई युवतियों के लिए ,कोई शादीशुदा महिला भी हो सकती है ,कोई नई लड़की भी हो सकती है ,कोई किशोर उम्र की लड़की भी हो सकती है, छोटी जाति की कोई भी महिला अपने स्तन को नहीं ढक सकती, अगर ढकना चाहती है तो उसे मूलाकरम चुकाना पड़ेगा |

7. मूला कर्म कैसे लगता था?

दोस्तों! अब बात आती है अगर कोई मूलाक्रम देना चाहे तो दोस्तों ,आपको बता दें कि पुरुषों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था लेकिन महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान बनाए गए थे | दोस्तों निम्न जाति की महिलाओं को यदि अपने स्तनों को ढकना हैं तो उनको  मूलाकरम देना होता था |

8. स्तन के आकार पर निर्भर करता था – मूलाकरम कर

यहां तक तो ठीक था, लेकिन एक प्रावधान और भी था कि मूलाकरम  ब्रेस्ट साइज अर्थात स्तनों के आकार की हिसाब से मूलाकरम तय किया जाएगा  | जिस महिला का जितना ब्रेस्ट साइज होगा उसी हिसाब से उसे मूलाकरम तय किया जाएगा कि उसे मूलाकरम कितना भरना है |

            दोस्तों ! कितनी शर्मनाक घटना है उस समय  कि कैसे लोग बर्दाश्त कर पाते होंगे |  दोस्तों महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इस प्रकार का कर, कोई विदेशी शासन ने शुरु नहीं किया था | बल्कि ऊंची जातियों ने निम्न जातियों पर लगाया था | आप लोग समझ सकते हैं कि जातिगत व्यवस्था कितनी बुरी थी | जातियों के माध्यम से किसको क्या सम्मान मिलता होगा | इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि अंग्रेजों से तो लोग परेशान थे वह अलग बात है परंतु नीची जातियों पर जो अत्याचार हो रहा था ऊंची जातियों के द्वारा वह बहुत ही शर्मसार था |

Breast Tax

9. नांगेली कौन थी? जिसने किया मूलाकरम कर देने से इंकार

दोस्तों ऐसा माना जाता है कि जब- जब भी कोई समाज में बड़ा बदलाव हुआ है तब -तब किसी ना किसी ने इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई होती है | ऐसी ही एक महिला थी त्रावणकोर राज्य की जिसका नाम था- नांगेली |

            नांगेली, त्रावणकोर राज्य की ऐजवा जाति (जो कि वहां की एक निम्न जाति है) की एक महिला थी | इस महिला को स्तन को बिना ढके चलना बिल्कुल भी पसंद नहीं था | एक बार क्या हुआ ,ऐसा माना जाता है कि जब यह कहीं जा रही थी बिना स्तन को ढके और सब लोग उसको देखे जा रहे थे साथ ही साथ ऊंची जाति के लोग भी देखे जा रहे थे ,आगे -आगे वह पुरुष भी देख रहे थे जिनको त्रावणकोर के राजा घर-घर जाकर मूलाकरम वसूलने भेजा करते थे | दोस्तों!  अब आपको क्या ही बताएं इतनी शर्मनाक हरकत करते थे ऊंची जाति वाले निचली जातियों पर कि आप केवल कल्पना ही कर सकते हैं ,सोच सकते हैं कि कितनी बुरी तरीके से निम्न जातियों को पीड़ित किया जाता होगा |

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10. टैक्स लेने का तरीका : घटिया पद्धति

दोस्तों ! टैक्स लेने का जो प्रावधान था वह बहुत ही घटिया था टैक्स लेने वाले जो लोग होते थे वह ऊंची जाति के ही होते थे | टैक्स लेने के लिए जब कभी-कभी  राजा और उनके टैक्स लेने वाले अधिकारी घर-घर जाते थे तब कभी-कभी महीने के हिसाब से कभी-कभी हफ्ते के हिसाब से टैक्स लेते थे | दोस्तो टैक्स लेने का जो प्रावधान था वह यह था कि टैक्स जो पैसा होता था उसको केले के पत्ते में देने का प्रावधान था कुछ ऐसे प्रावधान बनाए जाते थे जो केवल निम्न जातियों पर लागू हुआ करते थे इस प्रकार उनको बुरी तरीके से प्रताड़ित किया जाता था जो लोग टैक्स नहीं भर पाते थे उनको जातिगत बातों से बुरी तरीके से बेइज्जत किया जाता था और उनको ना जाने कितनी गंदी- गंदी बातों से ऊंची जातियों के द्वारा निम्न जातियों को परेशान किया जाता था |

11. नांगेली का बलिदान क्या है? 

