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मनोना धाम कहां है? मनोना धाम का इतिहास, Reviews

उत्तर प्रदेश के बरेली के निकट मौजूद खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध मंदिर मौजूद है जिसे मनोना धाम भी कहा जाता है लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि समय-समय पर यहां पर इतनी भीड़ हो जाती है कि लोगों का संभालना मुश्किल हो जाता है। मनोना धाम वही जगह है जहां पर भगवान श्री कृष्ण को घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपना सिर दान में दे दिया था।

घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक के बारे में कहा जाता है कि यह इतना बलशाली था कि इसका बाण कभी खाली नहीं जा सकता था चाहे बन के आगे कुछ भी आ जाए इसीलिए कहा जाता है कि जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने पैर के नीचे पीपल के पत्ते को दवा लिया था तो बाण के प्रभाव से उनका पैर कमजोर हो गया था और यही उनके शरीर त्यागने का कारण बना था। आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक और भगवान श्री कृष्ण के बीच मनोना धाम का क्या इतिहास है ?और क्या कहानी है?

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बरेली जिले का सबसे प्रसिद्ध मंदिर–

उत्तर प्रदेश की बरेली जिले में यह सबसे प्रसिद्ध मंदिर है जहां पर आसपास के लोग ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बाबा खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए आते हैं इसका सबसे बड़ा कारण है कि यहां पर आने के बाद यह 100% संभावना है कि आपका हर कष्ट दूर हो जाएगा। बाबा खाटू श्याम को दर्शन करने के लिए जो भी आता है और जिस भी अभिलाष से आता है उसकी हर अभिलाषा पूरी होती है इसीलिए हजारों किलोमीटर से लोग इस धाम पर दर्शन करने के लिए आते हैं ।

मनोना धाम का इतिहास–

किस्सापात्रविवरण
मनोना धामबर्बरीकमहाभारत काल के समय भगवान श्री कृष्ण के अलावा अर्जुन और घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक ही सबसे बलशाली था जिसका शरीर इतना विशाल था कि पूरे महाभारत काल में उसके अलावा कोई इतना विशाल नहीं था ।

मनोना धाम के इतिहास के बारे में बहुत से ऐसे किस्से हैं जो मन को आनंदित कर देते हैं क्योंकि इसमें त्याग और बलिदान की कहानी मौजूद हैं।

महाभारत काल में जब युद्ध की समाप्ति के लिए बर्बरीक ने युद्ध का ऐलान किया और आगे बढ़ गया उसके पहले ही भगवान श्री कृष्ण ने सोचा कि इस तरह से तो पूरा युद्ध समाप्त हो जाएगा और सब कुछ खत्म हो जाएगा इसीलिए बर्बरीक से उन्होंने बलिदान मांग लिया। कभी भी कोई ब्राह्मण अगर किसी से कुछ मांगता है तो वह धन हो सकता है या फिर खाने पीने की चीज हो सकते हैं मगर कभी किसी का सिर नहीं मांग सकता लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने चल से बर्बरीक से उसका सिर ही मांग लिया। बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण का विशाल दर्शन करने के बाद खुशी-खुशी अपना बलिदान दे दिया और धर्म स्थापना के लिए एक पीपल के पेड़ के सभी पत्तों में एक ही बाण से छेड़ कर दिया।

मनोना धाम और खाटू श्याम के बारे में अनसुने तथ्य–

  1. मनोना धाम में स्थित खाटू श्याम घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक को ही कहा जाता है और घटोत्कच स्वयं माता कुंती के पुत्र भीम का पुत्र है जो पांडव में सबसे बलसाली था ।
  2. मनोना धाम में भगवान श्री कृष्णा और बर्बरीक के बीच घटना घटने वाली स्थिति को दर्शाया गया है।
  3. मनोना धाम वही जगह है जहां पर भगवान श्री कृष्ण को बर्बरीक ने दान में सर दिया था ।
  4. मनोना धाम जाने वाले हर श्रद्धालु की हर मनोकामना पूरी होती है यह इस बात का प्रमाण है कि यहां पर जाने के बाद आज तक कोई भी व्यक्ति खाली नहीं लौटा है ।
  5. मनोना धाम वर्तमान समय में बहुत ही चर्चित और विख्यात है जिसकी कहानी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
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