दोस्तों नांगेली ऐजवा जाति( वहां की निम्न जाति) की पहली महिला होती है जिसने साहस के साथ खड़े होकर लड़ने के बारे में सोचा अपने आत्मसम्मान को बचाने की लड़ाई के बारे में सोचा | दोस्तों नांगेली का बलिदान ऐजवा जाति और पूरे त्रावणकोर राज्य पर विस्फोट साबित हो गया | दोस्तों क्या हुआ ऐजवा जाति में नांगेली पहली महिला थी जिसे यह कानून बिल्कुल भी पसंद नहीं था |  उसका कहना था कि वह ना तो अपने स्तनों को दिखाकर चलेगी बल्कि स्तनों को ढक कर चलेगी | इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए | जब  नांगेली  इकलौती महिला होती है जो अपने स्तनों को ढक कर चलती है तो यह बात पूरे समाज में धीरे-धीरे फैल गई | इस प्रकार धीरे-धीरे पूरे गांव में बात चल गई अब उच्च जाति के लोग सोचने लगे कि निम्न जाति के लोग तो हम से बगावत करने लगे हैं | कानून का उल्लंघन करने लगे हैं, इस प्रकार धीरे-धीरे यह बात त्रावणकोर के राजा तक पहुंच जाती है |

12. नांगेली के कर ना देने की बात पहुंची राजा तक

         इस प्रकार जब राजा तक बात पहुंच जाती है तो त्रावणकोर के राजा के जो टैक्स अधिकारी थे उनको भेजा टैक्स वसूलने के लिए उस दिन दोपहर का समय होता था | जब टैक्स अधिकारी नांगेली  के पास आते हैं तो नांगेली  से काफी बहस हो जाती है और   नांगेली   टैक्स देने से मना कर देती है | परिणाम स्वरूप जो टैक्स अधिकारी थे उसे बहुत ही बेइज्जत करते रहे ,अपशब्द बोलते रहे, जातिसूचक शब्दों से उसका अपमान करते रहे | इस प्रकार जब   नांगेली  ने टैक्स देने से मना कर दिया तो यह खबर पूरे गांव में फैल गई यह खबर राजा तक पहुंच गई इसके बाद परिणाम यह हुआ की   नांगेली   टैक्स देने के लिए राजी हो गई |

13. नांगेली ने स्तन को काटा चाकू से

टैक्स लेने से पहले एक प्रावधान हुआ करता था कि टैक्स उसी प्रकार से आंका जाएगा ब्रेस्ट की साइज को देखकर तो ब्रेस्ट की साइज को      नांगेली   को दिखाना पड़ा इसके बाद   नांगेली   अंदर जाती है और कुछ समय लगाती है |  अधिकारी बाहर खड़े रहते हैं ,उनको लगता है कि  नांगेली   टैक्स लेने के लिए अर्थात जो कि पैसे हुआ करते थे लेने के लिए अंदर गई है लेकिन उसका ठीक उल्टा हो जाता है वह अंदर से केर  के पत्ते में अपने दोनों स्तनों को चाकू से काटकर बाहर ले आई | यह सब देख कर वहां पर खड़े सभी गांव के लोग और जो टैक्स अधिकारी थे वह चौक गए | टैक्स अधिकारी भागकर राजा के पास गए धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई कुछ समय तक  नांगेली  वहीं पर तड़पती रही और फिर उसने अपना दम तोड़ दिया |

14. नांगेली के साथ उसके पति ने भी दिया बलिदान : मूलाकरम कर

          दोस्तों इसके बाद  नांगेली के पति ने उसका अंतिम संस्कार किया और इस घटना के बाद उसका पति पूरी तरह दुखी हो चुका था प्रताड़ित हो चुका था |  नांगेली  कि इस घटना के बाद जब   नांगेली   के शरीर का उसने अंतिम संस्कार किया तो इसके साथ नांगेली के पति ने स्वयं को भी उस चिता में जला लिया | दोस्तों यह पहली घटना थी जब किसी स्त्री के लिए किसी पुरुष ने जलती चिता में अपने प्राणों का बलिदान दिया | ठीक इसका उदाहरण सती प्रथा में देखने को मिलता है जब स्त्री को जबरदस्ती पुरुष के साथ जला दिया जाता था हालांकि यह प्रथा एक निश्चित समय के बाद बंद हो गई थी |

15. नांगेली की पूजा क्यों होती है?

दोस्तो लगभग- लगभग नांगेली के इस बलिदान ने समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन ला दिया था |  केरल में तो आज भी    नांगेली की पूजा की जाती है  नांगेली  के इस बलिदान की सराहना की जाती है | दोस्तों  नांगेली  की पूजा इसलिए की जाती है कि इस के बलिदान से दूर-दूर के राजाओं द्वारा त्रावणकोर के राजा के ऊपर दबाव बनने लगा था अंत में राजा को निचली जाति पर लगने वाले इस मूलाकरम टैक्स को हटाना पड़ा दोस्तों | मूलाकरम हटाने का समय 1803 के आसपास का है | दोस्तों आप लोग समझ सकते हैं कि 1729 के समय त्रावणकोर राज्य की स्थापना हुई थी और 1803 तक कितना अत्याचार हुआ हुआ आप केवल कल्पना ही कर सकते हैं|

16. Nadar / नाडर कम्युनिटी : पगड़ी कर को भी हटाया जाए

दोस्तों ब्रेस्ट टैक्स त्रावणकोर की 2 जातियों पर लगता था एक जाति थी वहां की ऐजवा और दूसरी जाति थी वहां की  नाडर यह टेक्स इन दोनों जातियों पर लागू होता था | ऐजवा जाति के लोगों पर से तो मूलाकरम टैक्स खत्म हो गया था अब नाडर जाति के लोग भी चाहते थे कि हम भी सर पर पगड़ी रखें और कोई भी महिला नहीं चाहती थी कि हम स्तन को दिखाकर चलें | वह भी चाहती थी कि हम भी अपने स्तन को ढक कर चलें इस प्रकार वहां के नाडर जाति के लोग धीरे-धीरे कैथोलिक धर्म में परिवर्तित होने लगे थे |

17. मूलाकरम कर से बचने के लिए नाडर जाति का कैथोलिक धर्म अपनाना

           कैथोलिक धर्म के लोग ऊंची जाति में गिने जाते थे इसलिए नाडर जाति के लोग कैथोलिक धर्म में परिवर्तित हो रहे थे | इन लोगों को लगता था यदि हम कैथोलिक धर्म में बदल जाएंगे तो हम नीची जाति के लोग नहीं रह जाएंगे और ना ही हमें किसी प्रकार का टैक्स भरना पड़ेगा | कैथोलिक धर्म में परिवर्तित होने से उनको लगता था कि हम अपने स्तनों को ढक सकेंगे और हम पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा |  यह खबर धीरे-धीरे त्रावणकोर के राजा को पता लग जाती है इस समय तब 1859 का समय था | तब मद्रास प्रेसीडेंसी पर ब्रिटिश हुकूमत थी पूरी तरह से यह समय मद्रास के गवर्नर चार्ल्स triveliun ने त्रावणकोर के राजा के ऊपर अपना प्रेसर बनाया और परिणाम स्वरूप नाडर समुदाय के ऊपर से भी इस कार्य को पूर्ण रूप से हटा दिया गया |

18. स्वतंत्रता की लड़ाई के समय मूलाकरम कर

          इन समुदाय को तो मूला करम  से मुक्ति मिल गई थी लेकिन मूला करम  को त्रावणकोर के कई इलाकों में सन 1924 तक वसूला गया | 1924 के समय आजादी की लड़ाई लगभग  अपने चरम पर थी ,इस प्रकार 1924 में मूला कर्म को पूर्ण रूप से खत्म किया गया | इस तरह भारत की एक और बेहद घटिया प्रथा का अंत होता है | भारत में स्तन कर और पगड़ी कर को इस तरह से पूरा तरह बंद कर दिया गया |

19. FAQ –  मूलाकरम कर और नांगेली का बलिदान

1. मूलाकरम /ब्रेस्ट टैक्स / Breast Tax कहाँ लगाया जाता था?
उत्तर – भारत देश के दक्षिणी राज्य केरल की जहां पर उच्च जातियों के द्वारा यह कर लगाया गया था निचली जातियों पर

2. लोगों को किस कार्य का कर देना होता था?
उत्तर – महिलाओं को स्तन ढ़कने के लिए और पुरुषों की सर पर पगड़ी रखने के लिए

3. किन जातियों पर लगाया जाता था ये कर?
उत्तर – केवल निम्न जातियों पर, ( उच्च जातियों की महिलाओं को छोड़कर और उच्च जाति के पुरुषों को छोड़कर, निचली जाति के लोगों पर स्त्री और पुरुष दोनों पर लागू होता था |)

4. मूलाकरम कर न देने की आवाज सर्वप्रथम किसने उठाई?

उत्तर – नांगेली ने ( केरल के त्रावणकोर की एक दलित महिला)
नांगेली ने कर देने से मना कर दिया, और विद्रोह करते हुए अपने प्राणों की बलि दे दी |

5. नांगेली की पूजा कहाँ होती है?
उत्तर – केरल में ( केरल में तो आज भी  नांगेली की पूजा की जाती है  नांगेली  के इस बलिदान की सराहना की जाती है | )

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